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बोली जीतने पर जेपी का कायापलट करेगी एनबीसीसी

करण चौधरी /  March 24, 2019

करीब एक दशक से अपने फ्लैट की चाबी मिलने का इंतजार कर रहे 70,000 परिवारों की आखिरी उम्मीद बन चुके एनबीसीसी (इंडिया) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अनूप कुमार मित्तल को भी बखूबी अहसास है कि उम्मीदों पर खरा उतरना इतना आसान नहीं है। करण चौधरी को दिए साक्षात्कार में मित्तल ने जेपी समूह और आम्रपाली की परियोजनाओं के मकान खरीदारों के लिए योजना और कंपनी के भविष्य के कदमों पर विस्तार से बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश...

 
इसे लेकर आपकी क्या योजना है?
 
हमारी बिजनेस डेवलपमेंट योजना, क्रियान्वयन की क्षमता आदि के लक्ष्य पर चर्चा होगी। कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां हम पहुंचने पर विचार कर रहे हैं, मसलन जेपी समूह की परियोजनाओं के लिए बोली लगाना। हम सिर्फ परियोजनाओं के एक क्षेत्र में ही नहीं बने रहना चाहते।
 
जेपी के मकान खरीदारों को कब घर की चाबी मिलेगी? यह परियोजना वाणिज्यिक तौर पर कितनी व्यवहार्य है?
 
अगर एनबीसीसी के हाथ जेपी लगती है तो हम तीन साल में मकानों की डिलिवरी कर देंगे। यही वादा हमने मकान खरीदारों को किया है। हम परियोजना के वाणिज्यिक पहलू को समझने में समय लेंगे, हालांकि हमने आकलन किया है और उसी आधार पर बोली जमा कराई है। यह काफी बड़ी परियोजना है, जिससे नोएडा से आगरा तक की 3,000 एकड़ जमीनें जुड़ी हैं। एक अस्पताल भी है। अगर हम बोली जीतते हैं तो हमें भरोसा है कि कंपनी का कायापलट करने में कामयाब होंगे। हमने समाधान योजना के लिए अभिरुचि पत्र जमा करा दिया है।
 
क्या जेपी आपके लिए अफोर्डेबल हाउसिंग परियोजना बन जाएगी? क्या आपकी कोई और अफोर्डेबल हाउसिंग परियोजना है?
 
अगर हम बोली जीतते हैं तो इस परियोजना के तहत काफी अफोर्डेबल हाउस कवर होंगे। हम कुछ सरकारी अफोर्डेबल हाउसिंग परियोजनाओं आदि के लिए परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
 
इस समय आपकी ऑर्डर बुक कितनी बड़ी है?
 
क्षेत्रवार एनबीसीसी की ऑर्डर बुक करीब 85,000 करोड़ रुपये की है। हमारे बिजनेस डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में नौ अफ्रीकी देशों में महात्मा गांधी कन्वेंशन सेंटर बनाना (2,000 करोड़ रुपये), बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश में एम्स का निर्माण (1,138 करोड़ रुपये), देवघर में एम्स (902 करोड़ रुपये) और उत्तराखंड में 750 करोड़ रुपये की विकास योजनाएं शामिल हैं। सरोजनी नगर और नेताजी नगर में पुनर्विकास परियोजनाएं अब पटरी पर हैं। कंपनी का इरादा प्राइवेट फर्मों या सरकारी एजेंसियों के मालिकाना हक वाली जमीन पर परियोजना प्रबंधन कंसल्टेंसी के लिए को-डेवलपर के तौर पर उतरने का है।
 
राजस्व के क्या अनुमान हैं?
 
साल की शुरुआत में मैंने कहा था कि न्यूनतम 30 फीसदी बढ़ोतरी का लक्ष्य है। मुझे लगता है कि हम इसके करीब रहेंगे। वित्त वर्ष समाप्त होने वाला है। अगले साल हमारी योजना कम से कम इतनी ही बढ़त हासिल करने की है। एनबीसीसी 10,000 करोड़ रुपये के राजस्व का स्तर छूने की उम्मीद कर रही है।
 
आम्रपाली परियोजना का कितना काम पूरा हो चुका है?
 
यह नगण्य जैसा है क्योंकि मामला सर्वोच्च न्यायालय में है। जब तक अदालत से निर्देश नहीं मिलता, हम काम शुरू नहीं करेंगे। हमने करीब 10 करोड़ रुपये का छोटा सा काम शुरू किया है। हम कुछ कॉम्पलेक्स में अधूरे काम पूरे कर रहे हैं, जहां लोग पहले से ही रह रहे हैं।
 
क्या एनबीसीसी रेलवे की कुछ पुनर्विकास परियोजनाओं में शामिल है?
 
हमारे पास रेलवे के 10 स्टेशन हैं। लखनऊ में हम दो परियोजनाएं पहले ही शुरू कर चुके हैं। अगले चरण में हम नेल्लौर, तिरुपति और पुडुचेरी में काम शुरू करेंगे।
 
एयर इंडिया की परिसंपत्तियों को लेकर क्या योजनाएं हैं?
 
हमें राष्ट्रीय राजधानी में एयर इंडिया की दो परिसंपत्तियों का पुनर्विकास करने को कहा गया है। इन दोनों परिसंपत्तियों की संयुक्त बिक्री कीमत करीब 5,000 करोड़ रुपये है।
Keyword: real estate, property, GST, RERA, NBCC,,
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