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अर्थशास्त्रियों को रिजर्व बैंक से दरों में कटौती की आस

अनूप रॉय / मुंबई March 31, 2019

अर्थशास्त्रियों व बैंक के आर्थिक प्रबंधकों को भरोसा है कि भारतीय रिजर्व बैंक की 6 सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति आगामी 4 अप्रैल को होने वाली समीक्षा बैठक में नीतिगत रीपो दरोंं में कम से कम 25 आधार अंक की कटोती करेगी।  बिजनेस स्टैंडर्ड रायशुमारी में शामिल सभी 15 हिस्सेदारों, जिसमेंं 3 प्रमुख बैंक प्रबंधक और 12 वरिष्ठ अर्थशास्त्री हैं, ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कम से कम 25 आधार अंक की कटौती होगी। इनमें से कुछ ने यह भी उम्मीद जताई कि 50 आधार अंक की कटौती हो सकती है, यहां तक कि नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर( में भी कटौती हो सकती है, जिसे कि वृद्धि को गति मिल सके। हालांकि बड़ी मात्रा में सरकारी उधारी का मतलब यह है कि नकदी की स्थिति बेहतर रहेगी। महंगाई अब चिंता का विषय नहींं है,   रायशुमारी में हिस्सा लेने वालों ने यह निष्क र्ष निकाला है, हालांकि वृद्धि की रफ्तार कम होने से निश्चित रूप से सावधानी बरते जाने की जरूरत है।
 
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर करीब 7 प्रतिशत रहने या चालू वित्त वर्ष में मामूली कम रहने की उम्मीद है। रोजगार सृजन भी कम हुआ है, जिस पर रिजर्व बैंक निश्चित रूप से विचार करना है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) जनवरी में महज 1.7 प्रतिशत बढ़ा है, जो एक साल पहले के 7.5 प्रतिशत की तुलना में बहुत कम है।  उपभोक्ता मूल्य आधारित सूचकांक (सीपीआई), जो महंगाई की स्थिति को दिखाता है, रिजर्व बैंक के मध्यावधि लक्ष्य 4 प्रतिशत से बहुत नीचे रहा है। इस तरह से केंद्रीय बैंक द्वारा दर में कटौती का आधार बनता है। केंद्रीय बैंक द्वारा ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) जारी रखने के आश्वासन, जिसके तहत वह द्वितीयक बाजार से बॉन्ड खरीदता है, संभवत: निश्चित है। इसके अलावा बैंक पिछली कटौती का फायदा ग्राहकों को नहीं दे रहे हैं और इसके लाभ दिए जाने की भी उम्मीद है। 
 
एलऐंडटी फाइनैंस की मुख्य अर्थशास्त्री रूपा रेगे नित्सुरे ने कहा, 'मैं उम्मीद करती हूं कि 4 अप्रैल को रिजर्व बैंक रीपो रेट में 50 आधार अंक की कटौती कर सकता है, जिससे नीतिगत सरलता के संकेत दिए जा सकें। इसका असर दिखना जरूरी है।'  उन्होंने कहा, 'इस बार 25 आधार अंक की कटौती की भी संभावना है। चुनाव के बाद जो भी सरकार आएगी, शुरुआती वर्षों में राजकोषीय बुद्धिमत्ताका इस्तेमाल करेगी। अल नीनो को लेकर अनिश्चितता, ईरान के कच्चे तेल पर छूट की अवधि बीतने और चुनाव आदि की वजह से रिजर्व बैंक पर वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में दबाव रहेगा।' उन्होंने कहा कि सकल मौद्रिक मांग भी सुस्त रही है जैसा कि एम3 (ब्रॉड मनी) और जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) अनुपात से पता चलता है, जो घटकर 80 प्रतिशत से नीचे आ गया है। दरों में ज्यादा कटौती का अनुमान लगाने में सिर्फ वही नहीं हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष के मुताबिक 50 आधार अंक की कटौती की संभावना है, लेकिन 25 आधार अंक की कटौती की ज्यादा संभावना है। इसमें समावेशी रुख अपनाया जा सकता है। यह वृद्धि की वजह से है।  घोष ने कहा, 'इस समय हम अर्ध अतुल्यकालिक वृद्धि चक्र से गुजर रहे हैं। अगली दो तिमाही तक भारत की वृद्धि दर जहां थमी रह सकती है, अमेरिका में 2020 में सुस्ती आ सकती है। इससे मौद्रिक नीति समर्थक की जरूरत होगी।'
 
अन्य अर्थशास्त्रियों की भी कुछ इसी तरह की राय है।  इंडिया रेटिंग्स ऐंंड रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर सौम्यजीत नियोगी ने कहा, 'यह एक असामान्य स्थिति है जब महंगाई दर की स्थिति तुलनात्मक रूप से साफ है, लेकिन वृद्धि के आकलन को लेकर अलग स्थिति है। इस तरह से 25 आधार अंक की कटौती सामान्य है, क्योंकि बेहतर नकदी होने से परिणाम बेहतर आएंगे।'  केयर रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'आर्थिक स्थिति में जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है, ऐसे में अगर दरों में कटौती होती भी है तो बदलाव को लेकर कोई निश्चितता नहीं है।' 
 
इंडसइंड बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री गौरव कपूर का कहना है कि दरों में कटौती के साथ सीआरआर में 50 आधार अंक कटौती का मामला बनता है, क्योंकि अब बैंकों का लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (एलसीआर) 100 प्रतिशत कर दिया गया है।  बहरहाल बॉन्ड बाजार दरों में दो कटौती की उम्मीद कर रहा है। बैंक आफ अमेरिका मेरिल लिंच के कंट्री ट्रेजरार जयेश मेहता ने कहा, 'ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप (ओआईएस) का मूल्य निर्धारण न सिर्फ 4 अप्रैल की दर में कटौती से प्रभावित होगा, बल्कि आने वाले महीनों में भी कटौती की उम्मीद कर रहा है।' 
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