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कर्ज बेचकर धन जुटा रहे एनबीएफसी

सुब्रत पांडा / मुंबई March 22, 2019

जनवरी महीने में गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को बैंकों से कर्ज मिलना कम हुआ है, लेकिन कंपनियों के कारोबार में गिरावट नहीं नजर आ रही है। बैंक अब एनबीएफसी को नया कर्ज देने के बजाय प्रत्यक्ष असाइनमेंट और प्रतिभूतिकरण के माध्यम से उनके पोर्टफोलियो की खरीद बढ़ा रहे हैं। रेटिंग एजेंसी इक्रा के कार्तिक श्रीनिवासन ने कहा, 'एनबीएफसी की बैंकों पर निर्भरता कम नहीं हो रही है क्योंकि भले ही वे नए कर्ज नहीं दे रहे हैं, लेकिन प्रतिभूतिकरण के माध्यम से वे उनके पोर्टफोलियो खरीद रहे हैं।'  
 
प्रतिभूतिकरण कर्ज के रूपांतरण की प्रक्रिया है, जिसमें उसे नकदी जुटाने के लिए बिक्री के योग्य प्रतिभूति में बदला जाता है, जिसकी बिक्री अन्य निवेशकों को की जाती है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 18 जनवरी 2019 तक एनबीएफसी को बैंक कर्ज 5.57 लाख करोड़ रुपये रहै, जो 21 दिसंबर 2018 के 5.7 लाख करोड़ रुपये की तुलना में कम है।  वित्त वर्ष 19 के सितंबर जनवरी अवधि के दौरान एनबीएफसी को बैंक कर्ज सिर्फ 2 प्रतिशत बढ़ा है। ऐसा तब हुआ, जब एनबीएफसी क्षेत्र आईएलऐंडएफएस संकट से प्रभावित हुआ था। आईएलऐंडएफएस ने कर्ज भुगतान में चूक की और इसकी वजह से वित्तीय क्षेत्र में नकदी का संकट हो गया।  बहरहाल सालाना आधार पर (जनवरी 2018 से जनवरी 2019) एनबीएफसी को बैंक कर्ज में 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह 3.76 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 5.57 लाख करोड़ रुपये हो गया है। श्रीनिवासन ने कहा, 'एनबीएफसी को नया कर्ज कम हुआ है। नवंबर दिसंबर मेंं बैंकों ने एनबीएफसी को कर्ज देना सुस्त कर दिया। यही वजह है कि सालाना आधार पर आंकड़ों में यह नजर नहीं आ रहा है और इसका असर आने वाले महीनों में संभव है।' 
 
विशेषज्ञों का कहना है, 'एनबीएपसी न सिर्फ धन जुटाने के लिए प्रतिभूतिकरण कर रहे हैं बल्कि वह इसके माध्यम से अपना बही खाता भी हल्का कर रहे हैं।' मैग्मा हाउसिंग फाइनैंस के सीईओ मनीष जायसवाल ने कहा, 'इस तिमाही में तमाम बैंकों को पूंजी मिल रही है, ऐसे में बैंकों के लिए संपत्ति बनाना आसान है और वे एनबीएफसी से संपत्ति खरीदकर ऐसा कर रहे हैं।' सरकारी बैंक जैसे भारतीय स्टेट बैंक और यूनियन बैंंक आफ इंडिया ने वित्त वर्ष 19 की तीसरी तिमाही में एनबीएफसी से 45,000 करोडड़ रुपये और 5,000 करोड़ रुपये का कर्ज खरीदने का फैसला किया है, जिससे नकदी संकट से जूझ रहे एनबीएफसी क्षेत्र को नकदी का समर्थन मिल सके। 
 
इसके अलावा जो बैंंक अपने प्राथमिकता वाले क्षेत्र में कर्ज का हिस्सा जैसे ग्रामीण, कृषि और एसएमई क्षेत्र को कर्ज नहीं दे पा रहे हैं, वे एनबीएफसी से इस तरह का पोर्टफोलियो खरीद रहे हैं। बैंक के हिसाब से देखें तो विस्तार योजना इस पर निर्भर है कि जमा में कितनी वृद्धि होती है। पिछले 2-3 साल से बैंकों के पास पूंजी कम थी, जिसकी वजह से उन्होंने विस्तार नहीं किया। लेकिन अब बहुत पूंजी आ रही है और बैंकों को नियामकीय जरूरतें पूरी करने में कोई समस्या नहींं है, ऐसे में वे विस्तार की संभावनाएं तलाश रहे हैं। 
Keyword: NBFC, bank, micro finance,,
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