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मुश्किल नहीं है सस्ता होम लोन पाना

संजय कुमार सिंह /  April 07, 2019

आवास ऋण और कई अन्य खुदरा ऋणों की ब्याज दरों को 1 अप्रैल 2019 से बाहरी मानक से जोडऩे की योजना थी। लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने यह प्रस्ताव अनिश्चित काल के लिए टाल दिया है। उसका कहना है कि नई दर प्रणाली की तरफ रुख करने से पहले वह सभी संबंधित पक्षों से मशविरा करेगा। बहरहाल यह निर्णय उन ग्राहकों के लिए झटका है, जो अधिक पारदर्शी दर-निर्धारण प्रक्रिया लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। वैसे ग्राहक थोड़ी सतर्कता बरतकर अब भी सीमांत लागत उधारी दर (एमसीएलआर) प्रणाली के तहत सस्ती दरों पर ऋण प्राप्त कर सकते हैं। सवाल है कि बाहरी बेंचमार्क दर की जरूरत क्यों महसूस की गई? एमसीएलआर आधारित प्रणाली को छोड़कर बाहरी बेंचमार्क से जुड़े आवास ऋण की प्रणाली अपनाने का प्रस्ताव इसीलिए लाया गया था क्योंकि नीतिगत दरें बढऩे पर बैंक फौरन सक्रिय हो जाते थे और ब्याज दर बढ़ा दिया करते थे। लेकिन नीतिगत दरों में कटौती होने पर ब्याज दरें कम करने में वे बेहद सुस्ती दिखाते थे।

 
बैंक फिलहाल आवास ऋण दरें आदि तय करने के लिए एमसीएलआर और आधार दर जैसी मानक दरों का इस्तेमाल करते हैं। ये आंतरिक मानक होते हैं, जो बैंक की लागत से जुड़े होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दरें निर्धारित करते समय बैंक नियमों की अनदेखी कर देते हैं। ये दरें अर्थव्यवस्था में प्रचलित दरों के अनुरूप नहीं चलती हैं। जनक राज की अध्यक्षता वाले आरबीआई के एक आंतरिक अध्ययन समूह ने आधार दर और एमसीएलआर की गणना करने में मनमाना रवैया अपनाने के लिए बैंकों की खिंचाई की थी। बैंक जिस तरह एमसीएलआर पर स्प्रेड (उधारी और जमा पर ब्याज दरों का अंतर) की गणना करते थे, समूह ने उसे भी गलत बताया। दिसंबर 2018 में आबीआई ने कहा था कि सभी नए फ्लोटिंग व्यक्गित एवं खुदरा ऋण (आवास एवं वाहन) चार बाहरी मानकों- आरबीआई की रीपो दर, 91 दिनों की अवधि वाले ट्रेजरी बिल पर प्राप्ति, 182 दिन वाले ट्रेजरी बिल पर प्राप्ति या फाइनैंशियल बेंचमाक्र्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तय मानक ब्याज दरों- में किसी एक के साथ जोड़े जाएंगे। बेंचमार्क पर लागू होने वाला स्प्रेड ऋण पूरी अवधि के दौरान एक समान रहता बशर्ते उधार लेने वाले की साख में कोई बदलाव नहीं आया होता। इन बाहरी मानक दरों को अपनाने से अर्थव्यवस्था में दरों में बदलाव के अनुरूप ऋण दरें निर्धारित करने और उन्हें बदलने की प्रक्रिया में पारदर्शिता आती। मानक दर के साथ छेड़-छाड़ आसान नहीं होती क्योंकि यह स्वतंत्र इकाई तय करती थी। 
 
बैंक नहीं खुश
 
बैंक ऋण दरों को बाहरी मानकों के साथ जोडऩे के प्रस्ताव के खिलाफ थे। उनका कहना था कि ऋणों पर देनदारी का विचार किए बिना इन्हें (ऋणों को) बाहरी मानक से जोडऩे से उनके लिए ब्याज दरों से जुड़ा जोखिम हो सकता है। केवल भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने बचत बैंक खाते, जमा एवं लघु अवधि के ऋणों को एक बाहरी बेंचमार्क-आरबीआई की रीपो दर- से जोड़ा है। सेबी के पास पंजीकृत विशेषज्ञ हर्ष रूंगटा का कहना है कि दरों में कटौती का नीचे प्रसार करने के लिए आरबीआई को सभी बैंकों के लिए उनकी बचत जमा दरें एक बाहरी मानक से जोडऩा अनिवार्य कर देना चाहिए। रूंगटा ने कहा कि हरेक बैंक को एमसीएलआर की विस्तृत गणना सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि उधार लेने वाले ये देख सकें कि दरें तय करने में मनमाना रवैया तो नहीं अपनाया गया है।
 
क्या करें उधार लेने वाले?
 
सिटी बैंक ने अपने आवास ऋण को खुद ही बाहरी मानक दर से जोड़ दिया है। अगर कोई व्यक्ति बाहरी मानक दर से जुड़ा ऋण लेना चाहता है तो सिटी की पेशकश उनके लिए एक विकल्प हो सकता है। सिटी का आवास ऋण तीन महीने के ट्रेजरी बिल दर से जुड़ा है और इसकी ऋण दर हरेक तिमाही में बदल सकती है। जिन लोगों ने पहले ही आवास ऋण ले रखा है, उन्हें यह जरूर देखना चाहिए कि वे जितना ब्याज दे रहे हैं वह बाजार के हिसाब से सस्ता है या नहीं। अगर अधिक अंतर दिख रहा है तो उन्हें सतर्क हो जाना चाहिए।  डिजिटल होम लोन ब्रोकर स्विचमी के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी आदित्य मिश्रा कहते हैं,'अगर आपका मौजूदा बैंक या एनबीएफसी नए ग्राहकों को कम ब्याज पर ऋण दे रहा है तो आप भी उसी दर पर ब्याज लेने के लिए कहें। इसके लिए आपको 3,000 रुपये फीस देनी पड़ सकती है।' 
 
अगर मौजूदा कर्जदाता के साथ बात नहीं बन रही है तो कर्ज दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने पर विचार करें। पहले इसकी गणना जरूर कर लें कि आप इससे कितनी रकम बचा पाएंगे। जितनी राशि आप बचा पाएंगे वह कई कारकों जैसे बकाया मूलधन, शेष बची ऋण की अवधि, ब्याज दरों में अंतर आदि पर  निर्भर करेगी।  जानकारों का कहना है कि पुराने और नए कर्जदाता के बीच कम से कम 25 आधार अंक का अंतर होना चाहिए और नए कर्जदाता की प्रोसेसिंग फीस 2,500-5,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। प्रोसेसिंग फी, स्टांप शुल्क आदि जरूर देख लें  क्योंकि इन पर विचार करने बाद ही आपको ऋण स्थानांतरित करने पर शुद्ध बचत का हिसाब मिलेगा। 
 
कई ग्राहकों ने आवास वित्त कंपनियों से ऋण लिए हैं, जिनके ऋण मुख्य उधारी दर (पीएलआर) से जुड़े होते हैं। ऐसे ग्राहक अपने ऋण बैंकों में स्थानांतरित करने पर विचार कर सकते हैं। पैसाबाजार डॉट कॉम के मुख्य कार्याधिकारी एवं सह-संस्थापक नवीन कुकरेजा कहते हैं, 'एमसीएलआर अधिक पारदर्शी प्रणाली है और पीएलआर के मुकाबले इसमें नीतिगत दरों में कमी का लाभ बेहतर तरीके से दिखता है।' इसी तरह, जिन ग्राहकों के ऋण अब भी आधार दरों (एमसीएलआर से पहले इस्तेमाल होने वाली मानक दर) से जुड़े हैं, वे अब भी ऊंची ब्याज दरों का भुगतान कर रहे हैं। 
 
ऐसे लोगों को जल्द से जल्द सबसे सस्ता उपलब्ध एमसीएलआर आधारित ऋण के लिए प्रयास करना चाहिए। जो लोग भविष्य में आवास ऋण लेना चाहते हैं उन्हें एक अच्छा क्रेडिट स्कोर (750 और इससे अधिक) बरकरार रखने के लिए कमर कसनी चाहिए। ग्राहकों के क्रेडिट प्रोफाइल सुधारने में मदद करने वाली कंपनी क्रेडिट सुधार के सह-संस्थापक अरुण राममूर्ति कहते हैं, 'बैंक ग्राहकों का ऋण मंजूर करते समय उनके पेशे का ध्यान रखते हैं। हालांकि अगर क्रेडिट स्कोर ठीक है तो आप कम ब्याज दरों के लिए बातचीत कर सकते हैं।' क्रेडिट स्कोर कम है तो इसमें सुधार लाने की कोशिश करें।
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