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सिनेमा के पर्दे पर राजनीतिक अक्स

उर्वी मलवाणिया /  March 24, 2019

परंपरागत रूप से बॉलीवुड के लिए कमजोर तिमाही रहने के बावजूद मौजूदा कैलेंडर की पहली तिमाही का परिदृश्य 2019 के आम चुनावों के मद्देनजर रिलीज होने वाली प्रासंगिक विषय वस्तु की फिल्मों की तुलना में उत्साहपूर्ण रहा है। भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किए गए सर्जिकल हमले को दिखाने वाली उड़ी से लेकर बाला साहेब ठाकरे और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जैसे राजनीतिक दिग्गजों के जीवन पर आधारित फिल्मों तक बॉलीवुड के पास दिखाने को काफी कुछ रहा है। अलबत्ता विभिन्न राजनीतिक/राष्ट्रवादी विषयों पर आधारित रिलीज हुई फिल्मों की बॉक्स ऑफिस पर कमाई वैसी ही रही है जैसा कि फिल्म व्यवसाय के विशेषज्ञ पिछले कुछ वर्षों से संभावना जताते रहे हैं। सोशल मीडिया की समीक्षा और दर्शकों में विषय वस्तु के प्रति बढ़ती जागरूकता वाले इस दौर में केवल प्रासंगिक विषय वस्तु वाली फिल्म रिलीज करने से बात नहीं बनेगी। हालांकि उड़ी ने अपनी छाप छोड़ी है और 2019 में बॉलीवुड की सुपर हिट बन गई है लेकिन दूसरी ओर एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर और मणिकर्णिका जैसी अन्य फिल्म इस तरह प्रभावित करने में असफल रही हैं।

 
विक्की कौशल के अभिनय वाली उड़ी इस साल रिलीज होने वाली फिल्मों में से एक थी और 11 जनवरी को पर्दे पर आई। यह फिल्म अब भी सिनेमाघरों में चल रही है। आठ सप्ताह से भी पहले रिलीज होने वाली किसी फिल्म के लिए यह एक असाधारण उपलब्धि है क्योंकि आमतौर पर बॉलीवुड की कोई फिल्म छह से आठ सप्ताह तक ही टिकी रहती है। इसने अब तक 240 करोड़ रुपये कमाए हैं। 45 करोड़ रुपये के निर्माण बजट के दृष्टिïकोण से यह एक बहुत बड़ी कमाई है। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर लगभग 200 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने में सफल रही है।
 
मणिकर्णिका जैसी अन्य फिल्में लगभग 100 करोड़ रुपये का कारोबार करने में सफल रही हैं (इसने अब तक 94 करोड़ रुपये कमाए हैं) लेकिन भारी उत्पादन लागत (इसकी निर्माण लागत 100-110 करोड़ रुपये बताई गई है) के बोझ तले दबी यह फिल्म मुनाफा कमाने में असफल रही। दूसरी ओर ठाकरे और एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर जैसी फिल्में दर्शकों को प्रभावित करने नाकाम रही हैं। इन्हें इतने दर्शक नहीं मिल पाए कि मुनाफा हो सके। सिनेमा प्रदर्शन शृंखला के एक अधिकारी कहते हैं कि वीडियो स्ट्रीमिंग की धूम की वजह से दर्शकों के पास सामग्री का पर्याप्त विकल्प है। केवल किसी प्रासंगिक विषय पर आधारित फिल्म रिलीज करने से काम नहीं चलेगा। बजट के अलावा पटकथा, निर्माण की गुणवत्ता और सही विपणन अब भी किसी फिल्म की सफलता के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण रहते हैं। देश में सामाजिक-राजनीतिक वातावरण भले ही कुछ भी हो लेकिन फिल्म का विषय सफलता सुनिश्चित करने का एक कारक रहता है। अच्छी सामग्री कमोबेश सिनेमाघरों को भरने में कामयाब रही है, चाहे फिल्म की विषय वस्तु कुछ भी हो। 
 
'भारत' की विषय वस्तु पर आधारित सबसे नई फिल्म अक्षय कुमार की केसरी है जिसकी शुरुआत 21 मार्च को होली (और नवरोज) के मौके पर की गई थी। फिल्म ने अपने बॉक्स ऑफिस अभियान की शुरुआत 21 करोड़ रुपये की बढिय़ा कमाई के साथ की जो 2019 में बॉलीवुड की किसी फिल्म की सबसे ज्यादा कमाई है और आने वाले दिनों में भी इससे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। 80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत में बनी यह फिल्म 1897 में सारागढ़ी के युद्ध की कहानी बयां करती है। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपने पहले तीन दिनों के सफर में 57 करोड़ रुपये की कमाई की है। बॉलीवुड की ऐसी ही एक अन्य पेशकश है 5 अप्रैल को रिलीज होने वाली विवेक ओबेरॉय की पीएम नरेंद्र मोदी। इस फिल्म का निर्देशन उमंग कुमार (मैरी कॉम और सरबजीत वाले फिल्मकार) ने किया है। फिल्म में बोमन ईरानी भी हैं। ऐसा संभवत: पहली बार हो रहा है कि जब किसी पदासीन प्रधान मंत्री के जीवन पर फिल्म बनाई जा रही है और यह फिल्म देश में चुनाव होने से केवल एक हफ्ते पहले ही रिलीज की जानी है। 
 
इस फिल्म का ट्रेलर पिछले हफ्ते के आखिर में जारी किया गया था और सोशल मीडिया पर इस पर बहुत ट्रोल हुआ था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाएगी या नहीं यह तो बाद में ही पता चलेगा। अलबत्ता फिल्म के रिलीज होने में विलंब हो सकता है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रतिस्पर्धी राजनीतिक दलों ने चुनावों के इतने पास फिल्म रिलीज किए जाने को लेकर आपत्ति जताई है। इस साल की अन्य हिट फिल्मों में जोया अख्तर की गली बॉय (139 करोड़ रुपये), रोमांटिक कॉमेडी लुका-छुपी (86 करोड़ रुपये), अमिताभ बच्चन की थ्रिलर बदला (67 करोड़ रुपये) जैसी कई फिल्में शामिल हैं। ये सब फिल्में 20-40 करोड़ रुपये के मामूली बजट से निर्मित हुई थीं।
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