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लघु अवधि की योजनाओं में बढ़ी निवेशकों की रुचि

जश कृपलानी / मुंबई 03 22, 2019

लघु अवधि ऋण की ब्याज दरों में गिरावट के कारण डेट योजनाओं (नॉन-लिक्विड) को कुछ रफ्तार मिली है क्योंकि निवेशकों को लघु अवधि वाली योजनाओं में काफी संभावनाएं दिख रही हैं। म्युचुअल फंड कंपनियों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों के दौरान इन योजनाओं में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है क्योंकि वे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की हालिया पहल से चिंतित दिख रहे हैं। सुंदरम म्युचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी (डेट) द्विजेंद्र श्रीवास्तव ने कहा, 'पिछले महीने रीपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती संबंधी आरबीआई के निर्णय से लघु अवधि की जमा पर ब्याज दरों में गिरावट आई है जिससे निवेशकों का रुख लघु अवधि योजनाओं की ओर दिख रहा है। इसके अलावा आरबीआई की हालिया रुपये-डॉलर अदला बदली योजना से नकदी प्रवाह बढऩे और प्रतिफल में गिरावट आने के आसार दिख रहे हैं।'
 
श्रीवास्तव ने कहा, 'निवेश प्रवाह न केवल संस्थागत निवेशकों और धनाढ्य निवेशकों की ओर से दिख रहा है बल्किखुदरा निवेशक भी इसमें काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।' डेट योजनाओं के लिए 2018 से 2019 की अवधि काफी चुनौतीपूर्ण रही है क्योंकि इस श्रेणी में चालू वित्त वर्ष के दौरान 1.3 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रवाह दिखा। ब्याज दरों में तेजी के साथ-साथ ऋण संकट के कारण ऋण बाजार में उथल-पुथल काफी बढ़ गया और इससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। हालांकि इनमें से एक कारक में बदलाव के संकेत दिख रहे हैं जिससे आरबीआई के मौद्रिक रुख में भी बदलाव आया है।
 
म्युचुअल फंडों के संगठन एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्ïस इन इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी एनएस वेंकटेश ने कहा, 'आरबीआई के नीतिगत रुख में बदलाव आया है और वह सख्ती के बजाय स्थिर दिख रहा है। रुख में इस बदलाव के कारण दरों में कटौती की गई है। इसलिए निवेशकों के लिए यह सही समय है कि वे आय फंडों में निवेश करें जहां उन्हें कुछ प्रतिफल मिल सकता है।' आरबीआई ने 2018 में दो बार यानी जून और अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठकों में रीपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि की थी। पिछले महीने आरबीआई ने रीपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती की थी जो आरबीआई के नए गवर्नर शक्तिकांत दास की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक थी। रीपो दर में कटौती के अलावा आरबीआई ने 13 मार्च को डॉलर-रुपये की अदला बदली योजना की घोषणा की जिससे प्रणाली में 35,000 करोड़ रुपये आने की संभावना है।
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