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असुरक्षित ऋणों से बैंक-एनबीएफसी की बढ़ेंगी मुश्किलें!

सुब्रत पांडा / मुंबई April 11, 2019

क्रेडिट कार्ड ऋण, व्यक्तिगत ऋण और कंज्यूमर ड्यूरेबल जैसी असुरक्षित उधारी में कैलेंडर वर्ष 2018 की चौथी तिमाही में 31.3 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की गई। इसे ध्यान में रखते हुए उद्योग के विश्लेषकों का कहना है कि बैंकों और एनबीएफसी को ऋण के संबंध में चूक में तेजी का सामना करना पड़ सकता है। बैंक असुरक्षित सेगमेंट में चूक की दर में कुछ तेजी पहले ही दर्ज कर चुके हैं। 

इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च में बैंकिंग ऐंड फाइनैंशियल इंस्टीट्यूशंस के सहायक निदेशक जिंदल हरिया ने कहा, 'खासकर पारंपरिक सेवा व्यवसायों में कुल आय स्तर और रोजगार में पिछले दो-तीन वर्षों में सालाना एक अंक में वृद्घि हुई, लेकिन खुदरा असुरक्षित ऋणों में 25 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। अगले कुछ वर्षों के दौरान यदि असुरक्षित ऋणों में तेजी का सिलसिला नहीं थमा तो चूक के मामलों में कई गुना इजाफा दर्ज किया जा सकता है।'

उपभोक्ता उधारी रुझानों, कई प्रुमख खुदरा उधारी योजनाओं के लिए चूक की दर जैसे विषयों पर ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि उपभोक्ताओं को अपने ऋण दायित्त्वों के प्रबंधन पर लगातार ध्यान देने की जरूरत होगी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जहां असुरक्षित उधारी में बड़ी तेजी दर्ज की गई, वहीं सुरक्षित ऋण सेगमेंट - संपत्ति पर ऋण (एलएपी), वाहन ऋण और आवास ऋण- में कैलेंडर वर्ष 2018 की चौथी तिमाही में 2017 की समान तिमाही के मुकाबले 21.8 प्रतिशत, 17.4 प्रतिशत और 17.1 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की गई। 

विश्लेषकों का मानना है कि असुरक्षित ऋण श्रेणियों में तेज वृद्घि के लिए छोटे आधार को जिम्मेदार माना जा सकता है। इसलिए, प्रतिशत के संदर्भ में अन्य ऋण सेगमेंट की तुलना में इसमें तेज वृद्घि दिखी है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा के कार्तिक श्रीनिवासन के अनुसार, 'अनुपात के तौर पर, असुरक्षित उधारी का कुल बैलेंस शीट में कम योगदान रहा है। लेकिन यह कहा जा सकता है कि बैंक अपना मुनाफा मार्जिन तेजी से बढ़ाने के प्रयास में असुरक्षित ऋण देने में लगे हुए हैं, क्योंकि ऐसे ऋणों पर ब्याज दरें अन्य उधारी की तुलना में काफी अधिक होती हैं।'

ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी प्रमुख उपभोक्ता उधारी योजनाओं में चौथी तिमाही में कुल खाता संख्या में दो अंक की प्रतिशत वृद्घि दर्ज की गई। इसके अलावा, क्रेडिट कार्ड के लिए, कुल बैलेंस और खाता संख्या दोनों में, सर्वाधिक वृद्घि दर दर्ज की गई।
Keyword: Credit Card, Loan, Personal Loan, Consumer durables, calendar year, Bank, India Ratings, Segment,
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