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रीपो दर घटी, बैंकों पर कर्ज सस्ता करने का दबाव

अनूप रॉय / मुंबई 04 04, 2019

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के छह सदस्यों में से चार ने रीपो दर में 25 आधार अंक कटौती के पक्ष में अपना मत दिया जबकि दो सदस्यों ने इसका विरोध किया। रीपो दर में कटौती उम्मीद के अनुरूप रही लेकिन बॉन्ड धारिता के नियमों में फेरबदल से बाजार खुश नहीं दिखा। इसी तरह बैंक भी दर में कटौती का लाभ ग्राहकों को देने के लिए प्रतिबद्घता नहीं जताई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य और बाहरी सदस्य चेतन घाटे ने दर में कटौती के विरोध में मत दिया।

बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा 15 अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरर के बीच कराए गए सर्वेक्षण में रीपो दर में 25 आधार अंक की कटौती की संभावना जताई गई थी। सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश लोगों ने आरबीआई का रुख तटस्थ रहने का अनुमान जताया था। उम्मीद के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है जबकि रीपो रेट को 6 फीसदी कर दिया है जो पहले 6.25 फीसदी था।

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के हाल के फैसले में केंद्रीय बैंक की शक्तियों पर कोई संदेह नहीं जताया गया है बल्कि एक निश्चित तरीके से इनका इस्तेमाल करने को कहा गया है। फंसे कर्ज के खिलाफ लड़ाई में आरबीआई इन शक्तियों का इस्तेमाल जारी रखेगा। दास ने कहा, 'आरबीआई सभी जरूरी कदम उठाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो फंसी  संपत्तियों के त्वरित और कारगर समाधान के लिए संशोधित परिपत्र जारी किया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि आरबीआई नकदी की स्थिति आसान बनाने के लिए प्रतिबद्घ है। एसएलआर समायोजन, बॉन्ड की खरीद और डॉलर की अदलाबदली के जरिये जारी की गई नकदी से बैंक दरों को कम करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। बैंकरों का कहना है कि सीमांत लागत आधारित उधारी दर (एमसीएलआर) व्यवस्था के कारण बाजार दरों में बढ़ोतरी से बैंकों के लिए फंड की लागत बढ़ जाएगी और इस प्रत्यक्ष रूप से उधारी दरों की गणना तय करता है।

ऐसी स्थिति में नीतिगत दरों में कटौती का ग्राहकों को तत्काल फायदा देना आसान नहीं होगा। हालांकि भारतीय स्टेट बैंक ने कैश क्रेडिट और 1 लाख रुपये से अधिक की लिमिट वाले ओवरड्राफ्ट पर ब्याज दर 25 आधार अंक कम करने की घोषणा की है। ये दरें 1 मई लागू होंगी। बैंक ने बचत खाते पर ब्याज दर भी 3.50 फीसदी से घटाकर 3.25 फीसदी कर दी है।  

आरबीआई की मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी हुई जो बैंकों की एमसीएलआर गणना में परिलक्षित होगी और अगर प्रतिफल उच्च स्तर पर बना रहता है तो फिर ग्राहकों को कटौती का फायदा देना मुश्किल हो सकता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई कम से कम एक बार और दरों में कटौती कर सकती है। बैंक ऑफ अमेरिका मैरिल लिंच को उम्मीद है कि एमपीसी जून या अगस्त में फिर से 25 आधार अंकों की कटौती कर सकती है।

क्रेडिट सुइस के मुताबिक नीतिगत दर में कटौती की उम्मीद की जा रही थी लेकिन दो सदस्यों का इसके खिलाफ वोट देना बाजार के लिए नकारात्मक है। साथ ही उसने कहा कि आरबीआई का अपने रुख को लगातार तटस्थ बनाए रखना आश्चर्यजनक है। एजेंसी ने कहा, 'राजकोषीय प्रोत्साहन की कोई गुंजाइश नहीं है। ऐसे में दरों में कटौती पर एमपीसी का सतर्क रुख चिंताजनक है।'

दास का कहा है कि नीतिगत दरों में कटौती से ज्यादा अहम यह है कि इसफा फायदा ग्राहकों को मिले। उन्होंने कहा, 'हम इस बात से वाकिफ हैं कि दरों में कटौती का फायदा समुचित और कारगर ढंग से ग्राहकों को दिया जाना चाहिए। बैंकों ने अपने एमसीएलआर में 10 आधार अंक की मामूली कटौती की है लेकिन इसमें और ज्यादा करने की जरूरत है। अगर इसमें गुंजाइश है तो सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया जाना चाहिए।' 

उद्योग समूह इस बात से खुश नहीं हैं कि बैंक दरों में कटौती का फायदा ग्राहकों को नहीं दे रहे हैं। ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष रवि सहगल ने कहा, 'आरबीआई गवर्नर ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि बैंक कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं दे रहे हैं। अगर आरबीआई बैंकों को ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है तो और कौन कर सकता है।'

बैंकर इस बारे में कोई वादा करने को तैयार नहीं हैं लेकिन उनका कहना है कि दरों में कटौती का फायदा ग्राहकों को दिया जा सकता है। पीएनबी के एमडी और सीईओ तथा इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के चेयरमैन सुनील मेहता ने कहा, 'बैंकों ने दरों में 10 से 12 आधार अंक की कटौती की है। आरबीआई के नीतिगत दरों में कटौती करने और नकदी की स्थिति में सुधार से बैंक दरों में और कटौती करने के बारे में निर्णय लेंगे।'

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