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जेट प्रिवलिज सदस्यों को हड़बड़ी में माइल्स भुनाने की जरूरत नहीं

संजय कुमार सिंह /  April 07, 2019

नरेश गोयल की अगुआई वाली देश की जानी-मानी विमानन कंपनी जेट एयरवेज में पिछले कुछ अरसे से जो उथलपुथल मची है, उसे लेकर कंपनी के लॉयल्टी कार्यक्रम 'जेट प्रिवलिज' के सदस्यों में भी घबराहट दिख रही है। उन्हें चिंता इस बात की है कि अभी तक उन्होंने जो फ्रीक्वेंट फ्लायर माइल्स कमाए थे, वे बेकार तो नहीं हो चले जाएंगे और जब कंपनी के नए प्रवर्तक उसकी बागडोर अपने हाथ में लेंगे तो उनके माइल्स को वैध माना जाएगा या नहीं। जेट प्रिवलिज सदस्यों की यह चिंता बेबुनियाद भी नहीं है। जब विजय माल्या की अगुआई वाली विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस जमींदोज हुई थी तो उसके यात्रियों के एयर माइल्स धरे रह गए थे इसीलिए जेट के प्रिवलिज सदस्य ज्यादा परेशान हैं। लेकिन जानकारों का कहना है कि जेट की परिस्थिति किंगफिशर एयरलाइंस के मामले से बहुत अलग है और सदस्यों को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है।

 
किंगफिशर एयरलाइंस में मामला कुछ अलग था क्योंकि वहां फ्रीक्वेंट फ्लायर माइल्स कंपनी के खाते में ही जमा थे। इस वजह से जब किंगफिशर बंद हुई तो लॉयल्टी कार्यक्रम के ग्राहकों के सभी माइल्स भी बेकार हो गए। मगर जेट एयरवेज के लॉयल्टी ग्राहकों के माइल्स जेट प्रिवलिज के बहीखातों में दर्ज रहते हैं, जो अलग कंपनी है। इसकी 50.1 फीसदी यानी बहुलांश हिस्सेदारी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की दूसरी सबसे बड़ी विमानन कंपनी एतिहाद के पास है। जेट का लॉयल्टी कार्यक्रम यानी जेट प्रिवलिज काफी अहमियत भी रखता है। बेंगलूरएविऐशनडॉटकॉम के मुख्य संपादक देवेश अग्रवाल कहते हैं, 'तमाम हवाई अड्डों पर जेट के विमानों को उतरने के लिए निश्चित जगह मिलना तो अहम है ही, लेकिन उसकी सबसे मूल्यवान सुविधा शायद उसका लॉयल्टी कार्यक्रम ही है।' इस लॉयल्टी कार्यक्रम में अक्सर ऐसे लोग शामिल होते हैं, जो साल में 60 से अधिक हवाई यात्राएं करते हैं। इसीलिए प्रवर्तकों का फायदा भी इसी में है कि वे इस कार्यक्रम को चालू रखें और ग्राहकों को अपने साथ जोड़े रहें। लॉयल्टी प्रोग्राम के नियमों एवं शर्तों में अगर कोई नुकसानदेह बदलाव होता है तो ग्राहक इस विमानन कंपनी का साथ छोडऩे से पीछे नहीं हटेंगे और जाहिर है कि कंपनी के प्रवर्तक ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहेंगे।
 
जेटप्रिविलेज केवल एक लॉयल्टी प्राग्राम ही नहीं है, बल्कि इसका दायरा खासा बड़ा हो गया है। फ्रीक्वेंट फ्लायर वेबसाइट लाइवफ्रॉमअलाउंजडॉटकॉम के संस्थापक संपादक अजय अवतानी कहते हैं, 'हवाई टिकट खरीदने के अलावा जेटप्रिवलिज ग्राहकों के पास जमा जेपी माइल्स भुनाने के कई विकल्प हैं।' दूसरे शब्दों में कहें तो अगर यह भी मान लें कि जेट एयरवेज बंद हो जाती है तो भी सदस्य इसकी साझीदार विमानन कंपनियों में टिकट खरीदने के लिए एयरमाइल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। सदस्य होटल बुक करने से लेकर इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप पर ईंधन तक खरीदने में माइल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। हाल में ही जेटप्रिवलिज ने एक नया कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत सदस्य अपने जेपी माइल्स का इस्तेमाल इसकी गैर-साझेदार विमानन कंपनियों में भी टिकट खरीद के लिए कर सकते हैं। इसका मतलब है कि ग्राहक अन्य विमानन कंपनियों के टिकट खरीदने में भी माइल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। 
 
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह जेट की कमान अपने हाथ में ले रहे हैं, जिससे अब स्थिति सामान्य होती दिख रही है। बैंकों का समूह एक  नए प्रवर्तक की तलाश कर रहा है। इसके लिए बोलियां आमंत्रित की जा रही हैं और बैंक समूह को उम्मीद है कि जून के अंत तक जेट एयरवेज के लिए नया खरीदार मिल जाएगा। जेट भारी वित्तीय संकट से गुजर रही है, जो कर्ज लौटाने, लीज किराया और वेडरों को भुगतान में डिफॉल्ट कर चुकी है। कंपनी कर्मचारियों को वेतन देने में भी देरी कर रही है। कुछ विमानों का परिचालन बंद कर दिया गया है और कर्मचारियों की छंटनी की गई है। 
 
अवतानी कहते हैं, 'बदली परिस्थितियों को देखते हुए जेटप्रिवलिज के सदस्यों को घबराहट में माइल्स खर्च नहीं करना चाहिए।' प्रत्येक माइल (रुपये में) का मूल्य अलग-अलग होता है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कहां खर्च करने जा रहे हैं। माइल ऐसी जगह और इस तरह खर्च करें कि इसका अधिकतम मूल्य मिल सके। इसके साथ ही सदस्यों को लाखों माइल्स जमा रखने से बचना चाहिए। अग्रवाल कहते हैं, 'जितने अधिक माइल आपके खाते में होंगे, जोखिम भी उतना ही अधिक होगा। लिहाजा इनका इस्तेमाल समय-समय पर करते रहना चाहिए। विमानन कंपनियां समय-समय पर अपने लॉयल्टी प्रोग्राम के नियमों एवं शर्तों में बदलाव करती रहती हैं और कभीकभार ऐसा भी होता है कि बदलाव सदस्यों के लिए बहुत माफिक नहीं होते हैं। इन सभी बातों पर गौर करते हुए काफी संख्या में माइल जमा करने से बचना चाहिए।'
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