बिजनेस स्टैंडर्ड - ई-कॉमर्स के मसौदा कानून पर नाखुशी
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ई-कॉमर्स के मसौदा कानून पर नाखुशी

निर्माल्य बेहड़ा/एजेंसियां / भुवनेश्वर/नई दिल्ली 04 08, 2019

सरकार ने जारी किया है ई कॉमर्स कानून का मसौदा

यूएसटीआर ने कहा है कि भारत के प्रस्तावित ई कॉमर्स कानून से भारत के डिजिटल कारोबार में बाधा पहुंचेगी
यूएसटीआर के मुताबिक इसमें बाधा पहुंचाए जाने से छोटे स्थानीय कारोबारियों को नुकसान
आईएएमएआई ने भी कहा है कि मसौदा कानून से डिजिटल अर्थव्यवस्था की नीति को झटका
सरकार ने 29 मार्च तक मसौदे पर मांगी सभी पक्षों से राय

बिजनेस स्टैंडर्ड ई-कॉमर्स के मसौदा कानून पर नाखुशीसीमा पार डेटा की आवाजाही पर रोक और डेटा के स्थानीयकरण के प्रावधानों को लेकर यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रजेंटेटिव (यूएसटीआर) ने भारत की आलोचना की है। राष्ट्रीय कारोबार अनुमान (एनटीई) 2019 में  यूएसटीआर ने कहा है कि भारत के  इस कदम से डिजिटल ट्रेड में बाधा पहुंचेगी। यूएसटीआर की ही तर्ज पर आज उद्योग संगठन इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन आफ इंडिया (आईएएमएआई) ने आज कहा कि मसौदा ई-कॉमर्स नीति सरकार द्वारा 2022 तक एक लाख करोड़ डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने की कवायदों की राह में बाधा हो सकती है और इससे इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बहुत कम हो सकता है।

यूएसटीआर ने कहा है, '2018 में भारत ने कई ऐसे कदम उठाए, जिससे सीमा पार डेटा के प्रवाह पर रुकावट लगती है और डेटा के स्थानीयकरण की जरूरत है। अक्टूबर में भुगतान सेवाएं प्रदान करने वालों को भारतीय नागरिकों द्वारा भारत के भीतर इलेक्ट्रॉनिक भुगतान से संबंधित सभी सेवाओं के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया था।'  एजेंसी ने व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के मसौदे और ई-कॉमर्स नीति के मसौदे को लेकर भी चिंता जताई है।  यूएसटीआर ने कहा, 'भारत के व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून और ई कॉमर्स नीति के मसौदों में सीमा संबंधी तमाम व्यवधान हैं और  डिजिटल अर्थव्यवस्था की उपेक्षा की गई है, जो भारत की वृद्धि का बड़ा स्रोत है।'

अमेरिकी एजेंसी उन उद्योगों व कारोबारी निकायों में शामिल हो गई है, जिन्होंने ई-कॉमर्स नीति में व्यवधानों को लेकर आवाज उठाई है। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने मसौदा ई कॉमर्स नीति का प्रस्ताव किया है, जिसकी पहले ही उद्योग के साथ सिविल सोसाइटी ने आलोचना की है। मसौदा नीति में सीमा पार डेटा प्रवाह को नियमन के दायरे में लाने, अन्य कारोबारियों व थर्ड पार्टी को भारतीय उपभोक्ताओं के डेटा साझा करने पर रोक, और सभी ई कॉमर्स कंपनियों को भारत में डेटा रखना अनिवार्य करने का फैसला किया है। उद्योग संगठनों ने इन प्रस्तावों का तीखा विरोध किया है कि सरकार के साथ ई कॉमर्स कंपनियों का सोर्स कोड और उसके आंकड़े साझा किए जाएं। 

यूएसटीआर ने कहा, 'डिजिटल ट्रेड में बाधाओंसे सभी फर्मों की सक्षमता पर असर पड़ेगा, जिसमें छोटे कारोबारी भी शामिल हैं। इससे उन्हें डिजिटल अर्थव्यवस्था के लाभों से वंचित रहना पड़ेगा। जब सरकारें अनावश्यक रूप से सीमा पार आंकड़ों के प्रवाह पर रोक लगाती हैं या विदेशी डिजिटल सेवाओं के प्रति भेदभाव करती हैं, सबसे ज्यादा स्थानीय फर्में प्रभावित होती हैं। वे सीमा पार डिजिटल सेवाओं के बीच प्रतिस्पर्धा के लाभ से वंचित रह जाती हैं।'  उद्योग संगठन इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन आफ इंडिया ने कहा है कि अगर हाल की राष्ट्रीय स्तर की नीतियों जैसे नैशनल डिजिटल कम्युनिकेशंस पॉलिसी 2018 को तैयार करने की प्रक्रिया को देखें तो  'नीति तैयार करने का तरीका भी कम समावेशी था'। 

आईएएमएआई ने एक बयान में कहा है, 'यह माना जा रहा है कि मसौदा राष्ट्रीय ई कॉमर्स नीति सरकार की 2022 तक लाख करोड़ डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने की राह में व्यवधान बन सकती है।'  सरकार ने मसौदा ई कॉमर्स नीति के सभी हिस्सेदारों से डेटा, बुनियादी ढांचा विकास, ऑनलाइन मार्केटप्लेस, नियामकीय चुनौतियों, घरेलू डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और ई कॉमर्स के माध्यम से निर्यात को प्रोत्साहित करने को लेकर राय मांगी है। राय देने की अंतिम तिथि 29 मार्च रखी गई है।
Keyword: e commerce, data, policy,,
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