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निर्गम में कमी से बैंकरों की कमाई घटी

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई April 05, 2019

घरेलू निवेश बैंकर औसत बोनस के तौर पर अपने सालाना वेतन का 30 से 50 फीसदी हिस्सा घर ले जा सकते हैं जो पिछले वित्त वर्ष के 100 से 200 फीसदी के मुकाबले काफी कम है। वित्त वर्ष 2019 में खासकर दूसरी छमाही के दौरान इक्विटी पूंजी बाजार (ईसीएम) की गतिविधियां काफी कम रहीं जिससे राजस्व प्रभावित हुआ। साल के दौरान आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) और पात्र संस्थागत निवेश (क्यूआईपी) के जरिये पूंजी बाजार से जुटाई गई रकम भी पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले करीब 80 फीसदी कम रही। जबकि पुनर्खरीद पेशकश के जरिये जुटाई गई रकम में 17 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

एक शीर्ष घरेलू निवेश बैंक (आई-बैंक) के वरिष्ठ बैंकर ने कहा, 'इक्विटी पूंजी बाजार के राजस्व में पिछले साल के मुकाबले 50 से 60 फीसदी की गिरावट आई है और इस साल कुछ चुनिंदा बैंकर ही अधिक बोनस ले पाएंगे।' बोनस संबंधित वर्ष के दौरान होने वाली सौदा गतिविधियों पर निर्भर करता है। आमतौर पर बैंकरों को आईपीओ प्रबंधन के शुल्क के रूप में 2 से 3 फीसदी रकम मिल जाती है जबकि क्यूआईपी के मामले में यह रकम 1.5 से 2 फीसदी के दायरे में होती है। पुनर्खरीद के प्रबंधन के लिए बैंकरों को आमतौर पर 1 से 2 करोड़ रुपये प्रति सौदा मिलते हैं।

प्राथमिक बाजार पर नजर रखने वाली फर्म प्राइम डेटाबेस के प्रबंध निदेश क प्रणव हल्दिया ने कहा, 'पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले वित्त वर्ष 2019 के दौरान निर्गम में उल्लेखनीय गिरावट रही जिससे बोनस एवं अन्य वेरिएबल भुगतान प्रभावित होंगे।' वित्त वर्ष 2018 में द्वितीयक बाजार में तेजी, उल्लेखनीय घरेलू नकदी प्रवाह और निजी इक्विटी कंपनियों में निवेश समेटने की होड़ से आईपीओ को मदद मिली। ऋण बोझ घटाने के लिए नकदी जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से बाजार में कई क्यूआईपी दिखे। वित्त वर्ष 2019 में सौदे का आकार औसतन 1,048 करोड़ रुपये रहा। एचडीएफसी ऐसेट मैनेजमेंट का आईपीओ सबसे बड़ा था जिसका आकार 2,800 करोड़ रुपये का था। बाजार में दस्तक देने वाली 14 में से महज दो कंपनियों में किसी निजी इक्विटी अथवा वेंचर कैपिटल फर्म का निवेश था।

इस प्रकार के निवेशकों द्वारा लाए गए ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) कुल मिलाकर 1,655 करोड़ रुपये का रहा जो आईपीओ रकम के मुकाबले 11 फीसदी है। जबकि प्रवर्तकों द्वारा लाए गए ओएफएस की रकम 9,458 करोड़ रुपये रहा जो आईपीओ रकम के मुकाबले 64 फीसदी है। वित्त वर्ष 2018 में पूंजी बाजार से प्राप्त 80 फीसदी से अधिक रकम आईपीओ के तहत मौजूदा निवेशकों द्वारा शेयर बिक्री से प्राप्त हुई। 

सबसे बड़ा क्यूआईपी डीएलएफ का था जिसके तहत 3,173 करोड़ रुपये जुटाए गए। कुल क्यूआईपी रकम में इसकी हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी रही। हालांकि वित्त वर्ष 2019 के दौरान क्यूआईपी में सर्वाधिक योगदान रहा जबकि रियल्टी का योगदान 42 फीसदी रहा। वित्त वर्ष 2020 के दौरान आईपीओ का बाजार गर्म रहने के आसार हैं क्योंकि 64 कंपनियों को कुल मिलाकर 63,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए नियामकीय मंजूरियां मिल चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इक्विटी पूंजी बाजार में घरेलू बैंकरों की बड़ी हिस्सेदारी दिख रही है जबकि विदेशी कंपनियों का नजरिया चयनात्मक रहेगा।
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