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हाजिर बाजार में रिकॉर्ड ऊंचाई पर स्प्रेड

अनूप रॉय / मुंबई March 30, 2019

बाजार में बड़ी मात्रा में अतिरिक्त डॉलर आ जाने से हाजिर नकदी बाजार में स्प्रेड 45-46 पैसे की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है, जो सामान्यतया 3-5 पैसे होता है। वित्त वर्ष 2018-19 के आखिरी कार्यदिवस पर ऐसा होने की एक वजह यह भी है कि 26 मार्च को बैंक अपना डॉलर रिजर्व बैंक के साथ स्वैप करने में असफल रहे और इससे उनके डॉलर रखने व रुपये के रूप में नकदी पाने पर असर पड़ा। 

हाजिर नकदी बाजार एक इंटरबैंक बाजार है, जिसकी मात्रा बहुत ज्यादा होती है, लेकिन इस पर बहुत चर्चा नहीं होती। बाजार में तीन दरें होती हैं, हाजिर, नकदी और टॉम (आने वाले कल के लिए)। 'हाजिर दर' वह दर है, जिस पर लेन देन के दूसरे कार्यदिवस (टी प्लस 2) के लिए सौदा होता है। दूसरे शब्दों में अगर ग्राहक आज कुछ डॉलर बेचने के लिए सौदा कर रहा है, तो उसे इस प्रक्रिया में उसे आज के दूसरे कार्यदिवस पर खाते में पैसे मिलेंगे। 

अब अगर यदि ग्राहक चाहता है कि यह धन आज ही उसे मिल जाए तो जिस दर का भुगतान उसे मिलेगा उसे 'नकदी दर' कहते हैं। हाजिर और नकदी कर के बीच अंतर को हाजिर नकदी बाजार में स्प्रेड कहते हैं। सामान्यतया प्रति दिन के हिसाब से यह 1 से 1.5 पैसे प्रतिदिन से ज्यादा नहीं होता। 

इसके अलावा एक और दर होती है, जिसे 'टॉम दर' या आने वाले कल की दर कहते हैं। यह वह दर है, जिस पर कारोबार के बाद पहले कार्यदिवस पर खाते में धन डाला जाता है। इस तरह से सामान्य हिसाब किताब से देखें तो अगर ग्राहक अगले कार्यदिवस पर धन पाता है तो 69.125 रुपये मिलेंगे,  जो शुक्रवार की हाजिर दर 69.14 रुपये में से 1.5 पैसे निकालकर है।

इसी तरह से अगर उसे नकदी के आधार पर या आज ही धन मिलता है तो उसे प्रति डॉलर 69.11 रुपये मिलेंगे। बहरहाल अगर हाजिर नकदी बाजार में असामान्य बढ़ोतरी होती है तो इसका मतलब है कि अगर ग्राहक आज ही पैसे चाहता है तो उसे एक डॉलर के बदले 68.68 रुपये मिलेंगे। यह स्थिति निर्यातकों (डॉलर के आपूर्तिकर्ता) के लिए खराब  और आयातकों (डॉलर के खरीदार) के लिए बेहतर स्थिति है। 

एक विदेशी बैंक के साथ जुड़े वरिष्ठ करेंसी डीलर ने कहा, 'मेरे 20 साल के काल में मैंने कभी इस तरह से उच्च दरें नहीं देखी है। मैंने यह दरें एक बार 20 पैसे बढ़ते देखा है, लेकिन इस बार निश्चित रूप से रिकॉर्ड बढ़ोतरी है।' हाजिर नकदी बाजार के तैयार आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। करेंसी डीलरों का कहना है कि हाजिर नकदी बाजार स्प्रेड साल के अंत में बहुत ज्यादा नहीं बढ़ता क्योंकि सालाना बही खाते में अतिरिक्त डॉलर होने की वजह से पूंजी शुल्क लग जाता है। ऐसी स्थिति में साल के आखिर में बैंक अपने अतिरिक्त डॉलर से रुपये खरीदने की कोशिश करते हैं। साल के अंत नकदी और वित्तपोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी यह किया जाता है। 

बहरहाल इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। जहां विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफबीआई) भारतीय बाजार में करीब 6 अरब डॉलर लाए हैं, वहीं रिजर्व बैंक की नीलामी में मिली बोली 16 अरब डॉलर से ज्यादा थी। इससे संकेत मिलते हैं कि बाजार में डॉलर ज्यादा हो गया और कुछ बैंक, खासकर विदेशी बैंकों ने अपने विदेशी इकाइयों से ज्यादा डॉलर लिए हैं, जिससे नीलामी में हिस्सा लिया जा सके। 

उपरोक्त उल्लिखित करेंसी डीलर ने कहा, 'ये बैंक निश्चित रूप से फारवर्ड रेट का लाभ उठाने के लिए बेहतर डिस्काउंट पर बोली लगाएंगे, जिसे खारिज कर दिया गया था क्योंकि रिजर्व बैंंक ने नजदीक कीबाजार दरें स्वीकार की थी। इस तरह से इन बैंकों के पास निश्चित रूप से अतिरिक्त डॉलर होंगे, जिन्होंने संभवत: साल के अंत तक नहीं निपटाया है और इस तरह से डॉलर की बिक्री बढऩे की स्थिति को साफ किया जा सकता है।' 

करेंसी मार्केट के एक वरिष्ठ कारोबारी ने कहा कि ऋणपत्र के क्रय विक्रय की ऐसी स्थिति से बाजार की गणित भी बिगड़ती है और इससे उन कुछ इकाइयों को अनुचित लाभ मिलता है, जिन्होंने रिजर्व बैंक की बोली हासिल की है और अपने मौजूदा डॉलर रिजर्व बैंक को स्थानांतरित कर दिए हैं। रिजर्व बैंक के साथ डॉलर स्वैपिंग करने के बाद उनकी डॉलर सीमा मुक्त हुई थी, जिनका इस्तेमाल वे नकदी बाजार में डॉलर जमा करने (और रुपये कर्ज देने) में कर सकते हैं। 

हालांकि नए वित्त वर्ष के पहले सप्ताह में स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन एक वरिष्ठ करेंसी डीलर ने कहा कि इससे बैंकों के अगले स्वैप ऑक्शन में हिस्सा लेने को लेकर संदेह पैदा होता है कि ऐसा फिर होगा क्योंकि बैंक नीलामी में हिस्सा लेने के लिए अतिरिक्त डॉलर लाने से बचने की कवायद करेंगे।

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