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नई ई-कॉमर्स नीति चुनाव बाद

शुभायन चक्रवर्ती और नेहा अलावधी / नई दिल्ली March 29, 2019

ऑनलाइन क्षेत्र की अधिकतम दिग्गज कंपनियों के व्यापक विरोध के मद्देनजर आम चुनावों के बाद बनने वाली नई सरकार ई-कॉमर्स नीति में व्यापक बदलाव कर सकती है। ऑनलाइन कंपनियों ने ई-कॉमर्स के नियमों और ट्रेडमार्क अधिकारों पर ज्यादा स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही वे यह भी जानना चाहती हैं कि किस हद तक उनकी सेवाएं इस नीति के दायरे में आएंगी। सरकार ने इस नीति का मसौदा 23 फरवरी को जारी किया था और इस पर प्रतिक्रिया तथा सुझाव देने की समयसीमा शुक्रवार को खत्म हो गई। सूत्रों का कहना है कि आदर्श आचारसंहिता लागू होने के कारण अंतिम नीति बनाने की प्रक्रिया में समय लग सकता है और नई सरकार के आने के बाद ही इस पर काम आगे बढ़ सकता है।

इस मसौदे की टैगलाइन है, 'भारत का डेटा भारत के विकास के लिए।' इसमें डेटा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई है जिसमें कृत्रिम बौद्घिकता के इस्तेमाल से लेकर लक्षित मार्केटिंग के लिए उपभोक्ताओं के व्यवहार का पता लगाना शामिल है। हालांकि कंपनियों का दावा है कि अन्य नीतिगत कदमों की कीमत पर ऐसा किया गया है। 

उद्योग संवद्र्घन एवं आंतरिक व्यापार विभाग के वरिष्ठï अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन क्षेत्र की अधिकांश कंपनियों और खासकर एमेजॉन तथा वॉलमार्ट जैसी दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियों ने सरकार से इस नीति में बदलाव करने का अनुरोध किया है। विभाग ने ई-कॉमर्स की नीति पर संबंधित पक्षों के सुझाव की अंतिम तिथि आगे बढ़ाने का फैसला किया था। इस मसौदे को पहली बार 23 फरवरी को सार्वजनिक किया गया था। 

डेटा से संबंधित मुद्दे 

वेबसाइट पर जाने की आवृत्ति की जानकारी से लेकर सर्च के परिणाम और क्लाउड पर स्टोर किसी लेख को पढऩे में बिताए गए समय की जानकारी तक, इस मसौदे में सभी पहुलओं के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है। इसमें कहा गया है कि सर्च और ब्राउजिंग इतिहास की जांच से ऑनलाइन रिटेल वेबसाइट अपने मार्केटिंग कंटेंट उपभोक्ताओं को परोसते हैं। सरकार सोर्स कोड और कृत्रिम बौद्घिकता आधारित प्रणालियों के अलगोरिद्म तक पहुंच चाहती है। इससे विवाद पैदा हो सकता है। नीति के मुताबिक व्यावसायिक हितों और उपभोक्ता संरक्षण के मुद्दों के बीच संतुलन कायम करने की जरूरत है। मसौदे में साफतौर पर इस बात पर जोर दिया गया है कि ई-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में क्षेत्रीय प्रतिनिधि नियुक्त करने होंगे।

नीति में सबसे ज्यादा जोर 

डेटा स्वामित्व और डेटा स्थानीयकरण पर रहा है। इससे फ्लिपकार्ट या एमेजॉन जैसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के बजाय छोटी कंपनियां ज्यादा प्रभावित होंगी। एशिया इंटरनेट कोएलिशन ने कहा, सबसे ज्यादा चिंता डेटा प्रबंधन के बारे में रुख को लेकर है जिसमें डेटा को राष्टï्रीय संपत्ति बताया गया है। इस तरह लोगों को अपने निजी डेटा की स्वायत्ता से वंचित किया गया है जो भारत में एक संरक्षित अधिकार है। प्रस्तावित ई-कॉमर्स नीति के बारे में सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर द्वारा आयोजित चर्चा में शामिल एक भागीदार ने कहा, 'ई-कॉमर्स नीति का मकसद भारत को इस क्षेत्र में आगे बढ़ाना होना चाहिए। स्टार्टअप को दुनिया में अहम भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।'

ट्रेडमार्क और सेवाएं

उद्योग के जानकारों का कहना है कि अगर इस मसौदा नीति को लागू किया जाता है तो ट्रेडमार्क या ब्रांडों को किसी भी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को अपने उत्पाद बेचने से मना करने का अधिकार होगा। अलबत्ता, कंपनियों ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है जिसके तहत देश में कारोबार कर रही उन कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी जो पंजीकृत नहीं हैं। जो भी विदेशी ई-कॉमर्स कंपनी भारत में अपना सामान बेचना चाहती है उसे यहां दफ्तर खोलना होगा और अपने प्रतिनिधि रखने होंगे।
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