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बोइंग 737 मैक्स विमान संकट से खुल सकती है नई राह

तकनीकी तंत्र
देवांग्शु दत्ता /  March 28, 2019

बोइंग 737 मैक्स सीरीज के विमानों को उड़ान भरने से मना कर दिए जाने की घटना विमानन इतिहासकारों को डि हैविलैंड कॉमेट की याद दिला सकता है। कॉमेट दुनिया का पहला वाणिज्यिक जेट विमान था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चर्चित रहे मॉस्किटो विमान को डिजाइन करने वालेे सर ज्योफ्री डि हेविलैंड ने कॉमेट विमान भी डिजाइन किया था। वर्ष 1952 में सेवा में आने के बाद कॉमेट विमान कई बार हादसे का शिकार हुए। सबसे बुरा हादसा कोलकाता के दमदम एयरपोर्ट पर 1953 में हुआ था। उड़ान भरते समय विमान के डैने ही अलग हो गए और देखते-ही-देखते वह आग के गोले में तब्दील हो गया था। उस हादसे में सभी 43 लोगों की मौत हो गई थी।

 
कॉमेट विमान को उड़ान भरने से रोके जाने के बाद उसके डिजाइन में कई खामियों के बारे में पता चला। विमान के रनवे से ऊपर उठने के बाद उसके डैनों पर दबाव पड़ता था। इसके अलावा ईंधन टैंक के पास पडऩे वाला दबाव विमान को गहरे खतरे में डाल सकता था। बहरहाल उन कमियों से सबक लेते हुए बाद के विमान निर्माताओं ने बेहतर डिजाइन तैयार किए। कॉमेट को ही नए सिरे से डिजाइन कर सैन्य संस्करण निमरॉड तैयार किया गया जो रॉयल एयरफोर्स में 21वीं सदी आने तक तैनात रहा।
 
बोइंग 737 मैक्स सीरीज के विमानों पर सारी दुनिया में रोक लगाई जा चुकी है। दो विमान हादसों में 346 लोगों की मौत होने के बाद यह रोक लगाई गई है। पहला हादसा इंडोनेशिया में लॉयन एयर के विमान में 29 अक्टूबर, 2018 को हुआ था जबकि दूसरा हादसा 10 मार्च को इथियोपिया में इथियोपिया एयर के विमान का हुआ है। इन हादसों की पड़ताल से पता चला कि 737 मैक्स विमानों में इस्तेमाल होने वाली प्रणाली एमसीएएस में समस्या होने से ये दुर्घटनाएं हुईं। भले ही 737 सीरीज के विमानों का इस्तेमाल 1967 से ही होता रहा है और बोइंग अब तक 10,000 से अधिक विमानों की आपूर्ति कर चुका है लेकिन मैक्स सीरीज में डिजाइन के स्तर पर काफी बदलाव किए गए। इसे ईंधन-सक्षमता के आधुनिक मानकों के अनुकूल बनाने के साथ ही एयरबस ए320नियो के साथ मुकाबले लायक भी बनाना था। बोइंग के 737 विमान में दो इंजन लगे होते हैं और इसका आकार पतला होता है। मैक्स सीरीज के कई संस्करण हैं जिनमें 140-230 यात्री सफर कर सकते हैं। मैक्स सीरीज के विमान की पहली खेप मई 2017 में जारी की गई थी और जनवरी 2019 तक बोइंग ने 350 विमानों की आपूर्ति भी कर दी थी। इसके अलावा उसे 5011 विमानों के ऑर्डरभी मिले हुए थे।
 
बोइंग ने दावा किया था कि मैक्स विमानों में लगे नए लीप-1बी इंजन से ईंधन की खपत में 737 विमानों की तुलना में 14 फीसदी तक की कमी आई है। एयरबस के नियो विमानों की तुलना में भी 4 फीसदी कम ईंधन खपत होने की बात कही गई थी। मैक्स विमानों में नए इंजन थोड़ा आगे लगे हुए हैं और डैनों पर भी उनकी स्थिति थोड़ी ऊंचाई पर है। ऐसा होने से मैक्स विमानों की उड़ान भरने से जुड़ी क्षमता प्रभावित होती है। असल में, उड़ान के दौरान इन विमानों का नोज वाला हिस्सा थोड़ा ऊपर उठ जाता है, खासकर रफ्तार कम होने पर। जबकि उड़ान भरते समय विमान के डैनों के भीतर का वायु-प्रवाह ही विमान को उठान देता है।
 
विमानों के डैने हमेशा ही उस दिशा में थोड़ा झुके होते हैं जिधर विमान जा रहा होता है। इसे वैमानिकी में 'एंगल ऑफ अटैक' (एओए) कहते हैं और विमान को मिलने वाली उठान इसी पर निर्भर होती है। विमान को सबसे ज्यादा उठान 'क्रिटिकल एओए' पर मिलती है। अगर एओए क्रिटिकल एंगल से ऊंचा है तो उठान कम होने लगती है और विमान अटकने की स्थिति पैदा हो जाती है। विमान का नोज उठते ही एओए भी बढऩे लगता है। मैक्स विमानों में तो नोज ऊपर उठने की प्रवृत्ति पहले से ही रही है। क्रिटिकल एओए बढऩे की सूरत में नोज को तब तक नीचे लाना है जब तक एओए सुरक्षित दायरे में न आ जाए। एमसीएएस एक सेंसर-आधारित सॉफ्टवेयर प्रणाली है जो यह काम स्वचालित तरीके से करती है। यह हवा की गति और एओए की गणना करने के बाद नोज को नीचे लाने की प्रक्रिया शुरू करता है। 
 
दुर्भाग्य से एमसीएएस प्रणाली में कुछ समस्याएं नजर आती हैं। लॉयन एयर विमान के हादसे के समय भी उसके सेंसर ठीक से काम नहीं कर रहे थे। एमसीएएस ने बार-बार विमान का नोज नीचे लाने के निर्देश दिए जबकि उसका एओए एकदम सही स्थिति में था। पायलट इसमें कुछ नहीं कर सकते थे और शायद उन्हें पता भी नहीं चला होगा कि सेंसर में कोई समस्या है। अगर पायलट को पता चल जाए कि कुछ समस्या है तो वे एमसीएएस तो डिसकनेक्ट कर सकते हैं लेकिन हादसे का शिकार हुए दोनों विमानों में दो वैकल्पिक सुरक्षा उपाय नदारद थे। पहला, सेंसर की रीडिंग दिखाने वाला एओए सूचक और दूसरा, सेंसर की रीडिंग में असमानता होने पर जल जाने वाली लाइट। असहमति जताने वाली इस लाइट की कीमत 80,000 डॉलर है लेकिन एक विमान की 12 करोड़ डॉलर की कीमत को देखते हुए यह महंगा नहीं है।
 
पायलटों का यह भी कहना है कि उन्हें उड़ान संबंधी मानकों में बदलाव आ चुके विमान को उड़ाने का अधिक अनुभव नहीं मिला है। अमेरिकन एयरलाइंस के पायलट और अलाइड पायलट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता कैप्टन डेनिस टेजर कहते हैं कि पायलटों को 737एनजी से 737 मैक्स विमान की तरफ भेजने के पहले केवल आईपैड पर 56 मिनट का ही प्रशिक्षण दिया गया था। बोइंग के पुराने ऑर्डर निरस्त हो रहे हैं और उसे कई कानूनी वादों का भी सामना करना पड़ रहा है। इन हादसों के बाद विमानन उद्योग उड़ान संबंधी नियम और सुरक्षा मानदंंडों में बदलाव कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो इन लोगों की मौत व्यर्थ नहीं जाएगी। 
Keyword: aviation, flight, airport, boeing 737,,
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