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नए आयकर रिटर्न फॉर्म में देनी होगी ढेर सारी जानकारी

तिनेश भसीन /  April 14, 2019

आयकर रिटर्न (आईटीआर) फॉर्म में जानकारी देने या खुलासे करने की जरूरत तो हमेशा ही थी, लेकिन पिछले कुछ साल में लगातार बढ़ती गई है। इसकी वजह यह है कि आयकर विभाग कर चोरी का पता लगाने और रिटर्न निपटाने में तकनीक का जमकर प्रयोग कर रहा है। रिटर्न फॉर्म में बदलाव देखने की आदत तो लगभग हरेक करदाता को हो चुकी है, लेकिन इस बार तो बदलाव का रिकॉर्ड टूट गया है। बदलाव की अति ही हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि निर्धारण वर्ष 2019-20 के लिए अधिसूचित किए गए आयकर रिटर्न फॉर्म में जितने बदलाव हुए हैं, उतने पिछले कुछ साल में नहीं देखे गए हैं।

 
फॉर्म लगभग हर मामले में बदला हुआ है। कमाई के बारे में सूचना और गणना का खुलासा हो या वेतन से होने वाली कमाई के खुलासे का तरीका हो, बकाया या नहीं मिले किराये का संपत्तिवार खुलासा हो या कारोबार मालिकों के लिए तमाम खुलासे हों, इस बार के फॉर्म में कई तब्दीली दिखती हैं। पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर एवं लीडर - व्यक्तिगत कर कुलदीप कुमार कहते हैं, 'आईटीआर फॉर्म में जो अतिरिक्त ब्योरा मांगा गया है, उससे आय और दूसरे विवरण की जांच या सत्यापन अपने आप ही हो जाएगा। अभी तक इसके लिए कर अधिकारियों को दूसरे स्रोतों का सहारा लेना पड़ता था।' वह कहते हैं कि इन बदलावों से कर रिटर्न के निपटारे यानी प्रोसेसिंग में भी तेजी आएगी और आयकर चोरी के मामलों पर लगाम कसने में भी इससे मदद मिलेगी।
 
80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के अलावा हरेक आयकर दाता के लिए अब इलेक्ट्रॉनिक रिटर्न यानी ई-रिटर्न अनिवार्य कर दिया गया है। पिछले साल तक उन करदाताओं को कागजी रिटर्न दाखिल करने की इजाजत थी, जिनकी आय 5 लाख रुपये से कम होती थी। लेकिन इस साल से यह छूट खत्म कर दी गई है। आयकर ई-फाइलिंग वेबसाइट से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले कर निर्धारण वर्ष में करीब 6.4 करोड़ लोगों ने रिटर्न दाखिल किए गए थे, जिनमें से लगभग 49 फीसदी यानी 3.11 करोड़ करदाताओं ने आईटीआर-1 का इस्तेमाल किया था। आईटीआर-1 फार्म देश में रहने वाले उन लोगों के लिए है, जो वेतन, एक आवासीय संपत्ति और ब्याज आदि से कुल 50 लाख रुपये सालाना तक कमाते हैं। इस साल से आईटीआर-1 फॉर्म का इस्तेमाल वह व्यक्ति नहीं कर सकता, जो किसी कंपनी का निदेशक है या जिसने गैर सूचीबद्घ शेयरों में निवेश किया है। इसका मतलब है कि अगर आप किसी स्टार्ट-अप के लिए काम कर रहे हैं और आपको कर्मचारी शेयर विकल्प (इसॉप्स) मिले हैं तो आप रिटर्न दाखिल करने के लिए आईटीआर-1 फॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर सकते। इतना ही नहीं जिनके पास गैर सूचीबद्घ कंपनी के शेयर हैं, उन्हें शेयरों से जुड़ी तमाम जानकारी भी देनी पड़ेंगी।
 
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आईटीआर-1 फॉर्म के प्रारूप में जो बदलाव किए हैं, उनसे करदाताओं के लिए रिटर्न फाइल करना पहले से आसान हो गया है। पहले करदाता को अपने नियोक्ता से मिले फॉर्म 16 से तमाम तरह की जानकारी निकालनी पड़ती थी और जोड़घटाव भी खुद ही करना पड़ता था। अब आईटीआर-1 फॉर्म में आपसे अतिरिक्त ब्योरा ही मांगा जाएगा और आयकर विभाग आपकी कर देनदारी का हिसा खुद ही लगा लेगा। जाहिर है कि इससे रिटर्न दाखिल करना पहले के मुकाबले आसान हो जाएगा। लेकिन यदि कोई कंपनी खुद ही कर्मचारी के वेतन से कर काट रही है और उसे आयकर विभाग के पास जमा कर रही है तो उसके कर्मचारियों को रिटर्न दाखिल करते समय कंपनी का टैन (टैक्स डिडक्शन एंड कलेक्शन अकाउंट नंबर) भी देना पड़ेगा। 
 
यदि आपके नाम पर घर है तो नए आईटीआर-1 में आपको बताना पड़ेगा कि उस घर में आप खुद ही रहते हैं या उसे किराये पर दिया है या किराये पर दिया माना जाना है। करदाताओं को अन्य स्रोतों से होने वाली आय का विवरण भी देना पड़ेगा। इससे पहले करदाता को ऐसी आय का आंकड़ा भर देना पड़ता था।  यदि कोई व्यक्ति अपने आयकर रिटर्न में बताता है कि अचल संपत्ति के हस्तांतरण से उसे पूंजीगत लाभ हुआ है तो उसे खरीदार के बारे में कुछ जानकारी अब देनी ही पड़ेगी। उसे खरीदार का नाम, पैन, प्रतिशत हिस्सेदारी, सौदे की रकम आदि बतानी पड़ेगी। टैक्समैन डॉट कॉम में चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन वाधवा कहते हैं, 'इससे बेनामी संपत्तियों के मामलों पर लगाम लग जाएगी।' 
 
नए आईटीआर फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने वाले को पहले की तरह बताना होगा कि वह निवासी भारतीय है, निवासी लेकिन सामान्य तौर पर निवासी नहीं (आरएनओआर) है या अनिवासी (एनआर) है। साथ ही उसे निवासी होने की स्थिति के बारे में अतिरिक्त जानकारी भी देनी है। मिसाल के तौर पर अगर वह अनिवासी है तो उसे बताना होगा कि भारत में वह कितने दिन रहा और उसका निवास किस न्यायक्षेत्र में आता है तथा उसकी कर पहचान संख्या (टिन) क्या है। पहले इस तरह की कोई जानकारी नहीं मांगी जाती थी और विभाग के पास भी इन दावों की जांच या सत्यापन करने का कोई तरीका नहीं था।
Keyword: ITR, income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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