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राहुल से वायनाड ने लगाईं उम्मीदें

गिरीश बाबु /  April 06, 2019

केरल के सबसे पिछड़े जिले वायनाड से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लडऩे की चाहे कोई भी वजह हो लेकिन इससे इस निर्वाचन क्षेत्र के लंबे समय से अधूरे सपने को फिर से रोशन होने का मौका मिला है।गुरुवार को राज्य में राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वायनाड नामांकन पत्र दाखिल करने आए और इस वजह से राज्य में कांग्रेस पार्टी में काफी उत्साह है। इस जिले में कोई रेलवे लाइन नहीं हैं।

जिले को उम्मीद है कि अब तक के अधूरे सपने को यह उम्मीदवार पूरा कर सकता है। कालपेट्टïा में एक दुकानदार अहमद मनीकोठु कहते हैं, 'मैंने अब तक केवल वाम दलों को ही वोट दिया है। इस बार मेरा परिवार राहुल गांधी को वोट देगा क्योंकि वह अकेले ही वायनाड में बदलाव ला सकते हैं।' उनके लिए यह सुनहरा मौका है कि वायनाड के अधूरे सपने पूरे हो जाएं। इसके लिए अहम बात यह है कि गांधी परिवार के इस उत्तराधिकारी को चुनाव जीतना चाहिए, उनकी पार्टी को बहुमत से जीतना चाहिए और सरकार बनानी चाहिए साथ ही अगर वह अपनी परंपरागत सीट से जीतते हैं तब भी उन्हें अपना यह निर्वाचन क्षेत्र बरकरार रखना चाहिए। 

वायनाड का हाल

वायनाड लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में सात विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं जिनमें वायनाड जिले से मनांन्थवाद्य, सुल्तान बत्तेरी और कालपेट्टïा और तिरुवंवादी से कोझिकोड और अर्नाद, मलप्पुरम जिले से नीलांबर और वांदुर शामिल हैं। यह केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु को जोडऩे वाला क्षेत्र भी है। जिले के नेताओं का कहना है कि इस निर्वाचन क्षेत्र की 33 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों की है और करीब 40 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर है जिनकी आजीविका मसालों, कॉफी और चाय से मिलती है। सात निर्वाचन क्षेत्रों में से तीन अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है। लगभग 50 फीसदी आबादी में मुस्लिम और ईसाई धर्म के लोग शामिल हैं। 

केरल से वायनाड जिले तक नीलगिरी पहाडिय़ों से होकर जाया जाता है। बारिश के दिनों में रास्ता काफी खतरनाक हो जाता है। वहीं दूसरी तरफ से कर्नाटक सीमा और मैसूर की तरफ से यहां जाया जा सकता है जहां परिवहन पर रात्रि 9 बजे से सुबह 6 बजे तक प्रतिबंध है। कोझिकोड में सबसे नजदीकी सरकारी मेडिकल कॉलेज है जो वायनाड के मुख्य शहर कालपेट्टïा से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर है।

वर्ष 2009 में यह लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र बना और पहले चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार दिवंगत एम आई शानवास ने यहां से 1,53,439 वोटों के अंतर के साथ जीत दर्ज की। उन्हें भाकपा उम्मीदवार एम रहमतुल्ला के 2,57, 264 वोट के मुकाबले 4,19,703 वोट मिले। वर्ष 2014 के आम चुनावों में शानवास ने महज 20,870 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें 3,77,035 वोट मिले जबकि भाकपा उम्मीदवार सत्यन मोकेरी को 3,56,165 वोट मिले। भाजपा उम्मीदवार पी आर रसमिलनाथ 80, 752 वोटों के साथ तीसरे पायदान पर थे। 

रिपोर्ट के मुताबिक जिले में अब 13, 25, 788 वोटर हैं और इनमें से 6,55, 786 पुरुष और 6,70,002 महिलाएं हैं। राजनीतिक दलों का कहना है कि इस चुनाव में 60,000-1,00,000 नए मतदाता जुड़ गए हैं। 2014 के चुनावों में रसमिलनाथ और सुल्तान बत्तेरी में भाकपा उम्मीदवार ने कांग्रेस उम्मीदवार के मुकाबले बढ़त बनाए रखा लेकिन बाकी के पांच क्षेत्रों में शानवास को स्पष्ट बहुमत मिलता दिखा। इससे कांग्रेस में अपने शीर्ष उम्मीदवार को यहां से चुनाव लड़ाने का आत्मविश्वास बढ़ा। मलप्पुरम के क्षेत्र में मुसलमानों और अनुसूचित जनजाति आबादी ज्यादा है।

उत्साह की जीत

कई वजहों से इस सीट से राहुल की उम्मीदवारी की घोषणा में देरी हुई जिनमें राहुल के खिलाफ भाकपा और माकपा के कड़े विरोध की अफवाहें भी शामिल हैं।  गुरुवार को राहुल ने अपना नामांकन पत्र यहां से दाखिल किया जिसके बाद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने युद्धस्तर पर उनके लिए काम करना शुरू कर दिया है। 

कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को इतना उत्साह है कि वे राहुल को इस सीट से भारी अंतर के साथ जीत दिलाने की रणनीति बना रहे हैं। जिला कांग्रेस कमिटी के दफ्तर कालपेट्टा में पार्टी के महासचिव एम एम रमेश ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि उनका मकसद 5 लाख वोटों का बहुमत दिलाना है।

वायनाड संसदीय उम्मीदवार के लिए केपीसीसी प्रचार विभाग के अध्यक्ष सी अब्दुल अशरफ कहते हैं, '2009 के चुनाव में हमें 1.5 लाख वोट की बढ़त मिली थी, ऐसा तब हुआ जब पार्टी के एक बागी (पूर्व नेता के करुणाकरण के बेटे के मुरलीधरन) को लगभग एक लाख वोट मिले। ऐसे में 2.5-3 लाख वोटों को लेकर आश्वस्ति आज भी दी जा सकती है। अब करीब एक लाख नए युवा मतदाता हैं और हम यह उम्मीद करते हैं कि वे कांग्रेस को वोट देंगे। हम कुछ तटस्थ वोटों की गिनती भी कर रहे हैं और कुछ दूसरे दलों के वोट भी राहुल की मौजूदगी की वजह से आएंगे।'

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव के सी वेणुगोपाल ने जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय का दौरा किया जिन्होंने यह खुलकर नहीं कहा कि पार्टी रिकॉर्ड बहुमत की उम्मीद कर रही है। पार्टी को उम्मीद है कि केरल की सभी 20 सीटों पर पार्टी का दबदबा होगा और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों पर इसका एक सकारात्मक असर होगा। 

इस निर्वाचन क्षेत्र में राहुल गांधी के पोस्टर सार्वजनिक स्थलों पर बुधवार से ही दिखने शुरू हो गए जबकि भाकपा के उम्मीदवार पी पी सुनीर करीब एक महीने से यहां चुनाव प्रचार कर रहे हैं। पार्टी सदस्यों को उम्मीद है कि कृषि कर्जमाफी और न्यूनतम आमदनी योजना जैसी घोषणाओं का निर्वाचन क्षेत्र पर असर दिखेगा। साथ ही राहुल जिले से जुड़े अन्य मसलों पर भी बात कर सकते हैं।

राज्य में चुनाव 23 अप्रैल को होगा ऐसे में राहुल अपने इस निर्वाचन क्षेत्र में कितना वक्त बिता पाएंगे? स्थानीय नेतृत्व का मानना है कि अगर वह यहां नहीं भी आते हैं तब भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। अशरफ कहते हैं, 'पार्टी का हर कार्यकर्ता उनका प्रतिनिधि है।' पार्टी की रणनीति सबके दरवाजे पर जाकर प्रचार करना, परिवारों से मुलाकात करना और अधिकतम मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक लाना है। आमतौर पर वायनाड में करीब 80 फीसदी तक मतदान होता है लेकिन इस बार पार्टी इसे 90 फीसदी के स्तर पर ले जाने के लिए पूरी मेहनत करेगी।

राहुल के यहां आने से पार्टी की गुटबाजी कुछ वक्त के लिए ही सही, खत्म करने में भी मदद मिली है जो पार्टी के सभी स्तर पर काफी ज्यादा है। उन्होंने इन आरोपों को झूठा ठहराया कि निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व सांसदों ने जिले के लिए कुछ भी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सांसदों ने पिछले 10 सालों में इस निर्वाचन क्षेत्र में 3,000-4,000 करोड़ रुपये की परियोजना लाने का काम किया है। अब सवाल यह है कि राहुल अगर अमेठी और वायनाड दोनों जगहों से जीत जाते हैं तब क्या वह वायनाड की सीट को बरकरार रखेंगे? स्थानीय नेता कहते हैं कि वह वायनाड की सीट रखेंगे और अमेठी की सीट से इस्तीफा दे सकते हैं ताकि उनकी बहन प्रियंका के लिए राह सुनिश्चित की जा सके।

क्या हैं मुद्दे?

इस निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 40 फीसदी आबादी किसानों की है और यहां सबसे बड़ा मसला यह है कि उनके खाते में कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। काली मिर्च, कॉफी और अन्य उत्पादों की कीमतों में कमी आई है और ज्यादातर किसानों ने कर्ज का भुगतान नहीं किया है जिनके पास  5 एकड़ से कम या 5-10 एकड़ जमीन है।

एक गैर-राजनीतिक किसान संगठन हरिता सेना का कहना है कि वायनाड के करीब 8370 किसान बैंक की सरफेसी सूची में शामिल हैं और कोई भी सरकारी समर्थन उन्हें अब तक नहीं मिला है। वायनाड में सेना के जिला समिति सदस्य जेम्स का कहना है, 'वे कांग्रेस के न्यूनतम आमदनी वादे पर भरोसा नहीं करते हैं और वास्तव में कृषि कर्ज का समाधान करने की जरूरत है।' किसान सरफेसी प्रक्रिया के अमल के खिलाफ बैंकों के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं। 

दूसरा मसला यह है कि नीलांबर-नांजेंगोडे रेलवे लाइन की मांग काफी लंबे समय से लंबित है क्योंकि कई सालों से जिले में रेलवे लाइन या स्टेशन की कमी खटक रही है। इसके अलावा कर्नाटक और केरल में रात्रि के समय परिवहन जारी रखने की मांग भी होती है क्योंकि अदालत ने जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए अभी इस पर प्रतिबंध लगा रखा है। यह एक गंभीर मसला है क्योंकि इससे जिले के व्यापारियों के लिए मैसूर के बाजारों तक पहुंच आसान और सस्ती हो सकती है। 

नक्सलियों के खतरे को लेकर भी राहुल के खिलाफ मुद्दा उठ रहा है। इसी वजह से राहुल को गुरुवार को हेलीकॉप्टर से वायनाड आना पड़ा और उन्हें जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में जाने की मंजूरी नहीं मिली। विपक्ष का सवाल है कि अगर वह जीतते हैं तो क्या वह निर्वाचन क्षेत्र में आ पाएंगे?

वाम दलों की स्थिति

केरल वामपंथी दलों का आखिरी गढ़ है और राहुल की लहर से इसके उम्मीदवारों को नुकसान होगा। राहुल ने भले ही यह कहा कि वह वामपंथी दल की आलोचना नहीं करेंगे और उनका मुकाबला भाजपा से है लेकिन स्थानीय कांग्रेस नेता और वाम नेताओं के बीच ही मुकाबला है। वायनाड में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) लड़ाई के लिए तैयार है। भाकपा के एक स्थानीय कमेटी सदस्य पी के रंजन कहते हैं, 'राहुल अब वाम दल के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं हम उन्हें यहां दिखाकर रहेंगे।'

उन्होंने आरोप लगाया कि अमेठी में 70 फीसदी बिजली की कटौती है लेकिन एलडीएफ की सरकार ने सूखे की स्थिति और पन बिजली परियोजना पर निर्भरता के बावजूद यहां बिना बाधा के बिजली मुहैया कराई है। उनका आरोप है कि चुनाव के बाद राहुल तक मतदाताओं की पहुंच नहीं होगी और वे इसको मुद्दा बनाएंगे।

राजग का दांव

भारत धर्म जन सेना (बीडीजेएस) के नेता तुषार वेल्लापल्ली राजग के उम्मीदवार हैं। उन्होंने कालपेट्टा से बुधवार को नामांकन पत्र दाखिल किया। वह राहुल के खिलाफ चुनाव लडऩे की वजह से सुर्खियों में हैं। ऐसी उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके पक्ष में प्रचार करने के लिए यहां आ सकते हैं। भाजपा मोदी के विकास कार्यों को यहां मुद्दा बनाएगी।
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