बिजनेस स्टैंडर्ड - यूबीआई लुभावना, लेकिन दिशाहीन
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यूबीआई लुभावना, लेकिन दिशाहीन

इंदिवजल धस्माना /  04 07, 2019

बीएस बातचीत

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पानगड़‍िया का कहना है कि कांग्रेस का 'न्याय' का वादा वित्तीय समेकन को बहुत नुकसान पहुंचाएगा और सब्सिडी में कटौती करनी पड़ेगी। उन्होंने इंदिवजल धस्माना से बातचीत में कहा कि वह इस बात से खुश हैं कि राजनीति के दोनों पक्ष अब लक्षित नकदी हस्तांतरण की बात कर रहे हैं। संपादित अंश...

बिजनेस स्टैंडर्ड यूबीआई लुभावना, लेकिन दिशाहीनकांग्रेस ने घोषणापत्र में एक जीएसटी दर का वादा किया है, क्या यह हो सकता है?

अभी तत्काल ऐसा करना बहुत कठिन और हानिकारक होगा। हालांकि धीरेधीरे ऐसा करना संभव है और इसके लिए पर्याप्त समय की जरूरत होगी। 

कांग्रेस ने न्यूनतम आय योजना (न्याय) का वादा किया है, जिसमें 5 करोड़ परिवारों को 6,000 रुपये महीना दिया जाना है। क्या वित्तीय समेकन को प्रभावित किए बगैर ऐसा किया जा सकता है? 

नहीं, वित्तीय समेकन को गंभीर क्षति पहुंचाए बगैर या राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), पीएम किसान, मनरेगा और खाद सब्सिडी जैसी तमाम मौजूदा सब्सिडियों में कटौती के बगैर इस राशि की व्यवस्था करना संभव नहीं है। इन सब्सिडी को खत्म करना आसान नहीं है। इन योजनाओं की सब्सिडी पाने वाले हमेशा एक ही व्यक्ति नहीं होते, भले ही कुछ दोहराव हो। बजट के हिसाब से 3.6 लाख करोड़ रुपये वित्त वर्ष 2019-20 के कुल बजट व्यय का 13 प्रतिशत है। 

इस कटौती की जगह कहां है? 

मैं इस बात से खुश हूं कि हम नकदी हस्तांतरण योजनाओंं की ओर बढ़ रहे हैं और यह दोनों पक्ष स्वीकार कर रहे हैं। यह खासकर कांग्रेस के हिसाब से अहम है, क्योंकि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के तहत राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के कुछ सदस्य नकदी हस्तांतरण के प्रखर विरोधी थे। मैं इस बात से भी खुश हूं कि दोनोंं पक्ष प्राथमिकता के हिसाब से लक्षित हस्तांतरण के पक्ष में हैं। लेकिन सार्वभौमिक बुनियादी आमदनी के लिए योजना बनाए बगैर हस्तांतरण किया जाए तो मुकेश अंबानी को भी नकद हस्तांतरण जा सकता है। 

कांग्रेस ने नीति आयोग को खत्म कर उसकी जगह पुनर्परिभाषित भूमिका के साथ योजना आयोग बनाने का वादा किया है, इस पर आपका क्या कहना है?

नीति आयोग से मैं हाल में जुड़ा रहा हूं, इसलिए इसके बारे में मैं कोई प्रतिक्रिया नहीं दूंगा। 

आपने अमेरिका के साथ भारत के सेवाओं के कारोबार के बारे में सुझाव दिए हैं? आप वस्तुओं के मामले में ऐसी वकालत क्योंं नहीं करते?

भारत और अमेरिका अपना संबंध बढ़ाना चाहते हैं, जिसके लिए मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) एक मजबूत माध्यम हो सकता है। आदर्श रूप से एफटीए में वस्तु एवं सेवाओंं दोनों को शामिल किया जाना चाहिए। लेकिन वस्तुओं के एफटीए के लिए कृषि में उदारीकरण की जरूरत है, जो राजनीतिक कारणों से भारत में कठिन है। गैट्स एग्रीमेंट के तहत सिर्फ सेवाओं के लिए समझौता राजनीतिक रूप से स्वीकार समझौता हो सकता है। 

तटीय आर्थिक क्षेत्र का आपका विचार लागू नहीं हो सका? आपके मुताबिक इसकी राह में क्या रोड़े हैं? 

किसी नए विचार को मूर्त रूप देने में वक्त लगता है। हम अधीर हो सकते हैं, लेकिन निराशावादी नहीं। मुझे अभी भी भरोसा है कि समय के साथ इस विचार को स्वीकृति मिल जाएगी। 

आपने राजस्थान में श्रम सुधार लागू किए, लेकिन यह केंद्र के स्तर पर लागू नहीं हो सका। क्या आपको लगता है कि राजस्थान में भाजपा की हार इसकी एक वजह हो सकती है?

केंद्र सरकार ने बड़ा श्रम कानून सुधार लागू किया है, नियत अवधि का रोजगार। यह प्रभावी रूप से राजस्थान में हुए सुधार के बराबर या कहें कुछ मामले में उससे बेहतर है। 
Keyword: niti aayog, arvind pangaria, subsidy,,
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