बिजनेस स्टैंडर्ड - किराये के दफ्तरों पर सीएजी ने जताई आपत्ति
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किराये के दफ्तरों पर सीएजी ने जताई आपत्ति

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली 04 08, 2019

खर्च पर जताई चिंता

2,786 वर्ग मीटर जमीन मुंबई के नरीमन पॉइंट पर 1992 में आवंटित की गर्ई थी, जो बेकार पड़ी है
आयकर विभाग को 2008 में ही निर्माण की मंजूरी मिल गर्ई थी लेकिन स्थानीय निकाय ने एफएसआई बढ़ाने के प्रस्ताव पर जतार्ई थी आपत्ति
2017 में कर विभाग ने जमीन के विकास के लिए 120 करोड़ रुपये की निविदा निकाली थी लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी
आयकर विभाग जमीन के विकास के लिए प्रारंभिक अनुमान के लिए नया प्रस्ताव तैयार कर रहा है
कम से कम 5 संपत्तियों को पट्टे पर लिया गया है, जिनमें एयर इंडिया, मित्तल कोर्ट, पीरामल चैंबर्स शामिल हैं

बिजनेस स्टैंडर्ड किराये के दफ्तरों पर सीएजी ने जताई आपत्तिकर संग्रह का लक्ष्य हासिल करने में माथापच्ची कर रहा आयकर विभाग जायदाद के इस्तेमाल में भी पीछे रह गया है। देश में रियल एस्टेट के सबसे महंगे बाजार मुंबई में किराये पर ली जायदाद पर विभाग द्वारा रकम लुटाने पर भारतीय अंकेक्षण एवं लेख सेवा ने आपत्ति जताई है। सूत्रों ने कहा कि नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के तहत आने वाले इस विभाग ने अपनी मसौदा रिपोर्ट में कहा है कि नरीमन पाइंट पर 90 के दशक से एक बड़े भूखंड पर नियंत्रण होने के बाद भी कर विभाग ने किराये पर 1,000 करोड़ रुपये खर्च कर डाले हैं। अंकेक्षण कार्यालय ने अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए विभाग से पिछले दो दशकों में किराये पर खर्च रकम का ब्योरा मांगा है।

कर विभाग को 1992 में मुंबई के नरीमन पाइंट पर 2,786 वर्ग मीटर जगह मुहैया कराई गई थी। इस भूखंड पर इमारत निर्माण करने के बजाय विभाग ने हाल में ही बगल में एयर इंडिया की इमारत में किराये पर जगह ली थी। लोअर परेल में पीरामल चैंबर्स, नरीमन पाइंट पर मित्तल कोर्ट सहित कम से कम पांच जगहों पर कर विभाग ने किराये पर जायदाद ली है। इनमें प्रत्येक जायदाद पर किराये के मद में करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। सीएजी को इस मामले में भेजे गए सवाल का कोई जवाब नहीं आया। 

अंकेक्षण कार्यालय की आपत्ति के बाद समझा जा रहा है कि मुंबई कर विभाग आधुनिक सुविधाओं के साथ अधिकारियों एवं करदाताओं के लिए एक कार्यालय बनाने के लिए आरंभिक अनुमान तैयार कर रहा है। इस संबंध में एक प्रस्ताव जल्द ही केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को भेजा जाएगा। सूत्रों के अनुसार कर विभाग ने तीन साल पहले निर्माण और ढांचा तैयार करने के लिए बोलियां आमंत्रित की थीं। उस समय 120 करोड़ रुये खर्च आने का अनुमान लगाया गया था, जिसमें सेवा शुल्क एवं उपकर शामिल नहीं थे। विभाग ने बोलीदाताओं को 24 महीने में परियोजना पूरी करने के लिए कहा था।

हालांकि इस योजना पर कभी अमल नहीं हो पाया। इस बारे में जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि अब लागत करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक आ सकती है। एक कर अधिकारी ने कहा, 'उपलब्ध भूखंड पर संरचना तैयार होने से जगह की किल्लत खत्म हो जाएगी और किराये पर जगह लेने की जरूरत नहीं होगी। पिछले दो दशक से भूखंड का इस्तेमाल नहीं करना रकम की बर्बादी ही कही जा सकती है। लालफीताशाही और लापरवाही का ही यह नतीजा है, कुछ और नहीं।' कर विभाग के पास मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में भी एक विशाल भूखंड है, जो इसे 2005 में आवंटित किया गया था। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने इमारत बनाने का जिम्मा लिया था और दो साल पहले इसे पूरा कर लिया था।

Keyword: income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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