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प्रवर्तक की फंडिंग का खुलासा करें म्युचुअल फंड : सेबी

जश कृपलानी / मुंबई March 29, 2019

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्युचुअल फंडों से कुछ जानकारी मांगी है। नियामक ने कहा है कि फंड हाउस 31 मार्च तक वैसे निवेश की जानकारी साझा करें जहां जमानत के तौर पर शेयर रखकर या अन्य जटिल ढांचे के तहत प्रवर्तकों को रकम दी गई है। म्युचुअल फंडों को भेजे ईमेल में नियामक ने ऐसे निवेश का खुलासा करने को कहा है ताकि वह आकलन कर सके कि ऐसे ढांचे में म्युचुअल फंडों का कितना निवेश हुआ है क्योंकि प्रवर्तकों के शेयर कीमतों में भारी गिरावट के चलते यह दबाव में आ गया है।

सूत्रों ने कहा कि ऐसे ढांचे पर म्युचुअल फंडों के कमजोर कवर को लेकर सेबी चिंतित है। नियामक चाहता है कि ऐसे जोखिम से निपटने के लिए म्युचुअल फंडों के पास पर्याप्त कवर हो क्योंकि इन शेयरों की कीमत बाजार में रोज बदलती है। उद्योग के सूत्रों के मुताबिक, कुछ मामलों में फंड हाउस ने इकाइयों में निवेश दो गुना शेयर कवर से कम पर किया है। यह भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से एनबीएफसी के लिए तय कवर से कम है, जो शेयर के बदले उधार देती है। आरबीआई ने तय किया है कि 100 करोड़ रुपये से ज्यादा वाली एनबीएफसी उस स्थिति में 50 फीसदी लोन टु वैल्यू बनाए रखे, जहां सूचीबद्ध शेयरों को जमानत के तौर पर रखा गया है।

50 फीसदी लोन टु वैल्यू का मतलब यह है कि 50,000 रुपये के कर्ज के लिए जमानत वाले शेयरों की बाजार कीमत 1 लाख रुपये होनी चाहिए। यह दो गुना शेयर कवर की बात करता है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, म्युचुअल फंडों का ऐसे ढांचे में कम से कम 23,000 करोड़ रुपये का निवेश है। म्युचुअल फंड उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि ऐसे ढांचे से जुड़े जोखिम की वास्तविकता का पता इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां कोई नकदी प्रवाह नहीं होता।

यूटीआई एमएफ के अध्यक्ष (समूह) और फिक्स्ड इनकम प्रमुख अमनदीप चोपड़ा ने कहा, प्रवर्तकों की फंडिंग का ढांचा मसलन शेयर के बदले कर्ज पर कोई वास्तविक नकदी प्रवाह नहीं होता। एक सामान्य प्रवर्तक कंपनी को सिर्फ लाभांश आय मिलती है। ये ढांचे मोटे तौर पर रीफाइनैंस के इर्द-गिर्द बनते हैं। यह जोखिम बढ़ा है क्योंकि नकदी के सख्त हालात के बीच ऐसे ढांचे को फंडिंग का सीमित स्रोत मिल रहा है। चोपड़ा ने कहा, एनबीएफसी ऐसे ढांचे के लिए रोलओवर को लेकर चौकस हो गए हैं, ऐसे में वहां दबाव बना रह सकता है।

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