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अदालती समीक्षा से रुक जाती हैं सरकारी निविदाएं

अदालत से
एम जे एंटनी /  April 14, 2019

शीर्ष न्यायपालिका अमूमन रिट याचिकाओं में निविदाओं की शर्तों को दी गई चुनौती का परीक्षण नहीं करती है लेकिन सरकार एवं सार्वजनिक उपक्रमों के आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने से उच्चतम न्यायालय ने निविदा प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए नियंत्रण एवं संतुलन के कुछ उपाय भी किए हैं। इसके बाद वह कुछ विरले मामलों में निविदाओं की समीक्षा भी करता है। लेकिन उच्चतम न्यायालय के मुताबिक 'आजकल यह दायरा बड़ा हो गया है कि लगभग हर छोटी-बड़ी निविदा को रिट याचिका के तहत चुनौती दी जा रही है।' उसने केयरटेल इन्फोटेक लिमिटेड बनाम एचपीसीएल मामले में अपना फैसला सुनाते समय यह टिप्पणी की। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि इस प्रवृत्ति के चलते निजी क्षेत्र से मुकाबला कर रहे सार्वजनिक उपक्रमों की वाणिज्यिक गतिविधियों के असरदार होने पर असर पड़ता है। न्यायालय ने कहा है, 'निविदा प्रक्रिया से जुड़े छोटे-छोटे बिंदुओं की गैरजरूरी एवं सघन समीक्षा होने से सरकारी ठेकों का आवंटन काफी दु:साध्य हो जाता है। लंबे समय तक चलने वाले मुकदमे भी समस्या बढ़ाते हैं। निजी क्षेत्र भी कमोबेश उसी कारोबार में सक्रिय होते हैं। निजी कंपनियों के ठेकों में जल्दबाजी एवं सक्षमता का जोर होता है। ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र की निविदाएं उसे गैर-प्रतिस्पद्र्धी बना देती हैं। यह स्थिति सरकार एवं सार्वजनिक क्षेत्र दोनों के लिए काफी नुकसानदायक है।'

 
धर्मादा राशि पर उत्पाद शुल्क लगाने पर मनाही
 
अगर कोई विनिर्माता धर्मार्थ कार्यों के लिए धन एकत्र करता है और खरीदार अपनी इच्छा से उसका भुगतान करता है तो वह रकम उत्पाद की बिक्री से हुई आय का हिस्सा नहीं मानी जाएगी। भले ही उस भुगतान को रसीद में उत्पाद की कीमत के साथ दर्ज किया गया हो लेकिन धर्मादा कहा जाने वाला वह भुगतान उत्पाद शुल्क के दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने अपने दो फैसलों में यह व्याख्या की है। धर्मादा राशि पर उत्पाद शुल्क लगाने को लेकर विभिन्न न्यायाधिकार वाले अधिकारियों के साथ ही उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के बीच भी मतभेद रहे हैं। इस वजह से मामले को बड़े पीठ के सुपुर्द किया गया था। जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड ने पिग आयरन की बिक्री के दौरान धर्मादा राशि इक_ïा की थी। एक अन्य मामले में मैसर्स डी जे मालपानी ने तंबाकू उत्पादों की बिक्री के साथ धर्मादा राशि जुटाई थी। ये दोनों कंपनियां करीब एक दशक से अलग-अलग स्तरों पर शुल्क से राहत के लिए संघर्ष कर रही थीं। जेएसडब्ल्यू के मामले में राजस्व अधिकारियों का दावा खारिज किया गया जबकि दूसरे मामले में विनिर्माता की दलील खारिज कर दी गई। उच्चतम न्यायालय ने कई पुराने फैसलों का अवलोकन करने के बाद धर्मादा राशि पर शुल्क लगाने के मामले में एक निर्णायक जवाब दिया है। उसने यह साफ किया है कि धर्मादा राशि खरीद के समय एकत्र की गई थी लिहाजा इसे लेनदेन का हिस्सा नहीं माना जा सकता है।
 
कानून के ठोस आधार पर निरस्त होनी चाहिए अपील
 
उच्चतम न्यायालय ने आयकर विभाग की अपील खारिज करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को दोषपूर्ण बताते हुए कहा है कि ऐसा करते समय कानून का कोई ठोस सवाल नहीं खड़ा किया गया था। आयकर अधिनियम की धारा 260-ए के तहत उच्च न्यायालय कर अधिकरणों के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर सकता है। नोकिया इंडिया लिमिटेड का निर्धारण वर्ष 1999-2000 के लिए की गई कर देनदारी को लेकर आयकर विभाग से विवाद हो गया। मोबाइल कंपनी ने आयकर अधिकारी की तरफ से भेजे गए नोटिस को चुनौती देते हुए कहा था कि केवल धारणा में बदलाव के चलते यह नोटिस भेजा गया है। अपीलीय पंचाट ने इस दलील से सहमति जताई थी और उच्च न्यायालय ने भी इस पर की गई अपील को अपने संक्षिप्त आदेश में निरस्त कर दिया। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि इस मामले में चार वस्तुनिष्ठ सवाल जुड़े हुए थे। उसने इन सवालों का मसौदा तैयार कर उच्च न्यायालय के पुनर्विचार के लिए भेज दिया है।
 
मुआवजे में अविवाहित की ही उम्र होगी आधार
 
किसी सड़क हादसे में एक अविवाहित की मौत होने पर मुआवजे की गणना उसकी उम्र के आधार पर ही की जानी चाहिए न कि उसके आश्रितों की उम्र के आधार पर। उच्चतम न्यायालय ने रॉयल सुंदरम अलायंस इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम मंडल यादगिरि गौड़ मामले में यह फैसला सुनाया है। उसने कहा है कि मोटर वाहन मुआवजा अधिकरण को मुआवजे की गणना हादसे में जान गंवाने वाले शख्स की उम्र के आधार पर ही करनी चाहिए। बीमा कंपनी ने कहा था कि मुआवजे की गणना करते समय आश्रितों की उम्र को मानक बनाया जाए। कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर उच्चतम न्यायालय ने कहा है, 'ऐसे दावों का निर्धारण करते समय मृतक को केंद्र में रखते हुए यह देखा जाना चाहिए कि अगर वह जीवित रहता तो अपने परिवार के लिए कितना योगदान करता? वह व्यक्ति विवाहित था तो उसकी उम्र को ध्यान में रखा जाना चाहिए। सवाल यह है कि अगर मृतक अविवाहित था तो क्या मुआवजे की गणना के लिए आश्रितों की उम्र को तवज्जो देनी चाहिए? हमारा मानना है कि ऐसा नहीं होना चाहिए।'
 
पाइरेसी करने वाली वेबसाइट पर लगी पाबंदी
 
दिल्ली उच्च न्यायालय ने गैर-अधिकृत वेबसाइट पर होने वाली इंटरनेट पाइरेसी के बारे में एक नीति बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया है। ये वेबसाइट एक बार ब्लॉक किए जाने के बाद भी मिलते-जुलते नाम से दोबारा अवतरित हो जाती हैं। यूटीवी सॉफ्टवेयर कम्युनिकेशंस लिमिटेड की तरफ से दायर आठ वादों पर लंबी चर्चा के दौरान न्यायालय ने इन वेबसाइट पर रोक लगाने को कहा है। यूटीवी का आरोप था कि उसकी अनुमति के बगैर ही उसके मौलिक प्रोग्राम कई वेबसाइटों पर नजर आ रहे हैं। इन आरोपों से सहमति जताते हुए न्यायालय ने इन सभी वेबसाइट को यूटीवी से संबंधित कार्यक्रमों के वितरण से रोक दिया है। इसके अलावा इन वेबसाइट को ब्लॉक करने के लिए आईएसपी को आदेश भी जारी किया गया है। दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को निर्देश दिया गया है कि वह इन वेबसाइट पर पाबंदी लगाने के लिए आईएसपी को अधिसूचित करे। न्यायालय ने दूरसंचार विभाग और मंत्रालय से ऐसी वेबसाइट पर लगाम लगाने के लिए एक नीति बनाने की संभावनाएं तलाशने को भी कहा है।
 
सेवा में खामी पर एयर इंडिया को देना होगा जुर्माना
 
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने एयर इंडिया की उड़ान से अमेरिका जाने वाले एक बुजुर्ग दंपती की शिकायत के आधार पर एयरलाइन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है। इस दंपती को विमान के मध्य हिस्से में सीटें आवंटित की गई थीं लेकिन विमान स्टाफ ने उन्हें पिछले हिस्से में बैठने के लिए मजबूर किया जिससे उन्हें लंबी यात्रा में काफी परेशानी हुई। हालत यह हो गई कि विमान से उतरने के समय तक महिला बीमार पड़ गईं। एयर इंडिया ने सीटों की तब्दीली के लिए तकनीकी कारणों को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि सीटें आवंटित करने का यह मतलब नहीं है कि वे सीटें ही कंफर्म कर दी गई हैं। आयोग ने दोनों ही दावों को नकार दिया। इसके अलावा दिल्ली एयरपोर्ट पर बुजुर्ग महिला के लिए व्हील चेयर नहीं मुहैया कराने की शिकायत में भी एयर इंडिया के उस दावे को नकार दिया गया है कि एयरपोर्ट में पर्याप्त व्हीलचेयर ही मौजूद नहीं थी। सेवा में इस खामी के लिए एयर इंडिया ने दंपती से केवल खेद जताया था लेकिन उपभोक्ता आयोग ने उसे नाकाफी बताते हुए जुर्माना लगाया है।
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