बिजनेस स्टैंडर्ड - फोर्ड-एमऐंडएम 'गठबंधन' सुर्खियों में
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फोर्ड-एमऐंडएम 'गठबंधन' सुर्खियों में

पवन लाल / मुंबई April 11, 2019

फोर्ड इंडिया ऐसी दूसरी अमेरिकी वाहन कंपनी है जो अपनी भारतीय योजना को लेकर सुर्खियों में है। इससे पहले जनरल मोटर्स (जीएम) ने अपने शेव्रले ब्रांड को लगे झटके के बाद 2017 में भारत से अपना कारोबार समेट लिया था। जीएम भारतीय बाजार में बेहद मामूली बाजार हिस्सेदारी और सबसे अधिक बिकने वाले मॉडल को उतारने में असमर्थता के साथ लगभग एक दशक से संघर्ष कर रही थी।

फोर्ड इंडिया के अधिकारियों ने महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के साथ संभावित संयुक्त उद्यम समझौते संबंधी खबरों पर टिप्पणी करने से इनकार किया। लेकिन उन्होंने कंपनी की स्थिरता के सबूत के तौर पर बिक्री एवं राजस्व आंकड़ों में वृद्धि को उजागर किया। पिछले साल कंपनी का घरेलू बाजार से प्राप्त राजस्व 526 करोड़ रुपये के मुनाफे के साथ पहली बार 1 अरब डॉलर को पार कर गया।

जबकि मारुति सुजूकी एवं हुंडई जैसी बाजार की अग्रणी कंपनी के मुकाबले फोर्ड इंडिया की बिक्री एवं वित्तीय आंकड़े अभी भी मामूली दिखते हैं। फोर्ड इंडिया की दुर्गति जीएम की तरह नहीं हुई लेकिन उसकी बाजार हिस्सेदारी 3 फीसदी के दायरे में है जो काफी कम है। फोर्ड और हुंडई ने लगभग साथ-साथ भारतीय बाजार में प्रवेश किया था लेकिन हुंडई की बाजार हिस्सेदारी करीब 17 फीसदी तक पहुंच चुकी है।

कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, 'हम बाजार के कयासों पर टिप्पणी नहीं कर सकते। फोर्ड भारतीय बाजार के लिए प्रतिबद्ध है और हम भारतीय ग्राहकों की पसंद एवं मांग के अनुरूप नए मॉडलों को उतारना जारी रखेंगे।' उन्होंने कहा, 'भारत से कारोबार समेटने का हमारा कोई इरादा नहीं है। यह एक ऐसा बाजार है जहां हमने दो दशक से निवेश किया है।' लेकिन क्या एक भारतीय कंपनी के साथ संभावित करार को फोर्ड इंडिया के लिए अपने दम पर कारोबार करने से दूर होना माना जाए अथवा यह इलेक्ट्रिक प्रौद्योगिकी और उबर जैसे मोबिलिटी प्लेटफॉर्मो के कारण बाजार में मची उथल-पुथल से निपटने का संकेत है?

इक्विटी विश्लेषक जिमित मजीठिया ने कहा, 'ऐतिहासिक तौर पर देखा जाए तो गठबंधन काम नहीं करता है। टाटा मोटर्स ने फिएट के साथ करार करने की कोशिश की थी जो कभी हो न सका।' महिंद्रा ने रेनो के साथ करने की कोशिश की लेकिन वह विफल रही और फोर्ड के साथ पिछला गठबंधन महज तीन वर्षों तक चला। अन्य वाहन कंपनियों की स्थिति भी इससे अलग नहीं दिखती है।

सुजूकी ने फोक्सवैगन के साथ गठबंधन करने की योजना बनाई थी जो शुरू होने से पहले ही विफल हो गई। अधिकतर मामलों में देखा गया है कि विभिन्न देशों की बड़ी कंपनियों की कार्यसंस्कृति में अंतर होने के कारण गठबंधन शायद ही सफल हो पाता है। मजीठिया ने कहा, 'हो सकता है कि फोर्ड भविष्य के करार के जरिये उत्पाद पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय बिक्री एवं विपणन के लिए अपने बहीखाते से रकम अलग करना चाहती हो।'

भारत में फोर्ड का निवेश कोई अतिशयोक्ति नहीं है क्योंकि कंपनी घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों के लिए छोटी कार और इंजन का उत्पादन करती है। उसने भारत में फैक्टरी स्थापित करने और अपनी कार उतारने के लिए करीब 2 अरब डॉलर का निवेश किया था। फोर्ड देश में बनी फिगो, एस्पायर और इकोस्पोर्ट को दुनिया भर के 50 से अधिक बाजारों को निर्यात करती है। भारत में उसकी स्थापित विनिर्माण क्षमता 6,10,000 इंजन और 4,40,000 वाहनों की है। देश के 267 शहरों में उसके 465 बिक्री एवं सर्विस आउटलेट मौजूद हैं।

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