बिजनेस स?टैंडर?ड - नए मुकाम को छूने वाले कारोबारी दिग्गजों का सम्मान
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नए मुकाम को छूने वाले कारोबारी दिग्गजों का सम्मान

बीएस संवाददाता / नई दिल्ली March 31, 2019

बिज़नेस स्टैंडर्ड की तरफ से कॉर्पोरेट उत्कृष्टता के क्षेत्र में दिए जाने वाले वार्षिक पुरस्कारों का शुक्रवार शाम को हुआ वितरण कार्यक्रम वित्त वर्ष 2018-19 के आखिर की एक यादगार शाम साबित हुआ जिसमें बेहतरीन नतीजे देने वाली कंपनियों और कारोबारी हस्तियों को उनके समर्पण एवं शानदार प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। वित्त एवं कंपनी मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने नई दिल्ली के पंचसितारा होटल आईटीसी मौर्या में आयोजित पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में 12 श्रेणियों में चुने गए विजेताओं को सम्मानित किया। उद्योग एवं आर्थिक जगत की शीर्ष हस्तियों के अलावा कई वरिष्ठ अफ सरशाह भी इस अवसर पर मौजूद थे।
 
पुरस्कार समारोह में किसी जोशीली शाम के सभी पहलू मौजूद थे। इसमें आर्थिक जगत के नायकों की मौजूदगी के अलावा उनके संघर्ष को बयां करने वाले खट्टे-मीठे अनुभव, शेरो-शायरी और फिल्मों के कई मशहूर संवाद भी देखने-सुनने को मिले। जेटली ने कहा, 'बिज़नेस स्टैंडर्ड के सालाना पुरस्कार समारोह में मौजूद होना खुशी की बात है। यह समाचारपत्र सोचने-समझने वाले लोगों के लिए है और इसमें प्रकाशित होने वाले लेखों की गंभीरता को महसूस करने में नीति-निर्माताओं के लिए भी उपयोगी है। तीसरी बार मैं इस सालाना कार्यक्रम में शामिल हुआ हूं लेकिन पिछले दो मौकों की तुलना में यह थोड़ा अलग है।'
 
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में आम चुनाव का दौर शुरू होने के बीच जेटली ने भारत की बदलती सामाजिक-आर्थिक संरचना पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि भारत अपने सामने आने वाली तमाम चुनौतियों पर जीत हासिल करने के लिए तैयार है। इस समारोह की खास बात यह रही कि तमाम श्रेणियों में पुरस्कार जीतने वाले दिग्गजों ने अपने-अपने क्षेत्र में कामयाबी के झंडे गाडऩे के साथ ही एक समान एवं समावेशी समाज के निर्माण में भी योगदान दिया है। कॉर्पोरेट उत्कृष्टता श्रेणी के पुरस्कारों के लिए गठित निर्णायक मंडल के प्रमुख एवं आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमारमंगलम बिड़ला ने कहा, 'निर्णायक मंडल ने विजेताओं के चुनाव में अधिक वक्त नहीं लगाया लेकिन सूची में कई अच्छी कंपनियों की मौजूदगी को देखते हुए यह एक मुश्किल फैसला था। बिज़नेस स्टैंडर्ड के मुहैया कराए गए आंकड़ों से सभी चयनित कंपनियों के कुछ वर्षों के शानदार वित्तीय प्रदर्शन के बारे में जानकारी मिली।'
 
निर्णायक मंडल ने हाल ही में अशोक लीलैंड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) पद से हटने का ऐलान करने वाले विनोद के दसारी को 'सीईओ ऑफ द इयर' पुरस्कार के लिए चुना है। बेहद मुश्किल वक्त में कंपनी को आगे बढ़ाने और निर्णायक नेतृत्व देने के साथ ही दसारी ने कई नई श्रेणियों में उत्पाद भी पेश किए।  दसारी ने यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलने पर लीलैंड से जुड़े अनुभव को बड़े दिलचस्प अंदाज में याद किया। दसारी ने कहा, 'दीवार फिल्म के मशहूर संवाद की तरह मुझसे एक पत्रकार ने पूछा था कि उनके पास नया प्लांट है, विश्व स्तर की तकनीक है, बहुत पैसा है, युवा श्रमशक्ति है, आपके पास क्या है? मैंने नाटकीय अंदाज में थोड़ा रुककर शशि कपूर की तरह कहा था कि मेरे पास मेरी टीम है।'
 
वैश्विक एवं घरेलू कंपनियों से मिल रही तगड़ी चुनौतियों के बाद भी शीर्ष पर मौजूद हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) को 'कंपनी ऑफ द इयर' चुना गया। ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन कंज्यूमर हेल्थकेयर का गत दिसंबर में 31,700 करोड़ रुपये में अधिग्रहण करने वाली एचयूएल को आगे और मजबूती मिलने की संभावना है। कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजीव मेहता ने कहा, 'हमारी पूंजी का बड़ा हिस्सा भले ही विदेश से आता है लेकिन हम राष्ट्रीय एजेंडा से अपना तालमेल बिठाते हैं।'  बैंकिंग क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए इंडसइंड बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ रोमेश सोबती को 'बैंकर ऑफ द इयर' से सम्मानित किया गया। सोबती ने पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र के समक्ष बढ़ी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा 'बिना सोचे-समझे कर्ज देने के आरोप हम पर लगते रहे हैं। इसके बावजूद हम इसलिए टिके रहे कि हमारे लोन बुक में एक चौंकाने वाला पहलू मौजूद था। हमारे कर्ज वितरण का करीब 45 फीसदी हिस्सा आजीविका संबंधी गतिविधियों के वित्तपोषण से जुड़ा था।' 
 
बैंकिंग ज्यूरी के प्रमुख एवं आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर एस एस मुंद्रा ने इंडसइंड बैंक के स्थिर प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि इस बैंक ने अपने अपनी स्थिति दुरूस्त रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। मैकिंजी में सीनियर पार्टनर और निर्णायक मंडल में सबसे अधिक समय तक रहे नोशीर काका ने विजेताओं के चयन की लंबी प्रक्रिया के बारे में बताया। उन्होंने कहा, 'दस्तावेजों के प्रति सलाहकार कंपनियों के प्यार को तो आप जानते हैं। इस मामले में कोई अखबार और उसका शोध ही हमें पछाड़ सकता है। आंकड़ों के 60 पन्ने और तथ्यों के 200 पृष्ठ। इस निर्णायक मंडल के सामने आपको आंकड़ों और तथ्यों में पीछे नहीं रह सकते हैं।' उन्होंने कहा कि इतने वर्षों में उन्हें भी काफी कुछ सीखने को मिला है। काका ने दर्शकों के बीच अपने इस अनुभव को साझा किया कि कैसे उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार के विजेता और गोदरेज समूह के अध्यक्ष आदि गोदरेज से करियर के अहम पड़ाव पर नेतृत्व का सबसे अहम सबक सीखने को मिला। उन्होंने कहा, 'मैकिंजी इंडिया का प्रमुख बनने के बाद मुझे गोदरेज से मिलने की सलाह दी गई। उन्होंने मुझसे मेरी लंबाई पूछी और कहा कि याद रखिए नेतृत्व का एक काम यह भी है कि जब भी आप कमरे में आएं तो हर किसी को यह महसूस कराएं कि वे एक इंच ज्यादा लंबे हैं।'
 
निर्णायक मंडल में इस बात पर चर्चा हुई कि जब नैतिकता, कॉरपोरेट गवर्नेंस की सर्वश्रेष्ठ व्यवस्थाओं और पर्यावरण संरक्षण की बात आती है तो गोदरेज देश की सबसे अधिकृत आवाज हैं। देश में कॉरपोरेट गवर्नेंस पर आदि गोदरेज के गहरे प्रभाव को इस बात से समझा जा सकता है कि 121 साल पुराने गोदरेज समूह में आधे से अधिक कर्मचारी महिलाएं हैं। गोदरेज ने कहा, 'मैं यह सम्मान देश में अपने करीब 75 करोड़ उपभोक्ताओं और दुनियाभर में हमारे उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले 1.5 अरब लोगों को समर्पित करता हूं।'समारोह में सभी पुरस्कार विजेताओं का उत्साह चरम पर था। जेटली सोशल आंत्रप्रेन्यर ऑफ इ इयर अवार्ड की संयुक्त विजेता गीता धर्मराजन की बात सुनकर मुस्करा दिए। लेखक, शिक्षाविद और कथा की संस्थापक गीता मंच पर विजेता ट्रॉफी हाथ में पकड़े बेहद रोमांचित थीं। उन्होंने कहा, 'यह पुरस्कार पाकर मैं बहुत खुश हूं।' गरीब बच्चों का दु:ख बयां करते हुए उनकी आंखें डबडबा गई थीं। इनमें से अधिकांश बच्चे पढ़ लिख नहीं पाते थे और इस वजह से उन्होंने स्कूल छोड़ दिया था। सोशल आंत्रप्रेन्यर ऑफ द इयर के संयुक्त विजेता और सृजन  के सह संस्थापक वेद आर्य ने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों आईआईटी-आईआईएम से पढ़ाई की है। उन्होंने समाज सेवा करने के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में आकर्षक नौकरी छोड़ दी थी। उन्होंने दूसरे लोगों से भी इस क्षेत्र में आगे आने का आग्रह करते हुए कहा, 'अगर हर आईआईटी-आईआईएम का हर उद्यमी एक करोड़ रुपये का दान दे तो हम सामाजिक क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला सकते हैं।'सोशल एक्सीलेंस पुरस्कारों के विजेताओं का चयन टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के अध्यक्ष एस रामदुरई की अगुआई वाले निदेशक मंडल ने किया।
 
दिल्ली की कंपनी जमना ऑटो इंडस्ट्रीज को शानदार वित्तीय प्रदर्शन के लिए स्टार एसएमई ऑफ द इयर अवॉर्ड दिया गया। पिछले तीन साल में कंपनी के बाजार मूल्य में 30 फीसदी से अधिक की सालाना बढ़ोतरी हुई है। काले रंग का बंदगला और लाल पगड़ी पहने जमना ऑटो के उपाध्यक्ष रणदीप सिंह जौहर ने पुरस्कार ग्रहण करते हुए कहा, 'हमारे सभी कर्मचारी उद्यमी की तरह काम करते हैं। मैं अपने एक संयंत्र में गया था। वहां मुझे पता चला कि हमारे 75 फीसदी कर्मचारी 25 साल से काम कर रहे हैं जब संयंत्र चालू हुआ था। यही हमारी ताकत है।' स्टार्ट अप ऑफ द इयर अवार्ड स्विगी को दिया गया। कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी विवेक सुंदर ने कहा, '24 घंटे में एक मिनट भी ऐसा नहीं है जब भारतीय खाने का ऑर्डर नहीं देते हैं। मैं यह पुरस्कार फूड डिलीवरी करने वालों और अपने उपभोक्ताओं को समर्पित करता हूं।' हनीवेल ऑटोमेशन इंडिया को स्टार एमएनसी ऑफ द इयर के पुरस्कार से नवाजा गया। कंपनी के प्रबंध निदेशक आशीष गायकवाड़ ने कहा कि देश की सबसे अधिक सर्वाधिक संभावनाओं वाली इंजीनियरिंग कंपनियों में से एक इस कंपनी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आना अभी बाकी है। पीरामल एंटरप्राइजेज को आंंध्र प्रदेश की अराकू घाटी में आसरा ट्राइबल हेल्थ प्रोग्राम के जरिये मृत्यु दर में 30 फीसदी और शिशु मृत्यु दर में 20 फीसदी कमी लाने के लिए सोशियली अवेयर कॉरपोरेट ऑफ द इयर अवॉर्ड प्रदान किया गया।
 
सोशल एंटरप्राइज (एनजीओ) ऑफ द इयर अवॉर्ड नाज फाउंडेशन (इंडिया) ट्रस्ट को दिया गया। यह संस्था बच्चों और एचआईवी/एड्स से ग्रसित लोगों की देखभाल करती है और एलजीबीटीक्यू समुदाय के लिए काम करती है। रामदुरई ने कहा, 'यह संस्था देश में लगातार प्रासंगिक काम कर रही है। हमें लगा कि इस संस्था को यह सम्मान मिलना चाहिए।' बिज़नेस स्टैंडर्ड ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय काम को भी मान्यता दी और पावर ग्रिड को मजबूत वित्तीय स्थिति और चुनौती का कारगर ढंग से मुकाबला करने के लिए स्टार पीएसयू ऑफ द इयर चुना गया। पावर ग्रिड के कार्यवाहक सीएमडी रवि पी सिंह ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए कविता का सहारा लिया। उन्होंने कहा, 'परिंदों को मिलेगी मंजिल एक दिन, ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं, और वही लोग रहते हैं खामोश अक्सर, जमाने में जिनके हुनर बोलते हैं।'
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