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टिकटॉक और दूसरे चीनी ऐप के लिए कठिन समय

करण चौधरी और नेहा अलावधी /  April 07, 2019

टिकटॉक, क्वाई, लाइक और इस तरह के दूसरे लोकप्रिय चीनी वीडियो ऐप के भारत में भिवष्य पर तलवार लटकी हुई है। गुरुवार को मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा इस तरह के ऐप पर प्रतिबंध लगाने पर केंद्र सरकार से जवाब मांगना इनके लिए पहला झटका हो सकता है और अगले कुछ महीनों तक सभी चीनी वीडियो ऐप इस तरह की चुनौतियों का सामना करेंगे। छोटे और मझोले शहरों में काफी लोकप्रिय और कुल 30 करोड़ उपयोगकर्ताओं के साथ ये चीनी ऐप अब गृह मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के रडार पर हैं। इन दोनों मंत्रालयों को कई राज्यों से बहुत शिकायतें मिली हैं। 

 
मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि अधिकांश राज्य इन ऐप पर प्रतिबंध का विचार कर रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि इनके जरिये बाल पोर्नोग्राफी, नग्नता और फर्जी खबरों का विस्तार हो रहा है।  गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'हमें तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और असम समेत दक्षिण भारत तथा पूर्वी राज्यों से कई शिकायतें मिली हैं। इस समय हम परिस्थिति पर निगाह बनाए हुए हैं और अगर जरूरत हुई तो इनमें से कुछ ऐप को प्रतिबंधित किया जाएगा। चुनाव के चलते हम किसी तरह की चूक नहीं चाहते।' मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा था कि टिकटॉक 'पोर्नोग्राफी को बढ़ावा' दे रहा है। आईटी मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, देश के छोटे शहरों और दूरस्थ इलाकों तक इनकी पहुंच से पोर्टल का दुरुपयोग होने की संभावनाएं बढ़ी हैं। आईटी मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'वे मध्यस्थ की नियुक्ति का दावा करते हैं लेकिन इन पोर्टल पर बहुत सी ऐसी सामग्री है जिसे केवल पोर्न और अश्लील श्रेणी में ही रखा जा सकता है। 10 साल से छोटे बच्चे वीडियो पोस्ट कर रहे हैं और वहां इसकी निगरानी के लिए कोई मध्यस्थ नहीं है।'
 
हालांकि उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिबंध लगाने के बजाय कानून का बेहतर अनुपालन ही दीर्घावधि के लिए बेहतर उपाय है। कानूनी फर्म टेकलेजिस एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर में मैनेजिंग पार्टनर सलमान वारिस कहते हैं, 'किसी ऐप को प्रतिबंधित करने से उस सामग्री के प्रसार में कमी लाई जा सकती है लेकिन यह दीर्घावधि उपाय नहीं है। इनमें से अधिकांश ऐप के सर्वर चीन या भारत से बाहर दूसरे देशों में हैं और आईटी कानून की धारा 75 देश की सीमा से बाहर कानूनी अधिकार देती है। यह कानून देश से बाहर होने वाले अपराध के लिए किसी भी व्यक्ति तक विस्तारित है।' 
 
उद्योग से जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि टिकटॉक पर आ रही सामग्री को देखते हुए प्रतिबंध लगाया जा सकता है। एक अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, 'यह देखना उत्साहजनक है कि मद्रास उच्च न्यायालय टिकटॉक जैसे चीनी प्लेटफॉर्म को लेकर सुनवाई कर रहा है। ये प्लेटफॉर्म अनुचित सामग्री के हब की तरह काम कर रहे हैं और अपने एआई टूल के लिए भारतीय बच्चों को परीक्षण की समग्री समझ रहे हैं। इंटरनेट पर सुरक्षा के मामले में न्यायालय ने वह कार्य किया है जो सरकार पिछले कुछ महीनों से नहीं कर पा रही थी।'
 
विशेषज्ञ चाहते हैं कि इस तरह के प्लेटफॉर्म के लिए प्रभावी जांच और निगरानी तंत्र बनाया जाए। लंदन स्थित डिजिटल पहचान सेवा प्रदाता कंपनी योती के भारत प्रमुख शांतनराम जोनलगड्डा कहते हैं, 'आज के समय में तकनीक की मदद से किसी भी उम्र का व्यक्ति इंटरनेट पर मौजूद है। डिजिटल पहचान तकनीक की सहायता से व्यक्ति के बारे में अधिक जानकारी लेकर बेहतर फिल्टर लगाए जा सकते हैं। इसकी मदद से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि संबंधित सामग्री तक सीमित लोगों की पहुंच हो और उनकी पहचान तथा निजी जानकारी को सुरक्षित किया जा सके।' उच्च न्यायालय के आदेश के बाद टिकटॉक ऐप लॉन्च करने वाली कंपनी का कहना है, 'हम पूरी तरह से सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थानों के लिए दिशानिर्देश) नियम 2011 के निर्देशों का अनुपालन करते हैं। अभी हम आधिकारिक आदेश का इंतजार कर रहे हैं और उसके बाद हम समीक्षा करके उचित कदम उठाएंगे। टिकटॉक पर सुरक्षित और सकारात्मक माहौल बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। लोगों की निजता की सुरक्षा और दुरुपयोग से बचाने के लिए हमारे पास मजबूत उपाय हैं।' वीडियो साझा करने वाले इस प्लेटफॉर्म की निदेशक (वैश्विक लोक नीति) हेलेना लेर्श ने कुछ समय पहले बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया था कि उनके पास सामग्री की जांच के लिए मजबूत तंत्र मौजूद है। उन्होंने कहा, 'हमारे पास बेहतर प्रणाली है। यहां लोग सामग्री को रिपोर्ट कर सकते हैं, समुदाय के लिए दिशानिर्देश हैं और हम केवल वही सामग्री को इजाजत देते हैं जो समुदाय के दिशानिर्देशों का पालन करती है। हम अभद्र भाषा, अश्लील सामग्री और पोर्नोग्राफी पर रोक लगाते हैं। हमें जैसे ही ऐसी किसी सामग्री का पता चलता है तो हम इसे तत्काल हटा लेते हैं। इसके लिए एक टीम 24 घंटे लगातार काम करती है।'
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