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'नई सरकार लागू करे संचार नीति'

मेघा मनचंदा / नई दिल्ली April 02, 2019

दूरसंचार कंपनियों के संगठन सेलुलर ऑपरेटर एसोसिएशन आफ इंडिया  (सीओएआई) ने नई सरकार से राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति 2018 लागू करने की मांग की है। इस नीति को मंत्रिमंडल ने पिछले साल सितंबर महीने में मंजूरी दी थी, जिसका मकसद 2022 तक इस क्षेत्र में 100 अरब डॉलर निवेश आकर्षित करना और 40 लाख नौकरियों का सृजन करना है।  इसमें शुल्कों, जैसे कर्ज में डूबे संचार क्षेत्र के पुनरुज्जीवन के लिए स्पेक्ट्रम शुल्क को तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित नई संचार नीति में सबके लिए 50 मेगाबाइट प्रति सेकंड स्पीड, 5जी सेवाएं देने की बात कही गई है।
 
सीओएआई ने कहा कि यह क्षेत्र बहुत ज्यादा कर्ज में डूबा हुआ है, ऐसे में राजस्व पर लगातार दबाव है। ज्यादातर कारोबारियों की ब्याज के पहले कमाई, कर, हानि और ऋणपरिशोधन यानी ईबीआईटीडीए इतना नहीं है कि ब्याज का खर्च उठाया जा सके। सीओएआई के महानिदेशक राजन एस मैथ्यू ने कहा, 'समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) की परिभाषा की समीक्षा की जानी चाहिए इसमें सिर्फ लाइसेंंस वाली गतिविधियों से राजस्व शामिल किया जाना चाहिए।  दूरसंचार विभाग को एजीआर के निर्धारण के मसले पर नियामक की सिफारिशों को स्वीकार करना चाहिए।' 
 
सीओएआई ने कहा कि ब्याज से आमदनी, लाभांश, नियत संपत्ति की बिक्री से होने वाले पूंजीगत लाभ, विदेशी मुद्रा में उतार चढ़ाव से लाभ, किराये से आमदनी, बीमा दावों और वितरकों के मुनाफे को  लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपभोग शुल्क की गणना के मकसद के लिए टेलीकॉम ऑपरेटर के राजस्व में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। संगठन ने कहा है कि हैंडसेट की बिक्री से मिलने वाले राजस्व और अन्य सब्सक्राइबर टर्मिनलों जैसे राउटर को भी एजीआर में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।   उन्होंने कहा, 'एक बार अगर आप एजीआर की परिभाषा के मसले को सुलझा लेते हैं तो इसका व्यापक लाभ होगा। यह प्रमुख मसला है, जिस पर सरकार को विचार करना चाहिए।' 
Keyword: telecom, trai, policy, COAI,,
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