बिजनेस स्टैंडर्ड - अक्षय ऊर्जा में लक्ष्य के पीछे चल रहा काम
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अक्षय ऊर्जा में लक्ष्य के पीछे चल रहा काम

श्रेया जय / नई दिल्ली March 31, 2019

साल 2020 तक 1.75 लाख मेगावॉट की अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को पूरा करने के लक्ष्य को हासिल करने की कवायद में केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों ने कुल 30,549 मेगावॉट के लिए निविदाएं जारी की है। इसमें केवल 4,000 मेगावॉट पवन ऊर्जा की परियोजना और 1,800 मेगावॉट हाइब्रिड (सौर व पवन) परियोजना है। शेष 24,749 मेगावॉट केवल सौर ऊर्जा की परियोजनाएं हैं। इन परियोजनाओं के लिए बोली अगले तीन महीनों में मंगाए जाने की उम्मीद है। यदि यह समय पर पूरा हो जाता है तो ये परियोजनाएं मार्च 2020 तक शुरू हो सकती हैं।
 
1.75 लाख मेगावॉट के लिए पहले समय सीमा 2022 रखी गई थी, लेकिन एक उत्साहित सरकार ने कहा कि वह लक्ष्य को 2020 तक पूरा कर लेगी और 2022 तक 2 लाख मेगावॉट को पार कर जाएगी। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) की नोडल एजेंसी भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) ने 19 निविदा नोटिस जारी किए हैं। इसमें लद्दाख क्षेत्र में 7,500 मेगावॉट की भारी भरकम सौर परियोजना, 3,000 मेगावॉट की सौर उत्पादन तथा बिजली संयंत्र और झारखंड में प्रस्तावित सौर परियोजना शामिल है।  जारी निविदाओं में आंध्र प्रदेश को पहले ही अपने 600 मेगावॉट की सौर व पवन हाइब्रिड बिजली परियोजना के लिए तकरीबन एक दर्जन कंपनियों से अभिरुचि पत्र मिल चुका है। 
 
ग्रीनको, अदाणी, सुजलॉन, गमेसा, रिन्यू पॉवर, हीरा फ्यूचर एनर्जीज, सेम्बकॉर्प जैसी कुछ कंपनियां हैं जिन्होंने पिछले महीने हुए बोली से पहले बुलाई गई बैठक में शुरुआती रुचि दिखाई है। 3,000 मेगावॉट की सौर उत्पादन से जुड़ी सौर परियोजना के लिए बोली जमा कराने की तिथि 18 मार्च, 2019 थी जिसे अब बढ़ाकर 4 अप्रैल कर दिया गया है। छह बार समय सीमा को बढ़ाए जाने के बाद भी पिछले वर्ष इस निविदा को कोई सफलता नहीं मिली थी और अंतत: इसे बंद करना पड़ा था। अज्यूर पावर ऐंड वारी एनर्जीज की ओर से केवल एक संयुक्त बोली आई थी जिसे आगे चलकर निरस्त कर दिया गया था।   जहां सरकार इतने बड़े पैमाने पर परियोजना की घोषणा से काफी उत्साहित है वहीं उद्योग इसको लेकर सावधानी बरत रहा है क्योंकि पिछली परियोजनाओं में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। सौर परियोजना पर 5 फीसदी जीएसटी लगाने और आयातित सौर पैनल पर शुल्क लगाए जाने से लागत में वृद्घि हुई है। सौर ऊर्जा में 2.44 रुपये प्रति यूनिट और पवन ऊर्जा में 2.48 रुपये प्रति यूनिट की रिकॉर्ड कम बोली पिछले दो साल से नहीं दोहराई गई है। दोनों ही ऊर्जा में शुल्क फिलहाल 2.65-2.8 रुपये प्रति यूनिट के आसपास बना हुआ है। 
 
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा, 'विभिन्न नीतिगत मुद्ïदों पर स्पष्टïता की कमी और एकतरफा बोली निरस्त होने से डेवलपरों के रुझान पर नकारात्मक असर हुआ है जो कि सरकार की सकारात्मक नीतिगत रवैये के उलट है।' पिछले वर्ष अगस्त में एमएनआरई ने सॉफ्टबैंक एनर्जी की ओर से आई बोली को उस पर सांठगांठ का आरोप लगाकर निरस्त कर दिया था। साथ ही यह भी बताया गया था कि सॉफ्टबैंक 2.77 रुपये प्रति यूनिट की बोली लगाई थी जो कि बहुत अधिक था। 
 
डेवलपरों की दिलचस्पी न होने और उच्च लागत के चलते शुल्क में इजाफा होने से विभिन्न परियोजनाओं को भी निरस्त कर दिया गया था। क्रिसिल का अनुमान है कि मार्च-दिसंबर 2018 के बीच करीब 4,700 मेगावॉट की परियोजनाएं निरस्त की गईं। क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'एक साल से अधिक समय तक जीएसटी पर स्पष्टïता नहीं रही और इसका अंत कराधान में उद्योग की उम्मीद से अधिक की बढ़ोतरी के साथ हुई। इसी तरह से आयात कर लगने से दोहरी मार पड़ी जिससे सौर ऊर्जा परियोजनाओं की लागत पर असर हुआ और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र में कोई महत्त्वपूर्ण खरीदारी नहीं हो पाई। यह संकट नीलामी के बाद बोली के निरस्त होने से और बढ़ गया क्योंकि राज्य के उपक्रम/एसईसीआई ने शुल्क को उम्मीद से काफी अधिक पाया था।'    
 
सौर ऊर्जा के लिए जीएसटी दर की घोषणा होने के एक साल बाद केंद्र सरकार ने दिसंबर 2018 में स्पष्टï किया कि परियोजना के सकल मूल्य का 70 फीसदी पर 5 फीसदी जीएसटी दर लगेगा।  जहां सौर पैनल को 5 फीसदी कर दायरे में रखा गया गया था, उद्योग ने यह कहते हुए इस आपत्ति जताई थी कि धातु, इलेक्ट्रिकल सामान जैसे अन्य उपकरणों को अलग अलग और उच्च कर दायरे में रखा गया है जिससे बिजली परियोजनाओं की लागत बढ़ेगी। लागत बढते ही परियोजना डेवलपर के लिए रकम की व्यवस्था करना मुश्किल काम हो गया है। मौजूदा बोली व्यवस्था में कम से कम 1,000 करोड़ रुपये के निवेश रकम की जरूरत है।
Keyword: power, electric, solar,,
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