बिजनेस स्टैंडर्ड - कपड़ा कंपनियों के मार्जिन पर दबाव
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कपड़ा कंपनियों के मार्जिन पर दबाव

दिलीप कुमार झा / मुंबई April 02, 2019

सीजन की कमजोर मांग के बाद उत्पादन लागत उपभोक्ताओं पर डालने में असमर्थ रहने के कारण कपास के बढ़ते दामों से कपड़ा और वस्त्र कंपनियों के लाभ मार्जिन को नुकसान हो सकता है। कपड़ा और वस्त्र निर्माण की प्रमुख कच्ची सामग्री - कपास पिछले साल कम उत्पादन की वजह से मार्च में ही छह प्रतिशत तक महंगी हो चुकी है। इस वजह से कपास की बेंचमार्क किस्म के दाम इस महीने की शुरुआत के 11,698 प्रति क्विंटल से बढ़कर 12,373 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कपड़ा मिलों के लिए कम उपलब्धता की वजह से इस प्राकृतिक रेशे के दामों में तेजी जारी रहेगी। सूती धागे की सभी किस्मों के दाम भी मार्च मे 6-7 प्रतिशत तक उछल चुके हैं। उद्योग द्वारा तकनीकी कपड़ों में खास इस्तेमाल के लिए केवल उच्च गुणवत्ता वाली कपास को ही प्रोत्साहित किए जाने से भारतीय उत्पादकों के लिए वस्त्रों और घरों में इस्तेमाल किए जाने वाले चादर-पर्दों के लिए इसका आयात व्यावहारिक विकल्प नहीं रहा है। अमेरिका के कृषि विभाग यूएसडीए का अनुमान है कि 2018-19 में भारत का कपास उत्पादन पिछले वर्ष के 63 लाख टन की तुलना में 59 लाख टन रहेगा।
 
सेंचुरी टेक्सटाइल ऐंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष आर के डालमिया ने कहा कि हालांकि कपास और धागे दोनों की ही कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान तेजी आई है लेकिन कपड़े की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं जिससे निश्चित रूप से कपड़ा कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ेगा। इस साल भारत में कपास उत्पादन पिछले साल की तुलना में कम है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध कपास की गुणवत्ता में भी गिरावट आई है जिससे हमारे मार्जिन पर बहुत दबाव पड़ा है।  क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) के अध्यक्ष राहुल मेहता के अनुसार कपड़ा उद्योग 2-3 प्रतिशत के काफी कम मार्जिन पर परिचालन कर रहा है। अन्य लागत के साथ-साथ कच्चे माल के दामों में 6-7 प्रतिशत की बढ़ोतरी से लाभ मार्जिन पर दबाव बन रहा है। 
 
विशेषज्ञों का मानना ​​है कि सीजन की कपड़ा मांग इस साल नरम रही है। औसत मध्य वर्ग में व्यय योग्य आय की कम उपलब्धता के साथ-साथ मौजूदा ग्रामीण कृषिगत दबाव ने कपड़े की मांग को कम कर दिया है। सीएमएआई द्वारा एकत्रित किए गए आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर 18 की तिमाही में संचयी बिक्री में वृद्धि हुई है। लगभग 48 प्रतिशत ब्रांडों ने इस तिमाही की बिक्री में वृद्धि दर्ज की है। मोंटे कार्लो के महाप्रबंधक मयंक जैन बताते हैं कि बिक्री इसलिए बढ़ी क्योंकि त्योहारी सीजन था और प्रतिक्रिया अच्छी थी। बाजार भी बढ़ रहा है और मांग भी बढ़ी है। इससे हमें अपनी बिक्री बढ़ाने में मदद मिली है।
 
इस बीच चीन की धागे की मांग मजबूत बनी हुई है क्योंकि स्टॉक खत्म करने का असर कम हो गया है। हालांकि अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता को लेकर अनिश्चितता के मद्देनजर कंपनियों ने अभी दोबारा स्टॉक करना शुरू नहीं किया है। अलबत्ता कपड़ा कंपनियां दिसंबर तिमाही में अपनी बिक्री में वृद्धि दर्ज करने जा रही हैं। आईआईएफएल सिक्योरिटीज लिमिटेड के एक विश्लेषक अवी मेहता ने वर्धमान टेक्सटाइल से संबंधित हालिया रिपोर्ट में कहा कि चीन के स्टॉक खत्म करने के दबाव में कमी के साथ-साथ धागे की मांग में सुधार ने धागा उद्योग को प्रोत्साहित किया है। धागे के दायरे में और सुधार के लिए चीन की मिलों को फिर से शुरू करने की जरूरत है। इसके अलावा मांग में मजबूती से कपड़ा क्षेत्र में तेजी आएगी।
Keyword: textiles, cotton, cloths,,
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