बिजनेस स्टैंडर्ड - बासमती निर्यात से बढ़ रही कमाई
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बासमती निर्यात से बढ़ रही कमाई

वीरेंद्र सिंह रावत / लखनऊ March 31, 2019

इस सीजन में बासमती निर्यात 30,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। बासमती निर्यातकों ने भी अपनी खरीद लागत की तुलना में बढिय़ा कमाई की है।बासमती निर्यात का आकार काफी व्यापक है और पूसा 1121 की सबसे ज्यादा निर्यात की जाने वाली किस्म ने चालू 2018-19 सीजन के दौरान 35,000-38,000 रुपये प्रति टन की औसत खरीद कीमत दर्ज की है जो 2017-28 के 33,000-35,000 रुपये प्रति टन की तुलना में लगभग 8.5 प्रतिशत की वृद्घि है।  बासमती निर्यात पर मार्जिन लगभग 14 प्रतिशत तक बढ़कर अप्रैल-जनवरी 2018-2019 के दौरान 74,000 रुपये प्रति टन पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान 65,000 रुपये प्रति टन पर था। वृद्घि की रफ्तार बरकरार रखते हुए भारत चालू वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों के दौरान लगभग 4.10 अरब डॉलर मूल्य के बासमती चावल का निर्यात दर्ज कर चुका है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में किए गए 3.68 अरब डॉलर के निर्यात की तुलना में 11.41 प्रतिशत ज्यादा है।
 
रेटिंग एजेंसी इक्रा का कहना है कि हालांकि निर्यात बिक्री दो प्रतिशत पर सिर्फ मामूली अधिक रही, लेकिन औसत निर्यात प्राप्ति 14 प्रतिशत के साथ काफी मजबूत रही जिसके परिणामस्वरूप अच्छी वृद्घि दर्ज की गई। एजेंसी ने अनुमान व्यक्त किया है कि अगली कुछ तिमाहियों के दौरान निर्यात मांग मजबूत बनी रहेगी, क्योंकि इसे प्रमुख बाजार ईरान में निर्यात बहाल होने से मदद मिल रही है। इक्रा के सहायक उपाध्यक्ष दीपक जोटवानी का कहना है कि कुछ चुनौतियों के बावजूद वृद्घि दर्ज की गई। इन चुनौतियों में कीटनाशक समस्या शामिल है जिससे यूरोपीय संघ (ईयू) के लिए निर्यात में गिरावट आई। इसके अलावा सऊदी अरब द्वारा कीटनाशक नियमों पर सख्ती से अमल करने, ईरानी आयातकों के साथ भुगतान से संबंधित समस्याओं और अमेरिका द्वारा ईरान पर व्यापार प्रतिबंध से जुड़ी अनिश्चितता से भी चुनौतियां पैदा हुई हैं। 
 
कोहिनूर फूड्स के संयुक्त प्रबंध निदेशक गुरनाम अरोड़ा ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि बासमती निर्यात बाजार मजबूत था और ईरान के लिए खेपें भी बढ़ीं हैं, लेकिन उन्होंने दावा किया कि कुल निर्यात इस साल पिछले सीजन के 40 लाख टन की तुलना में कम बना रहेगा। पिछले दो वित्त वर्षों 2016-17 और 2017-18 से बासमती धान की कीमतें मजबूत बनी हुई थीं, हालांकि मौजूदा सीजन में रकबे में कमी की वजह से बासमती उत्पादन 5 प्रतिशत तक घटा है, क्योंकि कुछ किसानों ने एमएसपी में अच्छी वृद्घि और कुछ प्रमुख बासमती उत्पादक राज्यों में बेमौसम बारिश की वजह से हुए नुकसान को देखते हुए गैर-बासमती किस्मों की ओर रुख किया था। इसकी वजह से सभी किस्मों की बासमती कीमतें 10 प्रतिशत तक बढ़ी हैं। इक्रा की रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल में संपन्न हुई धान खरीद में धान की लागत में वृद्घि और मजबूत अंतर्राष्टï्रीय और घरेलू मांग परिदृश्य की वजह से बासमती की औसत प्राप्ति में वृद्घि 2019-20 की पहली छमाही में भी बरकरार रहने की संभावना है। इस बीच, इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (एआईआरईए) के कार्यकारी निदेशक विनोद कौल ने कहा कि ज्यादा लाभ मिलने की वजह से किसान अगले सीजन में अधिक रकबे में इसकी खेती करने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं, हालांकि बुआई में अभी कई महीने हैं। 
 
उन्होंने मॉनसून के दौरान अल नीनो के प्रभाव की आशंका से जुड़ी कुछ खबरों का जिक्र करते हुए कहा, 'इसके अलावा, बासमती का उत्पादन अच्छे मॉनसून पर भी निर्भर करेगा क्योंकि धान मूल रूप से ज्यादा सिंचाई वाली फसल है और अच्छी बारिश इसके उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।'
Keyword: agri, farmer, crop, basmati, rice,,
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