बिजनेस स्टैंडर्ड - 'आईबीसी ने कम समय में किए समाधान'
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, April 26, 2019 12:03 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

'आईबीसी ने कम समय में किए समाधान'

आशिष आर्यन और वीणा मणि / नई दिल्ली March 31, 2019

भारतीय ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवाला बोर्ड (आईबीबीआई) के चेयरमैन एमएस साहू ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) के तहत कर्ज के समाधान की पूरी प्रक्रिया में करीब 300 दिन लगे, जबकि इसकी तुलना में औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्गठन बोर्ड  (बीआईएफआर) की प्रक्रिया के तहत 5 से 8 साल का वक्त लगता है।  ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवाला संहिता (आईबीसी) और इसके असर का बचाव करते हुए नियामक बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि आईबीसी के असर को समझने के लिए इसमें लगने वाले वक्त और खर्च पर ध्यान देना चाहिए। साहू ने कहा, 'पहले के दौर से तुलना कने के लिए आईबीसी प्रक्रिया पर ध्यान देना चाहिए। अगर आप समाधान प्रक्रिया की लागत देखें तो यह वसूली गई राशि का 0.5 प्रतिशत होता है, जबकि बीआईएफआर में यह लागत 9 प्रतिशत थी। वहीं आईबीसी के तहत लगने वाले वक्त को देखें तो औसतन मामले के समाधान में 300 दिन लगे हैं।' 
 
आईबीबीआई द्वारा राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीली न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में दाखिल शपथपत्र में संख्या भी दी गई है। एस्सार स्टील इंडिया लिमिटेड की चल सीआरआईपी की सुनवाई के दौरान अपीली न्यायाधिकरण ने आईबीबीआई से कहा कि वह विभिन्न कंपनियों के ऑपरेशन और फाइनैंशियल कर्जदाताओं के बीच धन के औसत वितरण का ब्योरा भी दे जिनका सफलतापूर्वक समाधान आईबीसी के तहत हुआ है। अपने शपथपत्र में आईबीबीआई ने कहा है कि सीआईआरपी के तहत 88 कंपनियों के मामले सफलतापूर्वक चल रहे हैं, जिनमें वित्तीय कर्जदाताओं को करीब 48.24 प्रतिशत मिले हैं जबकि परिचालन वाले कर्जदाताओं को उनके दावे का करीब 48.41 प्रतिशत मिला है। एनसीएलएटी में पेश वकील ने कहा कि यह कर्जदाताओं की समिति की वाणिज्यिक स्वतंत्रता होती है कि वे फैसला करें कि किसे कितना लिमना है क्योंकि आईबीबीआई इसमें हस्तक्षेप नहीं करता। 
 
उन्होंंने कहा कि सीआईआरपी के तहत कंपनियों के बड़ी संख्या में कंपनियां हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा दिवाला में जाने के पहले ही कर्जदाता के कर्ज के समाधान का विकल्प चुना।  साहू ने कहा, '88 मामलों का समाधान किया गया, 70-75 मामलों को अधिनियम की धारा 12 (ए) के तहत वापस लिया गया। हजारों मामले सुनवाई के पहले वापस ले लिए गए।' वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि आईबीसी से कारोबार में नैतिक अनुशासन आया है। 
Keyword: IBC, code, IBBI, NCLT, RBI,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या मारुति के नतीजे वाहन उद्योग के लिए खतरे का संकेत हैं?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.