बिजनेस स्टैंडर्ड - रोबोटिक हाथ खोलेंगे सीवर का जाम
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रोबोटिक हाथ खोलेंगे सीवर का जाम

पीरजादा अबरार /  April 14, 2019

जय सिंह तमिलनाडु की कुंभकोणम नगरपालिका में ठेका कर्मचारी हैं। कुछ समय पहले तक सिंह और उनके साथी सीवर के मेनहोल की सफाई हाथ से करते थे। इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें खतरनाक परिस्थितियों में रहना होता था क्योंकि सीवर में जहरीली गैस, बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी आदि रहते हैं जिससे सफाईकर्मियों को जानलेवा इन्फेक्शन हो जाते हैं।  वेंटिलेटर, दस्ताने, चेहरे का मास्क और गैस की सांद्रता मापने वाली मशीन जैसे सुरक्षा उपकरणों की कमी के चलते अक्सर उनकी जान जोखिम में रहती है। हालांकि अब हम कोलकाता के स्टार्टअप जेनरोबोटिक इनोवेशन्स द्वारा विकसित रोबोट को शुक्रिया बोल सकते हैं जिसने सिंह और उनके सहकर्मियों की जिंदगी बदल दी है। 

 
दूर से ही नियंत्रित होने वाला रोबोट 'बेंडिकोट' मेनहोल में नीचे जा सकता है और मकड़ी की तरह अपने हाथ फैलाकर सीवर को जाम करने वाले ठोस अपशिष्ट को हटा देता है। इसमें एक रोबोटिक हाथ लगा है जो 360 डिग्री घूम सकता है और शहरी सीवर में बाधा बनने वाले वाले अपशिष्ट को हटाकर सीवर का फ्लोर साफ कर देता है। रोबोट किसी सीवर को 20 मिनट में साफ कर देता है जबकि आदमी काम करे तो 3 कर्मियों के साथ 2 घंटे का समय लग जाता है। जेनरोबोटिक इनोवेशन्स के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी विमल गोविंद कहते हैं, 'हम इन रोबोट का उपयोग करके सफाईकर्मियों के कौशल में वृद्धि और सुधार कर रहे हैं।' गोविंद कहते हैं कि इसके सामाजिक प्रभाव के साथ-साथ कंपनी के सामने काफी संभावनाएं भी हैं क्योंकि भारत में 6 करोड़ से अधिक मेनहोल हैं जिसे साफ करने का जिम्मा 45 लाख सफाईकर्मी संभालते हैं। देश में ढांचागत विकास के साथ ही इस बाजार में भी तेजी आएगी। 
 
गोविंद ने साल 2015 में अरुण जॉर्ज, निखिल एनपी और राशिद बिन अब्दुल्ला के साथ मिलकर कंपनी की स्थापना की थी। कंप्यूटर साइंस से लेकर मैकेनिकल इंजीनियरिंग जैसे अलग अलग विषयों की पढ़ाई करने वाले इन सभी सह-संस्थापकों ने कॉलेज प्रोजेक्ट के दौरान रोबोटिक सूट द्वारा मानवीय क्षमता बढ़ाने की परियोजना के तौर पर जेनरोबोटिक्स की शुरुआत की थी।  स्नातक के बाद सभी नौकरियों के लिए अलग अलग कंपनियों में चले गए। गोविंद कहते हैं, 'शुरुआत में यह काफी रोमांचक था। लेकिन बाद में हम सभी बोर होने लगे और अपने कॉलेज प्रोजेक्ट पर फिर से काम करने का निर्णय लिया।' इसी दौरान केरल में मेनहोल से जुड़ी कई दुर्घटनाएं हुईं और राज्य सरकार ने स्वदेशी तकनीकी उपाय के जरिए इनको रोकने की चुनौती की। जेनरेबोटिक टीम ने इसके लिए उपाय विकसित करने का निर्णय लिया और अपना स्टार्टअप लॉन्च किया। 
 
जेनरोबोटिक के अनुसार उनकी मशीनें शक्तिशाली कैमरे और स्मार्ट फीचर का उपयोग करती हैं जो इस पूरी प्रक्रिया को आसानी से कर सकते हैं। आसान स्क्रीन और कार्यप्रणाली अनपढ़ कर्मियों के लिए भी सहायक होती है। रोबोट के सेंसर अमोनिया, कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी हानिकारक गैसों की मौजूदगी के बारे में अलर्ट भेज देते हैं। सेंसर की मदद से सफाईकर्मी को अंदर जाने से रोका जा सकता है। बेंडिकोट रोबोट सीवर सफाई की रियल टाइम में स्पष्ट तस्वीर दिखाता रहता है। इसे बनाने में स्टेनलेस स्टील और कार्बन फाइबर जैसे पदार्थ का उपयोग किया गया है जिससे वह मेनहोल के खराब वातावरण में भी बेहतर तरीके से काम कर सकता है। अब कंपनी ऑटोनोमस रोबोट बनाने पर काम कर रही है जो कृत्रिम मेधा (एआई) का उपयोग करके मेनहोल और सीवर की सफाई कर सकेंगे।
 
जेनरोबोटिक के नवोन्मेष को तकनीकी दिग्गज कंपनी गूगल ने अपने 'लॉन्चपैड एक्सीलरेटर' कार्यक्रम के लिए चुना है। गूगल में कार्यक्रम प्रबंधक (लॉन्चपैड एक्सीलरेटर, भारत) पॉल रवींंद्रनाथ कहते हैं, 'जेनरोबोटिक जैसे स्टार्टअप भारत की समस्याओं के समाधान पर काम कर रहे संस्थापकों के लिए वास्तविक प्रेरणास्त्रोत हो सकते हैं। उनका रोबोट अपने मकड़ी जैसे हाथों से मेनहोल की सफाई करता है जिससे भारत में हाथ से मैला निकालने की समस्या को समाप्त किया जा सकता है।' सलाह देने के साथ साथ लॉन्चपैड कार्यक्रम की मदद से स्टार्टअप को विभिन्न निवेशकों से संपर्क करने का भी अवसर मिला। 
 
कंपनी को केरल, तमिलनाडु और हरियाणा सरकार के साथ ही संयुक्त अरब अमीरात में दुबई नगरपालिका से भी विभिन्न परियोजनाएं मिली हैं। कंपनी देशभर में अपने रोबोट का उपयोग करने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी की कहना है कि वह हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कैंप भी लगा रही है जिससे उन्हे इन रोबोट के उपयोग को लेकर जानकारी दी जा सके। कंपनी मुफ्त चिकित्सा कैंप और जागरूकता कार्यक्रमों का भी आयोजन करा रही है। अभी तक जेनरोबोटिक ने विभिन्न राज्यों के 120 से अधिक सफाईकर्मियों को प्रशिक्षित किया है। 
 
आयरन मैन का सूट
 
जेनरोबोटिक मानव द्वारा पहने योग्य रोबोटिक सूट बनाने पर भी काम कर रही है। इसमें 10 फीट ऊंचा जेनरेशन-वन (जी-1) शामिल है और यहां ऑपरेटर सूट के भीतर बैठ सकता है। रोबोटिक पैर और हाथों की मदद से यह आदमी की तरह चल सकता है और भारी सामान उठा सकता है। इसका उपयोग रक्षा और स्पेस जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।  कंपनी का जी-2 उत्पाद जी-1 वर्जन का उन्नत संस्करण है और यह ऊर्जा तथा काम के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। जी-2 के हाथ 60 किलो तक वजन उठा सकती हैं और इसके पैर 160 किलो तक का वजन सह सकते हैं। यह 100 किलो वजन के साथ एक जगह से दूसरी जगह तक चल सकता है।  कंपनी एआई तकनीक आधारित जी-3 पर भी काम कर रही है जो वायरलैस मशीन होगी और इसमें दृश्य सेंसर, चेहरा पहचानने की प्रणाली, आवाज प्रणाली और कंप्यूटर क्षमता विद्यमान होगी। यह लगभग सभी मानवीय कार्य करने में सक्षम होगी। 
Keyword: startup, company, robot, sewer,,
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