बिजनेस स्टैंडर्ड - इन्फोसिस के मुकाबले टीसीएस बेहतर
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इन्फोसिस के मुकाबले टीसीएस बेहतर

श्रीपाद ऑटे /  April 14, 2019

आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और इन्फोसिस ने मार्च तिमाही के दौरान राजस्व वृद्धि के लिहाज से लगभग एकसमान प्रदर्शन किया है। दोनों कंपनियों ने स्थायी विनिमय दरों के आधार पर 2.1 से 2.4 फीसदी वृद्धि दर्ज की है। टीसीएस हर मानक पर इन्फोसिस  से बेहतर रही है। इन्फोसिस की वृद्धि में एक खंड का योगदान अधिक है और यह लागत को कम करने में जूझ रही है, लेकिन टीसीएस वृद्धि बनाए रखने और लागत नियंत्रित रखने में सफल रही है। 

 
विश्लेषकों का कहना है कि सभी कारोबारी खंडों में अच्छी वृद्धि, तुलनात्मक रूप से बेहतर मार्जिन और प्रबंधन के सकारात्मक बयानों से टीसीएस के शेयरों की मांग बनी रहेगी। इन्फोसिस के मुकाबले टीसीएस के शेयरों के और प्रीमियम पर कारोबार करने की संभावना है। एमके रिसर्च के राहुल जैन और देवांग्शु बंसल ने कहा कि वित्तीय मोर्चे पर नरम प्रदर्शन और आगे का परिदृश्य उत्साहजनक न होने का मतलब है कि टीसीएस के मुकाबले इन्फोसिस के शेयरों के मूल्य में कमजोरी रहेगी। यह आगे बढ़कर 25 फीसदी तक पहुंच सकता है, जो इस समय 10 फीसदी है। विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2020 में इन्फोसिस के आमदनी के अनुमानों को 6 से 7 फीसदी घटा दिया है। यह टीसीएस के सपाट प्रदर्शन के मुकाबले काफी अधिक है। 
 
सेंट्रम ब्रोकिंग के विश्लेषक मधु बाबू ने भी इन्फोसिस के लिए वित्त वर्ष 2020 और वित्त वर्ष 2021 के आमदनी अनुमानों को करीब 4 फीसदी घटा दिया है। आमदनी में वृद्धि में कमी की एक मुख्य वजह यह है कि इन्फोसिस की संचार खंड पर अत्यधिक निर्भरता है। चौथी तिमाही में इन्फोसिस की आमदनी वृद्धि में 80 फीसदी हिस्सा इस एक खंड का रहा है।  बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, बीमा और खुदरा जैसे अन्य अहम खंडों में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि यह गिरावट मामूली रही है। हालांकि टीसीएस अपनी वृद्धि के अनुमान नहीं जारी करती है। लेकिन बाजार इस चीज से निराश हुआ है कि इन्फोसिस ने वित्त वर्ष 2020 के लिए अपने राजस्व वृद्धि और मार्जिन के अनुमान को घटाया है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2020 में स्थायी विनिमय दरों के आधार पर 7.5 से 9.5 फीसदी वृद्धि का अनुमान जताया है। यह बाजार के करीब 8 से 10 फीसदी के अनुमानों से कम है। इसका  21 से 23 फीसदी का मार्जिन अनुमान वित्त वर्ष 2019 के मार्जिन अनुमान 22 से 24 फीसदी के मुकाबले 100 आधार अंक कम है। 
 
इसके अलावा इन्फोसिस के प्र्रबंधन ने यूरोप के विनिर्माण क्षेत्र, बीमा के कुछ खंडों और स्वास्थ्य खंड में कुछ चुनौतियों का जिक्र किया है। इसके बावजूद बड़े सौदे हासिल करने में अच्छी बढ़ोतरी (6.3 अरब डॉलर) और स्टेटर एनवी के अधिग्रहण से इन्फोसिस की आमदनी में वृद्धि को सहारा मिलेगा। दूसरी ओर सभी खंडों में वृद्धि दर्ज करने वाली टीसीएस के वित्त वर्ष 2020 में अच्छी वृद्धि बरकरार रखने की संभावना है। हालांकि कंपनी के ग्राहकों के विशेष मुद्दे हैं और वृहद आर्थिक स्तर की चनौतियां मौजूद हैं। 
 
टीसीएस ने संकेत दिया है कि वह 26 से 28 फीसदी परिचालन मार्जिन हासिल करने की क्षमता रखती है। विश्लेषकों ने कहा कि इससे साफ संकेत मिलता है कि इन्फोसिस के समक्ष कंपनी के स्तर पर कुछ चुनौतियां हैं। इसके अलावा अप्रैल-सितंबर, 2019 के दौरान वेतन में भी बढ़ोतरी होगी, जिससे मार्जिन पर दबाव और बढ़ेगा। इन्फोसिस के मुताबिक 85 फीसदी कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी एक अप्रैल, 2019 से लागू हो जाएगी। इस तरह कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इन्फोसिस वित्त वर्ष 2020 में राजस्व वृद्धि की ऊपरी सीमा और मार्जिन अनुमान को हासिल नहीं कर पाएगी। वित्त वर्ष 2020 की पहली छमाही में वेतन बढ़ोतरी, नौकरी छोडऩे वाले कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी (चौथी तिमाही में 20.4 फीसदी, जो एक साल पहले 19.5 फीसदी था) और फंसे ऋणों के प्रावधान सामान्य स्तर पर आने जैसी नकारात्मक बाधाओं से इन्फोसिस का मार्जिन अपने अनुमान के निचले स्तर के आसपास रहेगा। नौकरी छोडऩे वाले कर्मचारियों की दर घटाने के लिए इन्फोसिस को अतिरिक्त निवेश की जरूरत पड़ेगी। कंपनी ने कहा है कि वह नए कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान देगी। 
 
कंपनी पर जिन चीजों से दबाव कम हो सकता है, उनमें स्थानीयकरण और ऊंचे मार्जिन वाले डिजिटल कारोबार पर ध्यान देना है। शंकरन के मुताबिक अप्रैल तिमाही में वेतन में बढ़ोतरी और नौकरी छोडऩे वाले कर्मचारियों की तादाद बढऩे से वित्त वर्ष 2020 में मार्जिन प्रभावित हो सकता है क्योंकि ज्यादा प्रोत्साहन, रिटेंशन बोनस और ऊंचे वेरिएबल पे जैसे ज्यादा कदम उठाने होंगे। इसके विपरीत टीसीएस के चौथी तिमाही में नौकरी छोडऩे वाले कर्मचारियों की तादाद करीब 11 फीसदी रही, जो इस उद्योग में सबसे कम है। हालांकि दोनों ही कंपनियां बाजार के मार्जिन के अनुमानों को पीछे छोडऩे में नाकाम रही हैं, लेकिन टीसीएस का मार्जिन बेहतर था। टीसीएस को मिले ऑर्डरों की तादाद अच्छी है, इसलिए बाजार इन्फोसिस की तुलना में टीसीएस को तरजीह दे रहा है। इन्फोसिस का वित्त वर्ष 2019 का सबसे बड़ा सौदा 6.3 अरब डॉलर उसके वित्त वर्ष 2019 के राजस्व का 53 फीसदी है। मार्च, 2018 में टीसीएस की ऑर्डर बुक 21.9 अरब डॉलर थी, जो उसके वित्त वर्ष 2019 के राजस्व की 105 फीसदी है। विश्लेषकों ने कहा कि इसके बावजूद इन्फोसिस की डील बुक आगे राजस्व मजबूत रहने का संकेत देती है, जिससे उसे अपनी राजस्व वृद्धि टीसीएस के बराबर लाने में मदद मिल सकती है। 12 अप्रैल को इन्फोसिस की एडीआर में 4 फीसदी गिरावट आई थी, जबकि टीसीएस के एडीआर में 1 फीसदी बढ़ोतरी हुई। भारतीय शेयर बाजारों में भी सोमवार को दोनों कंपनियों के लिए समान रुझान देखने को मिल सकता है। 
Keyword: TCS, IT, network, infosys,,
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