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लुभावने वादों से उलझन में मतदाता...

शुभायन चक्रवर्ती /  04 07, 2019

चुनावी सफर

बिजनेस स्टैंडर्ड लुभावने वादों से उलझन में मतदाता...बिज़नेस स्टैंडर्ड के संवाददाताओं ने देश भर में लोकसभा चुनावों से पहले आम आदमी का मिजाज जानने के लिए स्लीपर क्लास में यात्रा की। चार कड़‍ियों की इस शृंखला के पहली कड़ी में शुभायन चक्रवर्ती ने तिरुवनंतपुरम से कोलकाता के सफर में लोगों का मूड भांपने की कोशिश की...

बिजनेस स्टैंडर्ड लुभावने वादों से उलझन में मतदाता...सुब्रत नस्कर गुस्से से उस भीड़ को देख रहे हैं जो ट्रेन के आरक्षित डिब्बे में चढ़ने के लिए धक्का मुक्की कर रही है। इसी डिब्बे में उन्होंने भी घर जाने के लिए टिकट बुक कराया है। नक्सर ने जीवन में पहली बार यह सोचकर आरक्षित टिकट खरीदा था कि तिरुवनंतपुरम से कोलकाता तक का 45 घंटे का उनका सफर आरामदायक रहेगा। लेकिन ऐसा नहीं होने वाला है। ट्रेन पश्चिम बंगाल, बिहार और असम के प्रवासी मजदूरों से खचाखच भरी है जो आम चुनावों में अपना वोट डालने के लिए घर जा रहे हैं। 

नस्कर मिस्त्री हैं और पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा, 'चुनाव की वजह से ऐसा हो रहा है। मैंने दलाल के जरिये टिकट का जुगाड़ किया और इसके लिए दो दिन की दिहाड़ी देनी पड़ी।' नस्कर केवल दो ही ट्रेनों में घर जा सकते हैं जिनमें एक गुरुदेव एक्सप्रेस है। सप्ताह में एक बार चलने वाली यह ट्रेन तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा होते हुए कोलकाता पहुंचती है।  तिरुवनंतपुरम स्टेशन पर टिकट इंस्पेक्टर के जे थॉमस ने कहा, 'ट्रेन में क्षमता से तीन गुना ज्यादा टिकट बुक हुए हैं। लेकिन यह चुनाव का समय है, इसलिए हम अनारक्षित यात्रियों को भी नहीं रोक रहे हैं।' पिछले सप्ताह जब रेलवे पुलिस ने लोगों को आरक्षित डिब्बों में चढऩे से रोका था तो वहां दंगे जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। 

बंगाल की लड़ाई
बिजनेस स्टैंडर्ड लुभावने वादों से उलझन में मतदाता...गुरुदेव एक्सप्रेस में सफर कर रहे अधिकांश बंगाली प्रवासी मिस्त्री हैं। नस्कर रोजाना 950 रुपये कमाते हैं और फिलहाल वह कोझिकोड में एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की इमारत बना रहे हैं। यह उस दिहाड़ी से दोगुना से भी अधिक है जो उन्हें घर पर मिलती थी। अगर उन्हें वोट के बदले मिलने वाले इनाम का लालच नहीं होता तो वह शायद ही इस दिहाड़ी को छोड़ते। मुर्शिदाबाद जिले के तपन आलम ने कहा, 'तृणमूल कांग्रेस पहले ही टिकट खरीदने के लिए बुजुर्ग मिस्त्रियों को पैसा दे चुकी है। पंचायत के नेताओं ने वादा किया है कि जो लोग पार्टी को वोट देंगे उनके नाम की सिफारिश आवास योजनाओं, सरकारी योजनाओं और 100 दिन के काम के लिए की जाएगी।' कई लोगों ने कहा कि तृणमूल ने वामंपथी दौर की हिंसा की रणनीति को अपना लिया है लेकिन उसने उत्तरी बंगाल के मुस्लिम बहुल जिलों में विकास के कुछ काम किए हैं। यही वजह है कि लोग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को वोट देते हैं। 

सांप्रदायिक पहलू

कुछ लोगों का मानना है कि इस बार तृणमूल पर दबाव है। कटवा के विप्लव डे कहते हैं, 'तृणमूल को हारने का डर है। दक्षिण बंगाल में भाजपा को अहम सीटों पर बढ़त मिल रही है।' डे दो दशक पहले असिस्टेंट बॉयलर मैकेनिक के रूप में कोच्चि आए थे और अब इंजीनियरिंग सामान बनाने वाली केरल की एक कंपनी का पूर्वी भारत में कामकाज देखते हैं। उन्होंने कहा, 'बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठ खुला रहस्य है। उनमें से कई काम की तलाश में दक्षिण राज्यों में आते हैं।' असम के धुबरी जिले के रहने वाले बबलू दास कोच्चि में ओला कैब चलाते हैं और वह भी डे की बात से इत्तेफाक रखते हैं। उन्होंने कहा, 'स्थानीय नेताओं ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी में मेरे परिवार का नाम अद्यतन करने के दौरान ही स्थानीय नेताओं ने स्पष्ट कर दिया था कि हमारा वोट किसको जाना चाहिए। 

लेकिन मैं उन्हें दोष नहीं देता हूं, निचले असम में कई जिले हैं, जहां पूर्ववर्ती तरुण गोगोई सरकार ने सीमापार से होने वाले घुसपैठ को लेकर आंखें मंूद ली थी।' 2011 की जनगणना के अनुसार असम के 32 जिलों में से 9 मुस्लिम बहुल हैं जबकि इससे पहले की जनगणना में केवल 3 जिले मुस्लिम बहुल थे। अधिकांश यात्रियों का मानना है कि बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाला ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को 3 सीटों पर जीत मिली थी। हालांकि दास ने कहा कि अजमल की पार्टी को भाजपा से कड़ी चुनौती मिलेगी। 

वोट किसे मिलेगा ...

ट्रेन में काफी संख्या में ऐसे यात्री भी थे जो पूर्वी भारत से तमिलनाडु के छोटे से शहर वेल्लोर में इलाज के गए थे। स्वाति कर्नाटी अपने 74 वर्षीय पिता का वेल्लोर में गले के कैंसर का इलाज कराकर लौट रही थी।  उन्होंने बताया,  'सुना था कि प्रत्येक शहर में जन औषधि स्टोर खोले जा रहे हैं लेकिन पिछले 1 साल के दौरान मुझे एक स्टोर नजर नहीं आया। चंद्रबाबू नायडू सरकार ने आंध्र प्रदेश में इसी तरह की एक योजना शुरू की है जहां हमें रियायती दर पर दवाएं मिल जाती हैं।' साथ में यात्रा कर रहे उनके भाई जो कि किसान हैं, ने तपाक से कहा कि तेलुगू देशम पार्टी मुश्किल में फंसे किसानों को वित्तीय मदद करती है, ऐसे में वह निश्चित रूप से जीतेगी। ट्रेन में ऐसे भी कुछ यात्री थे जिन्हें घर लौटते हुए खुशी नहीं हो रही थी।

भुवनेश्वर के रहने वाले मैकेनिक जमशेद शाह कोल्लम में काम करते थे लेकिन पिछले हफ्ते उनके मालिक ने उन्हें नौकरी से हटा दिया। नौकरी से हटाने के पीछे तर्क यह दिया गया कि पिछले एक साल के दौरान केरल के लाखों लोगों को खाड़ी देशों से वापस आना पड़ा है, जिसकी वजह से बाहरी को काम पर रखने की जरूरत नहीं है। काम नहीं मिलने की वजह से शाह को मजबूरी में घर लौटना पड़ रहा है। तिरुवनंतपुरम के सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज के अनुसार 2018 में करीब 13 लाख केरलवासियों को खाड़ी देशों से वापस आना पड़ा है।जमशेद अपने 6 माह के बेटे की तस्वीर को हाथ में लेकर निहार रहे थे, क्योंकि उन्होंने उसे अब तक देखा भी नहीं है। उनके जब पूछा गया कि आप किसे वोट करेंगे, तो उन्होंने अपना सिर हिलाते हुए कहा, 'मैं इसके बारे में ज्यादा सोचता नहीं हूं।'

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