बिजनेस स्टैंडर्ड - मिड और स्मॉल-कैप में अवसर बरकरार
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मिड और स्मॉल-कैप में अवसर बरकरार

पुनीत वाधवा /  April 14, 2019

पिछले कुछ सप्ताहों की भारी तेजी के बाद बाजार अब मार्च तिमाही के आय सीजन से पहले स्थिर होते दिख रहे हैं। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ऐसेट मैनेजमेंट के कार्यकारी निदेशक और मुख्य निवेश अधिकारी एस नरेन ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि भले ही बाजार का मूल्यांकन महंगा है, लेकिन इसमें गिरावट के आसार नहीं हैं। हालांकि आम चुनाव को देखते हुए अल्पावधि में बाजार में अस्थिरता देखी जा सकती है। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 
बाजार के बारे में आपका क्या नजरिया है?
 
बाजार अब सस्ते नहीं हैं, लेकिन मिड और स्मॉल-कैप में चुनिंदा निवेश के अवसर मौजूद हैं। हालांकि 18 महीने पहले और मौजूदा हालात के बीच अंतर यह है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दरें बढ़ाने के बारे में बात नहीं कर रहा है। यह भारत समेत उभरते बाजारों के लिए सकारात्मक घटनाक्रम है, क्योंकि इसका मतलब है कि वैश्विक बाजारों से भारत के लिए प्रवाह बढ़ सकता है, जो 2018 के परिदृश्य से अलग है। हालांकि बाजार का मूल्यांकन अच्छा है, लेकिन इनमें गिरावट नहीं आ सकती। आम चुनाव को देखते अल्पावधि में अस्थिरता दिख सकती है।
 
आप कौन से प्रमुख जोखिम देख रहे हैं?
 
जोखिमों में तेल कीमत में वृद्घि (मौजूदा समय में 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास), कमजोर मॉनसून और बाजार पर चुनाव परिणाम का असर मुख्य रूप से शामिल हैं। अन्य चिंता निर्धारित आय योजनाओं/कॉरपेोरट डेट में निवेश में निवेशकों की दिलचस्पी का अभाव है। ऐसे समय में जब कॉरपोरेट बॉन्ड प्रतिफल आकर्षक है, हम इस सेगमेंट में और अधिक पूंजी प्रवाह देखेंगे। 
 
अगली कुछ तिमाहियों में आप आरबीआई से कितनी दर कटौती की उम्मीद कर रहे हैं?
 
आरबीआई ने खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्घि के अल्पावधि जोखिम, कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता, और धीमी घरेलू तथा वैश्विक वृद्घि से जुड़े जोखिमों को उजागर किया है। इसे देखते हुए हमारा मानना है कि अगली दर कटौती आंकड़ों पर निर्भर करेगी। आरबीआई 2019 में अलनीनो प्रभावों और चुनी गई अगली सरकारों द्वारा पेश किए जाने वाले बजट को देखकर दरों में कटौती का फैसला लेगी, इसलिए केवल खाद्य महंगाई कम रहने से बार बार दर कटौती होना मुश्किल होगा। 
 
म्युचुअल फंड प्रवाह के बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
 
मेरी नजर में, जब एफआईआई अक्टूबर 2018 में बिकवाली कर रहे थे तो म्युचुअल फंडों में प्रवाह मजबूत था। हम प्रवाह में मौजूदा कमजोरी को एक मजबूत घटनाक्रम के तौर पर देख रहे हैं। भारतीय म्युचुअल फंडों के लिए ऐसे समय में प्रवाह आकर्षक करना जरूरी है जब बड़े एफआईआई बिकवाली कर रहे हैं। इसलिए हमारी नजर में पूंजी प्रवाह में थोड़ी बहुत कमी चिंताजनक नहीं है। हमें विश्वास है कि चालू वर्ष 2019 एसआईपी का वर्ष है। 
 
वर्ष 2019 में अब तक आपकी निवेश रणनीति क्या रही है?
 
हम उन कई क्षेत्रों पर सकारात्मक हैं जिन्होंने शुरू में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। उदाहरण के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (पीएसयू), धातु और कॉरपोरेट फाइनैंशियल। हमारा मानना है कि गैर-निष्पादित ऋण (एनपीएल) चक्र लगभग पूरा हो रहा है, जो कॉरपोरेट वित्त के लिए सकारात्मक है। हमारा मानना है कि कुछ गुणवत्तायुक्त शेयरों और मेगा-कैप को छोड़कर बाजार बहुत महंगा नहीं है। अब तक हमें अपनी किसी इक्विटी योजना पर रिडेंपशन दबाव का सामना नहीं करना पड़ा है। 
 
क्या मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट लार्ज-कैप को मात दे पाएगा?
 
भले ही बाजार मौजूदा स्तरों पर महंगा दिख रहा हो, लेकिन मिड और स्मॉल-कैप पिछले साल की शुरुआत की तुलना में अधिक महंगे नहीं हैं। हमारा मानना है कि इस क्षेत्र में चयन के आधार पर अच्छे अवसर मौजूद हैं। चालू वर्ष 2019 बाजार पूंजीकरण पर ध्यान देने के बजाय शेयर-केंद्रित वर्ष लग रहा है। 
 
आगामी आय सीजन से आपको क्या उम्मीदें हैं?
 
हम आय सीजन, खासकर वित्तीय क्षेत्र पर सकारात्मक हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें हमें कम आधार, अब तक के एनपीएल और ऋण चक्र में तेजी को देखते हुए अच्छे नतीजे दिखने की उम्मीद है। साथ ही खपत आधारित कुछ क्षेत्रों में कमजोरी दिख सकती है, लेकिन वित्त सेगमेंट से मुनाफे के आकार को देखते हुए कुल आय मजबूत रहने की संभावना है। हमारा मानना है कि पूंजीगत खर्च चक्र में सुधार आने और अगले तीन साल के दौरान इसमें वृद्घि होने का अनुमान है। फिर भी पूंजीगत खर्च थीम में निवेश के लायक खास अवसर मौजूद हैं।
 
क्या एफएमसीजी और आईटी जैसे रक्षात्मक क्षेत्रों के लिए आवंटन में इजाफा होगा?
 
फार्मा सेक्टर दीर्घावधि निवेश परिदृश्य से काफी आकर्षक है। हालांकि आईटी क्षेत्र रक्षात्मक बना हुआ है, जिसके लिए आगामी परिदृश्य रुपये की चाल पर निर्भर करेगा। हम अल्पावधि में उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र पर नकारात्मक बने हुए हैं। 
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