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पूर्ववर्ती यूटीआई: मामले दायर करने वाला एकमात्र म्युचुअल फंड

सचिन मामबटा / मुंबई March 30, 2019

देश का सबसे पुराना म्युचुअल फंड- अविभाजित यूटीआई- इरादतन चूककर्ताओं के खिलाफ मामले दर्ज करने वाला एकमात्र फंड हाउस भी है। इस प्रकार के मामलों पर नजर रखने वाली फर्म ट्रांसयूनियन सिबिल के आंकड़ों के अनुसार, इस फंड हाउस ने 252.6 करोड़ रुपये के बकाये के साथ 27 मामले दर्ज किए हैं। यह उन खातों पर आधारित है जहां 1 करोड़ रुपये अथवा इससे अधिक के पुनर्भुगतान में चूक की गई है। हालांकि पांच साल पहले के मुकाबले इन मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दिखती है। वर्ष 2014 के अंत तक 848.8 करोड़ रुपये के ऐसे 90 मामले थे। लेकिन दिसंबर 2018 तक इसमें करीब एक तिहाई की कमी दर्ज की गई।

फंड हाउस के प्रवक्ता के अनुसार, ये मामले वर्ष 2000 के आरंभ में अविभाजित यूटीआई के समय में किए गए निवेश से संबंधित हैं। एक ईमेल के जवाब में उन्होंने कहा, 'ये परिसंपत्तियां पूर्ववर्ती यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया से संबंधित हैं और इस संबंध में मामले 2003 से पहले दायर किए गए थे। चूंकि इनमें से अधिकतर कंपनियां परिसमापन से गुजर रही हैं, इसलिए कुछ ही मुकदमे अब तक चल रहे हैं।' उस व्यक्ति ने बताया कि ऐसेट मैनेजर ने अपने निवेश को उस समय बट्टे खाते में डाल दिया था। लेकिन कुछ वसूली अभी भी हो रही है।

उन्होंने कहा, 'ये निवेश 1 मार्च 2003 को यूटीआई के विभाजन से पहले किए गए थे और इन्हें बट्टे खाते में डाल दिया गया था। लेकिन समय के साथ-साथ कई चूककर्ताओं से कुछ रकम वसूलने में हम सफल रहे। हालांकि कुछ मामलों में वसूली की प्रक्रिया अब भी चल रही है और मामले को निपटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।'

प्रवक्ता के अनुसार, मूल निवेश की रकम योजनाओं में जमा की जा रही है। आंकड़ों से पता चलता है कि स्पेसिफाइड अंडरटेकिंग ऑफ यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (सूटी) के लिए अगल से सूचीकरण किया गया है। इस ऐसेट मैनेजर की निश्चित आय वाली योजनाओं के विघटन के बाद इस फंड को दो भागों में बांट दिया गया था और उसके बाद यूटीआई की परिसंपत्तियों के प्रबंधन के लिए इसकी स्थापना की गई थी। वर्ष 2014 में 2,551.3 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों के साथ 178 मामले थे।

पूर्ववर्ती यूटीआई का सबसे बड़ा डिफॉल्टर महाराष्ट्र की कंपनी मालविका स्टील है। इस पर सूटी का 420.75 करोड़ रुपये का बकाया है। यूटीआई म्युचुअल फंड का सबसे बड़ा डिफॉल्टर मारवार होटल्स है। इस फंड ने सूटी से अलग अपना मामला दायर किया है। यूटीआई म्युचुअल फंड ने वसूली के बारे में टिप्पणी करने से इनकार किया।

फंड बाजार पर नजर रखने वाली फर्म वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार ने कहा कि यूटीआई के मामले अपनी विरासत वाली परिसंपत्तियों के कारण अनोखे हैं। इसके पास लंबी अवधि की योजनाएं थीं जहां नियमित म्युचुअल फंड के मुकाबले अलग तरीके की उधारी का प्रावधान था। अन्य फंड उधारी को अपने ऊपर लेने में समर्थ नहीं थीं क्योंकि उसके संचालन के लिए काफी सक्रिय रहने की जरूरत होती है।

इस बीच, यूटीआई अगस्त 2018 से ही बिना मुख्य कार्याधिकारी के कारोबार कर रही है। लियो पुरी के जाने के बाद किसी मुख्य कार्यधिकारी को नियुक्त नहीं किया गया। मुख्य वित्तीय अधिकारी इम्तियाजुर रहमान ही इस फंड के कार्यकारी प्रमुख हैं। यूटीआई ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की भी योजना बनाई थी लेकिन शेयरधारकों के साथ गतिरोध के कारण वह अटका पड़ा है।
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