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फ्लिपकार्ट : आदमी की नहीं दरकार, रोबोट कर रहे सामान तैयार

पीरजादा अबरार /  March 24, 2019

वेंकट स्वामी बेंगलूरु स्थित फ्लिपकार्ट के एक केंद्र में काम करते हैं जहां बिक्री के लिए आने वाले सामान की छंटनी होती है। इसके चारों ओर वेयरहाउस, फैक्टरियां, मंदिर, चर्च और धूल भरी सड़कें हैं। कुछ महीने पहले तक वे ग्राहकों द्वारा दिए जाने वाले ऑर्डर की छंटनी करते, उन्हें वापस जगह पर रखते और विभिन्न जगहों पर भेजने के हिसाब से तैयार करते थे। यह काफी थका देने वाला और नीरस काम था लेकिन वे रोजाना आठ घंटे की नौकरी में इस काम को करते थे। अब स्वामी रोबोट का प्रबंधन करते हैं जो काम में उनकी मदद करते हैं। अब स्वामी को नारंगी रंग के रोबोट पर सामान रखने होते हैं और ग्राहक के पिनकोड या पार्सल पर लिखी दूसरी जानकारियों के आधार पर मशीन स्वयं इनकी छंटनी कर लेती है। 

 
फ्लिपकार्ट फैसिलिटी केंद्र में रोबोट प्रति घंटा 5,000 पैकेट की छंटनी करते हैं जबकि मानव के काम में यह संख्या केवल 450 पार्सल प्रति घंटा थी। ये रोबोट या स्वचलित निर्देशित वाहन (एजीवी) चौबीस घंटे काम कर सकते हैं और 8 घंटे काम करने के बाद जब उसकी बैटरी डिस्टचार्ज होने लगती है तो वह विभिन्न चार्जिंग प्वाइंट के जरिये खुद को चार्ज कर लेते हैं। फ्लिपकार्ट में उपाध्यक्ष (रोबोटिक्स एवं ऑटोमेशन) प्रणव सक्सेना कहते हैं, 'ये रोबोट हमारी उम्मीद से 10 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं। ये सभी रोबोट एक दूसरे से रियल टाइम में बात करते हैं जिससे कार्य में किसी भी तरह के टकराव को रोका जा सके।'
 
फ्लिपकार्ट का कहना है कि उसने भारत की पहली रोबोट आधारित छंटाई प्रौद्योगिकी शुरू की है। इसे आपूर्ति शृंखला के क्षेत्र में स्वचालन प्रक्रिया अपनाने की दिशा में प्रमुख बदलाव के तौर पर देखा जा सकता है। फ्लिपकार्ट के छंटनी केंद्र में 100 से अधिक रोबोट सामान की छंटनी कर रहे हैं। फ्लिपकार्ट में ई-कार्ट टेक के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कृष्णा राघवन कहते हैं, 'यह इस क्षेत्र में भारत का पहला नवोन्मेष है। हम स्वचालन के लिए सटीकता, और दक्षता जैसी समस्याओं को सुलझाना चाहते हैं।' पिछले वर्ष सितंबर महीने में रोबोटिक्स स्टार्टअप ग्रेऑरेंज ने 14 करोड़ डॉलर की वित्त उगाही की थी। वित्त उगाही के इस दौर में फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक बिन्नी बंसल ने भी निवेश किया। हालांकि फ्लिपकार्ट का कहना है कि वह इस परियोजना के लिए ग्रेओरेंज के साथ मिलकर काम नहीं कर रही है और विभिन्न विक्रेताओं से रोबोट खरीदकर उन्हें अपनी जरूरतों और भारतीय परिवेश के अनुसार कस्टमाइज कर रही है। 
 
फ्लिपकार्ट की इस बेंगलूरु स्थित छंटनी इकाई में इस समय करीब 1,000 कर्मचारी हैं जो रोजाना लाखों सामान को यहां से आगे भेजते हैं। कंपनी का कहना है कि एजीवी रोबोट इस स्टाफ के साथ मिलकर काम करेंगे और कर्मियों को रोबोट चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। परीक्षण बताते हैं कि इस तरह के 100 रोबोट लगाने से प्रसंस्करण दक्षता में 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी होगी। इसके जरिये एक घंटे में 4,500 शिपमेंट का प्रसंस्करण किया जा सकता है और मामूली शुल्क पर इसे 5 गुना और बढ़ाया जा सकेगा। इसका दूसरा लाभ यह है कि रोबोट को विभिन्न स्थानों पर आसानी से ले जाया जा सकता है। इससे फ्लिपकार्ट को डिलिवरी प्रक्रिया तेज करने में मदद मिलेगी जिससे ग्राहक अनुभव बेहतर होगा। 
 
मई 2018 में अमेरिकी खुदरा कंपनी वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए 16 अरब डॉलर का भुगतान किया था जिसके चलते भारतीय कंपनी की बाजार कीमत 20 अरब डॉलर को पार कर गई थी। अमेरिका में वॉलमार्ट की प्रतिस्पर्धी एमेजॉन ऑटोमेशन को अपना रही है और कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले कार्यों के बाद रोबोट के लिए जरूरी काम करने के लिए नए तरीकों पर काम कर रही है। एमेजॉन ने अपने वेयरहाउस में साल 2014 से ही रोबोट के साथ काम करना शुरू कर दिया था। इन्हें कीवा सिस्टम्स द्वारा तैयार किया गया था और एमेजॉन ने साल 2012 में 77.5 करोड़ डॉलर में कंपनी का अधिग्रहण कर इसका नाम एमेजॉम रोबोटिक्स कर दिया। एमेजॉन ने पूरे विश्व में करीब 1,00,000 रोबोट काम में लगाए हैं और कंपनी इनमें बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है। 
 
फॉरेस्टर रिसर्च मेंं वरिष्ठ फॉरकास्ट एनालिस्ट सतीश मीणा कहते हैं कि एमेजॉन के अलावा जेडी.कॉम, अलीबाबा जैसी वैश्विक स्तर की सभी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां भी वेयरहाउस ऑटोमेशन में निवेश कर रही हैं। वह बताते हैं, 'इसके जरिये लागत के साथ-साथ ग्राहकों को सामान पहुंचाने के समय में कमी आ रही है।' वह आगे कहते हैं, 'आपके वेयरहाउस में बहुत अधिक कर्मचारी नहीं हो सकते। वे इसमें लगने वाली मानव-श्रमबल को कम करना चाहते हैं और पूरी प्रक्रिया को स्वचलित करना चाहते हैं।'हालांकि फ्लिपकार्ट का कहना है कि इस पहल से हालिया मानव श्रम-बल का कौशल विकास होगा जिससे कम लागत में अधिक वैल्यू-एडिशन होगा। कंपनी ने कहा कि ये रोबोट अकुशल श्रमिकों का क्षमता विकास करेंगे और भविष्य में स्वचालन भारतीय उद्योगों के बीच अहम भूमिका निभाएगी। 
 
हालांकि आज के दौर में भारतीय माहौल में स्वचालन और रोबोटिक्स बहुत अधिक प्रभावशील नहीं है लेकिन कंपनी की योजना स्टार्टअप और विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी कर नवोन्मेष और शोध की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। फ्लिपकार्ट इंजीनियरिंग, उत्पाद और स्वचालन केंद्र को एक छत के नीचे लाने के लिए 'रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के लिए उत्कृष्टता केंद्र' विकसित कर रही है। इन केंद्रों पर स्वचालन के साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर भी काम होगा और भारत केंद्रित उपाय विकसित किए जाएंगे। फ्लिपकार्ट के राघवन बताते हैं कि ये रोबोट इंसानों के साथ मिलकर काम करते हैं। 
 
रिटेल कंसल्टेंसी थर्ड आईसाइट में मुख्य कार्याधिकारी देवांग्शु दत्ता कहते कहते हैं कि पश्चिमी देशों में वेयरहाउस जैसे स्थानों के लिए कर्मियों की भर्ती की लागत काफी अधिक है जिसके चलते रोबोट का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है लेकिन भारत में मानव श्रम-बल की अधिक संख्या के चलते कंपनियों के लिए यह बड़ी समस्या नहीं है। वह कहते हैं, 'अपनी कार्यप्रणाली में उच्च कौशल की दक्षता की चाह रखने वाली कंपनियों के लिए स्वचालन महत्त्वपूर्ण है।'
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