बिजनेस स्टैंडर्ड - इंडियाबुल्स के हाथ लक्ष्मी विलास
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इंडियाबुल्स के हाथ लक्ष्मी विलास

निकहत हेटावकर और गिरीश बाबू / मुंबई/चेन्नई April 05, 2019

चेन्नई के लक्ष्मी विलास बैंक का आवास वित्त कंपनी इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस के साथ विलय होने जा रहा है। यह सौदा शेयरों की अदला-बदली के जरिये होगा, जो बैंकिंग क्षेत्र में एकीकरण के रुझान को दर्शाता है। दोनों कंपनियों के निदेश्क मंडल ने विलय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित विलय भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मंजूरी सहित अन्य मंजूरियों पर निर्भर करेगा। 

बैंक ने स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी में बताया कि लक्ष्मी विलास बैंक के शेयरधारकों को प्रत्येक 100 शेयर के बदले इंडियाबुल्स हाउसिंग के 14 शेयर मिलेंगे। शुक्रवार को बंद भाव के आधार पर इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस लक्ष्मी विलास बैंक के शेयरधारकों को 36 फीसदी प्रीमियम का भुगतान करेगा।

इस सौदे के तहत इंडियाबुल्स हाउसिंग के 8 फीसदी शेयर (दिसंबर 2018 के आंकड़ों के आधार पर) का विनिवेश होगा। यह दूसरा मौका है जब गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी ने किसी बैंक का अधिग्रहण किया है। पिछले साल कैपिटल फस्र्ट ने आईडीएफसी बैंक का अधिग्रहण किया था। इंडियाबुल्स हाउसिंग ने बैंक लाइसेंस के लिए आवेदन किया था लेकिन केंद्र सरकार ने 2014 में केवल दो बैंक लाइसेंस ही जारी किए थे। विलय से इंडियाबुल्स को कम लागत वाले बैंक की जमा का फायदा मिलेगा। इंडियाबुल्स हाउसिंग की पूंजी पर्याप्तता बेहतर रहने से बैंक को अन्य चुनौतियों से उबरने में मदद मिलेगी।

एकीकृत इकाई का नेटवर्थ दिसंबर 2018 के आधार पर 19,472 करोड़ रुपये और लोन बुक 1.23 लाख करोड़ होगी। विलय के बाद बनने वाली इकाई का पूंजी पर्याप्तता 20.6 फीसदी हो सकती है। इंडियाबुल्स हाउसिंग का बाजार पूंजीकरण लक्ष्मी विलास बैंक से 13 गुना अधिक है।

इंडियाबुल्स की उत्तर और पश्चिम के बाजार में अ'छी पैठ है जबकि लक्ष्मी विलास बैंक के साथ विलय के बाद दक्षिण के बाजार के साथ ही देश भर में उसकी पहुंच हो जाएगी। एकीकृत इकाई के प्रबंधन के बारे में इंडियाबुल्स हाउसिंग ने प्रस्ताव किया है कि कंपनी के प्रबंध निदेशक गगन बंगा और लक्ष्मी विलास बैंक के प्रबंध निदेशक पार्थसारथि मुखर्जी संयुक्त प्रबंध निदेशक के तौर पर काम करेंगे।

इंडियाबुल्स समूह के संस्थापक एवं चेयरमैन समीर गहलोत को एकीकृत इकाई का वाइस चेयरमैन बनाया जाएगा। इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस ने आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर एसएस मूंदड़ा के नेतृत्व में पुनर्गठन समिति का गठन किया है जो प्रस्तावित विलय के बारे में जरूरी निर्णय लेगी। मूंदड़ा हाउसिंग फाइनैंस के बोर्ड के स्वतंत्र निदेशक भी हैं। सभी मंजूरियों मिलने के बाद विलय के 12 महीने में पूरा होने की उम्मीद है।   

(साथ में सुब्रत पांडा)

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