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'दोबारा सत्ता में आए तो जारी रखेंगे वित्तीय सूझबूझ'

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली April 04, 2019

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार दूसरी बार सत्ता में आती है तो वित्तीय सूझबूझ से चलने   और कर की दरें कम करने का सिलसिला बनाए रखेगी। 

जेटली ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की सालाना आम बैठक को संबोधित करते हुए कहा, 'वैश्विक धारणाओं के विपरीत हमारा खुद का घरेलू खपत बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए अगर मैं नीतियों के बारे में बात करता हूं, हम कराधान नीतियों की बात करता हूं तो मेरे मन में कम से कम दो मसले बिल्कुल साफ रहते हैं कि हमने बहुत वित्तीय सूझबूझ दिखाई है और हमने कर कम किए हैं। यह जो क्षेत्र ऐसे हैं कि अगर हम सत्ता में बने रहे तो इस राह पर बढ़ते रहेंगे।' 

मौजूदा मध्यावधि राजकोषीय नीति के मुताबिक, जो 2019-20 के अंतरिम बजट का हिस्सा है, 2019-20 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.4 प्रतिशत है और 2020-21 और 2021-22 के लिए 3 प्रतिशत है। उन्होंने कहा, 'अगर हम फिर से सत्ता संभालते हैं तो हम अपना लक्ष्य साफ रखेंगे।'

जेटली ने यह भी संकेत दिए कि सीमेंट, जो अभी 28 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर के दायरे में आता है, पर जल्द ही कर कम किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'जीएसटी के पिछले 20 महीनों के दौरान सीमेंट को छोड़कर खपत की हर चीज पर कर कम किया गया हैऔर इसे 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत और 12 प्रतिशत के कर दायरे में लाया गया है। यह केवल वक्त की बात है कि इस पर भी कर कम कर दिया जाएगा।' 

मंत्री ने कहा कि 5 साल से सरकार ने कर की दर नहीं बढ़ाई है और कुछ मामलों में कर आधार दोगुना हो गया है और कर संग्रह बढ़ा है। यह पूछे जाने पर कि सरकार की सत्ता वापसी हुई तो क्या कदम उठाए जाएंगे, जेटली ने कहा कि दो दिन और इंतजार करें, हमारा घोषणापत्र आते ही आपके सामने कुछ विचार आ जाएंगे, जो उसमें दिए गए हैं। 

वित्त मंत्री ने चुनावी बॉन्ड के आलोचकों को खारिज करते हुआ कहा कि गलत सूचना पर बहस चलाई जा रही है। उन्होंने कहा, 'मुझे दुख होता है कि चुनावी बॉन्ड पर पूरी बहस गलत सूचना पर चलाई जा रही है। पहले की व्यवस्था में यह पता नहीं रहता था कि दानदाता कौन है, मध्यस्थ कौन है, राजनीतिक दल कोकौन लाभ पहुंचा रहा है। यह कुछ भी नहीं पता रहता था। हर स्तर पर पारदर्शिता का अभाव था। तमाम क्षेत्रों में चुनाव आयोग सफल रहा है, लेकिन नकदी पर रोक नहीं लग सकी। चुनावी बॉन्ड तार्किक रूप से पारदर्शी कदम है।'  

वित्त मंत्री ने कहा, 'एकमात्र गैर पारदर्शी बात यह है कि सिर्फ आप जानते हैं कि आपको चुनावी बॉन्ड कौन दे रहा है। अगर आप किसी से इसका खुलासा करने को कहते हैं कि चुनावी बॉन्ड में कौन दान दे रहाहै तो ऐसी स्थिति में नकदी की व्यवस्था फिर वापस आ जाएगी।' बुधवार को सरकार ने उच्चतम न्यायालय में चुनाव आयोग की ओर से चुनावी बॉन्ड जारी करने को लेकर उठाई गई चिंता का विरोध किया और कानून में बदलाव को मार्गदर्शक कदम करार दिया, जिससे चुनावी सुधार होगा और राजनीतिक वित्तपोषण में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित होगी। 

जेटली ने कहा कि भारत की वृद्धि दर 7 से 7.5 प्रतिशत के बीच स्थिर हो गई है और वैश्विक धारणा के असर के बगैर घरेलू खपत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा, 'कोई वैश्विक तेजी या किीस तरह का समर्थन नहीं था, इसके बावजूद हमारी वृद्धि दर 7 से 7.5 प्रतिशत के बीच रही।'

गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने जीडीपी वृद्धि दर का अपना अनुमान चालू वितत्त वर्ष में 20 आधार अंक कम करते हुए 7.2 प्रतिशत कर दिया है। बुधवार को एशियाई विकास बैंक ने भी वित्त वर्ष 20 के लिए पहले के 7.6 प्रतिशत की तुलना में अनुमान घटाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है। 2018-19 में आधिकारिक रूप से अर्थव्यवस्था में 7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो मोदी सरकार के 5 साल के कार्यकाल में सबसे कम वृद्धि दर है।
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