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इस सीजन में 7.2 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य

दिलीप कुमार झा / मुंबई April 07, 2019

भारत मौजूदा सीजन (दिसंबर 2018-नवंबर 2019) में पेट्रोल के साथ 7.2 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल करने के लिए तैयार है। पूरे देश (जम्मू-कश्मीर, उत्तर पूर्वी राज्यों और द्वीप क्षेत्रों को छोड़कर) के लिए वर्ष 2022 तक 10 प्रतिशत मिश्रण लक्ष्य हासिल करने के लिए 330 करोड़ लीटर एथनॉल की जरूरत होगी। मौजूदा सीजन यानी 2018-19 के लिए हालांकि भारत में चीनी मिलों ने 237 करोड़ लीटर की आपूर्ति के लिए अनुबंध किए हैं जो देश में पेट्रोल खपत का 7.2 प्रतिशत है। पूरे भारत में पेट्रोल के साथ औसत एथनॉल मिश्रण 2017-18 में 4.22 प्रतिशत था।
 
एथनॉल मिश्रण में भारी तेजी से न सिर्फ कच्चे तेल का आयात रोकने में मदद मिलेगी जिससे कीमती विदेशी मुद्रा भंडार की बचत होगी, बल्कि अतिरिक्त गन्ना रस और अन्य कच्चे माल के इस्तेमाल को भी इससे बढ़ावा मिलेगा।  भारतीय चीनी मिल संगठन (इस्मा) के महानिदेशक अबिनाश वर्मा ने कहा, 'देश में 10 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण के लिए 330 करोड़ लीटर एथनॉल की जरूरत के बजाय 2018-19 में 237 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति के लिए समझौते किए गए हैं। यदि अनुबंधित मात्रा का सफलतापूर्वक मिश्रण होता है तो लगभग 7.2 प्रतिशत पेट्रोल खपत को पर्यावरण अनुकूल बायो-एथनॉल के जरिये पूरा किया जाएगा।' यह भारतीय डिस्टिलरियों द्वारा अब तक सबसे ज्यादा एथनॉल आपूर्ति के अनुबंध हैं। पिछले साल 160 करोड़ लीटर एथनॉल आपूर्ति के अनुबंध किए गए और 2017-18 में 150 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति हुई।
 
यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है, क्योंकि नई जैव-ईंधन नीति, 2018 में वर्ष 2030 तक पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। आंतरिक तौर पर, सरकार ने 10 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण वर्ष 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। नई जैव-ईंधन नीति में देश में एथनॉल निर्माण के लिए कच्चे माल के तौर पर शीरे के अलावा अन्य पदार्थों की भी अनुमति दी गई है। इनमें गन्ने का रस, खराब अनाज, सड़े हुए आलू, मक्का, अनाज शामिल हैं। 
Keyword: ethnol, sugarcane, mills,,
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