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22 सूचीबद्ध कंपनियों से बाहर हुआ नॉर्वे सॉवरिन फंड

सचिन मामबटा / मुंबई March 22, 2019

विश्व के सबसे बड़े सॉवरिन वेल्थ फंड ने साल 2018 के दौरान भारत में अपना निवेश घटाया और यह जानकारी समय-समय पर किए गए उसके खुलासे से मिलती है। पिछले साल के मुकाबले इसके इक्विटी निवेश की कीमत 70.9 करोड़ डॉलर घटी है। डेट में इसके निवेश की कीमत 1.51 अरब डॉलर कम हुई है। साल 2018 के दौरान इसके इक्विटी पोर्टफोलियो का रिटर्न रुपये के लिहाज से 4.9 फीसदी नकारात्मक रहा। फंड के करेंसी बास्केट में यह 10 फीसदी से ज्यादा कम रहा। डेट पोर्टफोलियो में भी मार्केट वैल्यू के लिहाज से नकारात्मक रिटर्न मिला। डिस्क्लोजर के मुताबिक, इसके साथ ही भारत उन देशों में शामिल हो गया जिसने नकारात्मक रिटर्न दिया।
 
सालाना रिपोर्ट में कहा गया  है, फंड के फिक्स्ड इनकम निवेश की बाजार कीमत में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई और यह बढ़ोतरी जापान, अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका के सरकारी बॉन्डों में हुई। साथ ही फ्रांस, जर्मनी और भारत के सरकारी बॉन्डों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज हुई। इसमें यह भी बताया गया है कि कितनी कंपनियों में फंड का इक्विटी निवेश घटा है और यह 2017 के आखिर के 275 के मुकाबले 31 दिसंबर 2018 के आखिर में 253 रह गया। यह बताता है कि फंड ने साल के दौरान 22 कंपनियों से पूरी तरह निवेश की निकासी कर दी और भारत में निवेश की कीमत में कुल गिरावट की वजह सिर्फ बाजार कीमत में आई गिरावट नहीं थी।
 
साल 2017 में इस फंड ने अपनी भारतीय होल्डिंग में इजाफा कर 8 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया था। उस साल उतारचढ़ाव में इजाफा हुआ, खास तौर से उभरते बाजारोंं में। इसके पोर्टफोलियो में इक्विटी ने अन्य संपत्ति वर्ग के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया। इसकी सालाना रिपोर्ट में कहा गया है, फंड के इक्विटी निवेश पर रिटर्न 9.5 फीसदी नकारात्मक रहा जबकि असूचीबद्ध रियल एस्टेट में निवेश पर 7.5 फीसदी और फिक्स्ड इनकम में निवेश पर 0.6 फीसदी रिटर्न मिला। फंड ने बेंचमार्क के मुकाबले 0.30 फीसदी कमजोर प्रदर्शन किया। सापेक्षिक रिटर्न चीन में कमजोर रिटर्न और उभरते बाजारों की चुनौतियोंं से प्रभावित हुआ। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में भारत बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
 
हेज फंड एवेंडस कैपिटल पब्लिक मार्केट्स ऑल्टरनेट स्ट्रैटिजीज के सहायक सीईओ वैभव सांघवी ने कहा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरें नहीं बढ़ाए जाने की घोषणा के बाद भारत जैसे उभरते बाजारों में जोखिम वाली परिसंपत्तियों के लिए वैश्विक माहौल ज्यादा अनुकूल बन गया है। उन्होंने कहा, वैश्विक लिहाज से हम कम ब्याज दर वाले माहौल में हैं और नकदी की स्थिति फिर सहज हो रही है, जो वास्तव में उभरते बाजारों समेत अन्य बाजारों में जोखिम वाली परिसंपत्तियों में निवेश में इजाफा करने में मदद कर रही है। हम देख रहे हैं कि यह निवेश मोटे तौर पर निष्क्रिय फंडों के चलते है। सक्रिय फंड तब निवेश कर सकते हैं जब चुनाव पूरे हो जाएंगे। इस बीच, आईसीआईसीआई डायरेक्ट के शोध प्रमुख पंकज पांडे के मुताबिक, कई सॉवरिन वेल्थ फंडों ने उन कंपनियों के पक्ष में अपनी होल्डिंग में बदलाव करने पर विचार शुरू कर दिया है, जो पर्यावरण के लिहाज से बेहतर हैं और ये नॉर्वे के गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल के योगदान में बदलाव ला सकते हैं। नॉर्वे के फंड ने हाल में कहा है कि वह तेल व गैस कंपनियों से बाहर निकलने पर विचार करेगी। हालांकि इससे निवेश के लिहाज से भारत और अन्य उभरते बाजारों पर असर नहीं पडऩे की संभावना है, खास तौर से वैश्विक नकदी की पृष्ठभूमि में। उन्होंने कहा, उभरते बाजारों का परिदृश्य अचानक बेहतर लगने लगा है। इस साल की शुरुआत से भारतीय बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक करीब 40,000 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे हैं।
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