बिजनेस स्टैंडर्ड - रिलायंस बसाएगी मेगा सिटी
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रिलायंस बसाएगी मेगा सिटी

नवी मुंबई में सिंगापुर की तर्ज पर बनेगी मेगा सिटी, एसपीए से मिली मंजूरी
देव चटर्जी / मुंबई 04 08, 2019

मेगा सिटी

नया शहर विकसित करने के लिए आरआईएल का एनएमएसईजेड के साथ समझौता
सिंगापुर की तर्ज पर विकसित होगी मेगा सिटी
महाराष्ट्र में पहली एकीकृत औद्योगिक परियोजना
75 अरब डॉलर का होगा निवेश
परियोजना के लिए बंदरगाह, हवाई अड्डा और सी लिंक कनेक्टिविटी

बिजनेस स्टैंडर्ड रिलायंस बसाएगी मेगा सिटीरिलायंस समूह के अध्यक्ष मुकेश अंबानी मुंबई के करीब एक मेगा सिटी स्थापित करने की योजना पर काम कर रहे हैं जिसमें अगले दशक में 75 अरब डॉलर का निवेश हो सकता है। इस परियोजना को विशेष योजना प्राधिकरण (एसपीए) से मंजूरी मिल चुकी है। एक सूत्र ने बताया कि रिलायंस इंडस्ट्रीज न केवल इस मेगा सिटी का विकास करेगी बल्कि इस शहर का प्रशासन भी संभालेगी। इस परियोजना के लिए बनाई गई विशेष कंपनी नवी मुंबई स्पेशल इकनॉमिक जोन (एनएमएसईजेड) 4,300 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर चुकी है।

यह जमीन जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट और निर्माणाधीन हवाई अड्डïे के करीब है। 7 मार्च को आरआईएल ने एक सहयोगी कंपनी के जरिये एनएमएसईजेड के साथ एक समझौता किया। इसके तहत 2,180 करोड़ रुपये के शुरुआती भुगतान से कंपनी को जमीन का पट्टा और इसे विकसित करने के अधिकार मिल गए। इस परियोजना से करीब से जुड़े एक सूत्र ने कहा, 'यह परियोजना शहरी बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखेगी। पहली बार कोई निजी कंपनी इस तरह की परियोजना विकसित कर रही है।'

आरआईएल के  प्रवक्ता ने शुक्रवार को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब  नहीं दिया। कंपनी ने 7 मार्च को एक बयान में बताया कि उसने एक वैश्विक आर्थिक केंद्र विकसित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से एक विश्वस्तरीय एकीकृत डिजिटल एवं सेवा औद्योगिक क्षेत्र बनाया जाएगा। कंपनी ने कहा, 'यह परियोजना दिवंगत धीरूभाई अंबानी के सपने को पूरा करेगी जिन्होंने सबसे पहले 1980 के दशक में नवी मुंबई में एक विश्वस्तरीय शहर बनाने की पेशकश की थी। उनकी योजना दक्षिण मुंबई को सड़क मार्ग के जरिये नवी मुंबई से जोड़ने की थी। यह परियोजना दक्षिण मुंबई का बेहतर संस्करण होगी और इससे मुंबई में भीड़भाड़ कम होगी।'

2005 में अंबानी ने स्किल इन्फ्रास्ट्रक्चर के संस्थापक निखिल गांधी के साथ हाथ मिलाया था। गांधी ने चीन के मेगा एसईजेड की तर्ज परा विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित करने की योजना बनाई थी और इसके लिए वह जमीन भी अधिग्रहीत कर चुके थे। सूत्रों का कहना है कि टाटा समूह भी एसईजेड परियोजना में शामिल होने का इच्छुक था लेकिन अंबानी ने इसमें बाजी मार ली। 2018 की शुरुआत में महाराष्‍ट्र सरकार ने इस परियोजना को निर्यातोन्मुखी क्षेत्र से औद्योगिक क्षेत्र में बदलने की अनुमति दे दी थी।

अंबानी के करीबी और बीएसई पर सूचीबद्ध जय कॉर्प के प्रवर्तक आनंद जैन को देश का सबसे बड़ा एसईजेड विकसित करने का जिम्मा दिया गया था। लेकिन एसईजेड के नियमों में स्पष्टता नहीं होने के कारण यह परियोजना 15 साल तक आगे नहीं बढ़ पाई और इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अभी महाराष्ट्र सरकार की कंपनी सीआईडीसीओ की एनएमएसईजेड में 26 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि शेष हिस्सेदारी जय कॉर्प, एसकेआईएल समूह और मुकेश अंबानी के पास है। माना जा रहा है कि अंबानी का नया शहर समूह की अन्य परियोजनाओं की तरह सबसे अलग और भव्य होगा।

एक सूत्र ने कहा, 'यह परियोजना भी जियो की तरह खेल के नियमों को बदल देगी।' 2005 में सिंगापुर सरकार की कंपनी जुरोंग टाउन कॉरपोरेशन को इसके डिजाइन की जिम्मेदारी दी गई थी। यह वही कंपनी है जिसने सिंगापुर का डिजाइन तैयार किया था। अंबानी की परियोजना के लिए इसी तरह के मॉडल को अपनाया जाएगा। शहर का काम पूरा होने के बाद इसमें दस लाख से अधिक लोग रह सकते हैं और हजारों कंपनियां काम कर सकती हैं।

सूत्र ने कहा कि यह रिलायंस समूह की सबसे बड़ी परियोजना होगी जिसमें एक परियोजना के अंदर कई परियोजनाएं होंगी। महाराष्ट्र सरकार पहले ही नवी मुंबई को सी लिंक के जरिये दक्षिण मुंबई से जोडऩे का काम लार्सन ऐंड टुब्रो तथा टाटा प्रोजेक्ट्स को दे चुकी है। नवी मुंबई में नया हवाई अड्डा बनाने का काम जीवीके की अगुआई वाले कंसोर्टियम को दिया गया है। इन दोनों परियोजनाओं से औद्योगिक शहर को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी जिसमें 15 फीसदी क्षेत्र आवासीय और बाकी औद्योगिक होगा। रियल एस्टेट सूत्रों का कहना है कि नया शहर दक्षिण मुंबई को टक्कर देगा जहां जमीन की कीमतें 80,000 रुपये से 1.2 लाख करोड़ रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच चुकी हैं जबकि बुनियादी ढांचा लचर है।

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