बिजनेस स्टैंडर्ड - चुनाव आयोग से मंजूरी लेगा रिजर्व बैंक
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, April 22, 2019 06:25 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

चुनाव आयोग से मंजूरी लेगा रिजर्व बैंक

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली April 06, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) बैंकों को नए दिशानिर्देश जारी करने से पहले चुनाव आयोग की मंजूरी लेगा। रिजर्व बैंक की ओर से बैंको को ये दिशानिर्देश इस हफ्ते सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उसके 12 फरवरी के परिपत्र को निरस्त किए जाने के चलते दिए जाएंगे। नया परिपत्र अगले हफ्ते आने की उम्मीद की जा रही है।

एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने कहा, 'भले ही परिपत्र जारी करने का लोकप्रियता हासिल करने या चुनाव से किसी प्रकार से संबंध नहीं है, फिर भी चुनाव आयोग के पास किसी नई योजना की घोषणा को लेकर निर्णय लेने की शक्ति है। औपचारिकता निभाने के लिए रिजर्व बैंक नया परिपत्र जारी करने से पहले चुनाव आयोग की अनुमति लेगा।'

वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक के अधिकारियों ने नए परिपत्र पर अभी चर्चा शुरू की है। इसके अगले क्रम में वित्त मंत्री अरुण जेटली और रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास भी एक दूसरे के साथ इस पर चर्चा करेंगे। जैसा कि पहले खबर आई थी, सरकार रिजर्व बैंक को मामला दर मामला आधार पर कंपनियों को ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) के पास भेजने के लिए अधिकृत करने पर विचार कर रही है।

चुनाव आयोग की आचार संहिता 10 मार्च को प्रभावी हो गई जो 2019 के लोकसभा चुनाव पूरा होने तक प्रभावी रहेगी जिसके चलते नई योजनाओं/परियोजनाओं की घोषणा पर रोक लग गई है, साथ ही चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद से नए राहत पैकेज भी नहीं दिए जा सकते हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'चूंकि नया परिपत्र बैंकों को गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों को आईबीसी में भेजने के विकल्प पर सुझाव दे सकती है, लिहाजा इसे 'राहत' देने के बड़े संदर्भ के रूप में देखा जा सकता है।'

एमसीसी का रिजर्व बैंक के लिए एकमात्र विशिष्ट दिशानिर्देश यह है कि रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति से जुड़े मामलों पर सार्वजनिक रूप से निर्णय लेना जारी रख सकता है। अधिकारियों को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक के नए दिशानिर्देश या परिपत्र को लेकर चुनाव आयोग को कोई आपत्ति नहीं होगी।

जैसा कि पहले बताया गया था केंद्र सरकार का विचार है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से वसूली प्रक्रिया शुरू करने को लेकर रिजर्व बैंक को निर्देश देने के सरकार की शक्ति में कोई कटौती नहीं होगी। 12 फरवरी के परिपत्र पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को हल्का करने के लिए सरकार बैंकिंग नियमन अधिनियम की धारा 35एए लागू करेगी।

यह पूरी तरह से बैंकिंग नियमन अधिनियम के तहत निर्धारित नियमों के तहत होगा और इसे न्यायालय में चुनौती दे पाना मुश्किल होगा। बैंकिंग नियमन अधिनियम की धारा 35एए केंद्र सरकार को यह शक्ति देती है कि वह रिजर्व बैंक को बैंकिंग कंपनियों को दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने के लिए दिशानिर्देश जारी करने के लिए अधिकृत करे। न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन और न्यायमूर्ति विनीत सरन का आदेश काफी हद तक इस तथ्य पर केंद्रित था कि रिजर्व बैंक को कंपिनयों को मामला दर मामला आधार पर दिवालिया संहिता के पास भेजने से पहले सरकार से स्वयं को अधिकृत करने की मांग करनी चाहिए थी जिसका उल्लेख धारा 35एए में की गई है।

हालांकि, 12 फरवरी के परिपत्र के दायरे में केंद्रीय बैंक की ओर से निर्धारित कट ऑफ को छूने वाली कंपनियों के समूहों को लाया गया था। इसके लिए प्रत्येक खाते पर 2,000 करोड़ रुपये का बकाया को आधार बनाया गया था। केंद्रीय बैंक ने कहा था कि यदि कर्ज भुगतान में एक दिन की भी देरी की जाती है तो इसे चूक के तौर पर लिया जाएगा और इसपर बैंकों द्वारा समाधान प्रक्रिया शुरू करनी होगी और जरूरत पडऩे पर इसे ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता के तहत राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी) में भेजा जााए।

12 फरवरी के उस पपित्र की जद में 157 खाते आए जिसमें से प्रत्येक पर कम से कम 2,000 करोड़ रुपये का बकाया था। इस प्रकार कुल बकाया ऋण 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक था। शुक्रवार को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पानगडिय़ा ने अलग से कहा कि रिजर्व बैंक मौजूदा कानून के समान दूसरा परिपत्र लाएगा। उन्होंने कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से आईबीसी में जाने वाले मौजूदा मामलों पर कोई असर नहीं होगा। न ही किसी शक्ति को छीना गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने केवल उस नियम को असंवैधानिक ठहराया है जिसके तहत 180 दिन तक अपने आप चूक करने वाले खाते जिसके लिए कोई समाधान प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है स्वत: ही एनसीएलटी के पास चले जाते थे।'

Keyword: IBC, code, NCLT, Resolution, RBI, Lender, Resolution Scheme, ARC, SC, Supreme Court, Circular,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या पवन हंस की विनिवेश योजना होगी सफल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.