बिजनेस स्टैंडर्ड - क्रिकेटरों का भाग्य बताएगी एआई
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क्रिकेटरों का भाग्य बताएगी एआई

पीरजादा अबरार /  03 20, 2019

मैदान में तकनीक

आईआईटी मद्रास और ईएसपीएन ने एक तकनीक विकसित की है, जो विभिन्न मानकों के आधार पर क्रिकेट मैच और खिलाड़‍ियों के प्रदर्शन का अनुमान व्यक्त करती है

बिजनेस स्टैंडर्ड क्रिकेटरों का भाग्य बताएगी एआईकृत्रिम मेधा (एआई) और डेटा साइंस जैसी नवीन तकनीक कई उद्योगों को बड़े स्तर पर प्रभावित कर रही हैं। आजकल क्रिकेट जैसे खेल के विश्लेषण में भी इन तकनीकों का उपयोग तेजी से हो रहा है। स्पोट्र्स फर्म ईएसपीएन क्रिकइन्फो ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के साथ साझेदारी में 'सुपरस्टैट्स' नामक तकनीकी मंच विकसित किया है जो क्रिकेट के आंकड़ों का विश्लेषण करने में मदद करेगा। यह प्लेटफॉर्म भाग्य संबंधित आंकड़े, अनुमान और स्मार्ट आंकड़े जैसी मैट्रिक्स का एक मिला-जुला स्वरूप है जो खेल के किसी कार्यक्रम के बारे में बताने के लिए डेटा साइंस का उपयोग करता है।  

आईआईटी मद्रास शोध एवं ज्ञान डेटा प्रा. लि. संस्थान से संबद्ध एक कंपनी है जिसने ईएसपीएन क्रिकइन्फो के क्रिकेट विशेषज्ञों और उसके संवर्धित ज्ञान भंडार की मदद से सुपरस्टैट्स प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इस डेटाबेस में 10 साल का विस्तृत डेटा मौजूद है और वैज्ञानिक प्रक्रिया, प्रसंस्करण तथा मशीन लर्निंग के जटिल एल्गोरिद्म का उपयोग करता है। आईआईटी मद्रास के अनुसार यह एल्गोरिद्म क्रिकेट के लिए सटीक तथा तेज गति से गणना करता है, भाग्य के प्रभाव को जांचता है और रियल टाइम में खिलाडिय़ों के प्रदर्शन का विश्लेषण करता है।

आईआईटी मद्रास में रसायन इंजीनियरिंग विभाग के प्राध्यापक रघुनाथन रंगास्वामी कहते हैं, 'भाग्य की गणना करने के कई तरीके हो सकते हैं लेकिन ये एल्गोरिद्म तर्क सहित व्याख्या करता है और समय के साथ साथ सुधार करता रहता है जिससे खेल के पूरे टूर्नामेंट में परिस्थितियों के अनुसार होने वाले बदलावों का पता चल सके।' रंगास्वामी और आईआईटी मद्रास के प्राध्यापक महेश पंचागनुला ईएसपीएन टीम के साथ मिलकर इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे हैं। 

अभी तक भाग्य की गणना केवल बोलचाल और गुणात्मक तौर पर ही होती थी। उदाहरण के लिए, एक गेंदबाज भले ही बल्लेबाज को रन ना बनाने दे लेकिन हो सकता है कि वह मैच में कोई भी विकेट न ले पाए या बल्ले के किनारे से लगी गेंद सीमा रेखा को पार कर जाए। इसके बारे में कोई नहीं बता सकता कि खेल के दौरान कोई टीम या खिलाड़ी कितना भाग्यशाली हो। 'भाग्य सूचकांक' एक मैट्रिक्स है जो टॉस, अंपायर द्वारा होने वाली गलतियां, डिसमिसल, नो-बॉल, कैच छूटने आदि भाग्य आधारित कई घटनाओं के विश्लेषण की सहायता से परिणाम पर पहुंचती है। भाग्य आधारित घटनाओं के मापन में डेटा साइंस एल्गोरिद्म विभिन्न परिदृश्यों के विश्लेषण के जरिये संभावनाएं व्यक्त करता है। 'रन संभावनाओं' के जरिये भाग्य आधारित घटनाओं के प्रभाव के सामान्यीकरण ने इस तरह की सभी घटनाओं को एक समान मंच पर ला दिया है। इससे यह बताना काफी आसान हो गया है कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान कौन सी टीम या खिलाड़ी सबसे अधिक भाग्यशाली होगा। 

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और अंडर-19 क्रिकेट टीम के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ बताते हैं कि साल 2009 में भाग्य ने उनके करियर में बड़ी भूमिका निभाई। वह कहते हैं, 'मुझे शायद किनारे किया जाने वाला था और इंगलैंड के खिलाफ मोहाली में अतिरिक्त मौका दिया गया। मैं नंबर 3 पर बल्लेबाजी करने आया और स्टुअर्ड ब्रॉड ने एक बाउंसर फेंका। यह बल्ले के ऊपरी हिस्से पर लगा और मेरे मन में तुरंत आया, 'ओह गॉड, मैं फिर से आउट हो गया।' फाइन लेग पर खड़े खिलाड़ी से खोड़ा पहले गेंद गिर गई। मैंने उस खेल में शतक लगाया और इसके बाद आगे के कई साल मेरे लिए बेहतरीन रहे। इसमें इंगलैंड के खिलाफ 300 रन की पारी भी शामिल है।'

इस ऐप्लिकेशन में संभावना व्यक्त करने वाली प्रणाली भी मौजूद है जो भविष्यवाणी करने वाले उपकरण की तरह काम करती है। यह रनों का पीछा कर रही टीम के जीतने की संभावनाएं, पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम के संभावित रनों की संख्या, किसी ओवर में विकेट गिरने की संभावना और प्रत्येक गेंदबाज के लिए अलग-अलग परिणाम आदि के बारे में बताती है।

डेटा साइंस एल्गोरिद्म खेल के दौरान विभिन्न समयअंतराल पर अलग-अलग पैटर्न का विश्लेषण करने के लिए पिछले सालों के आंकड़ों का विश्लेषण करता है। इसके बाद वास्तविक खेल के आंकड़ों को शामिल करते हैं और सटीक आंकड़े देने का प्रयास करता है। स्मार्ट स्टैट्स में स्मार्ट विकेट्स, खिलाड़ी का गुणवत्ता सूचकांक, खिलाड़ी पर दबाव आदि कई जानकारियों को शामिल किया जाता है। इनके जरिये खेल के दौरान शानदार प्रदर्शन करने वाले बल्लेबाज या गेंदबाज की पहचान की जा सकती है और पावरप्ले जैसे खेल के अलग अलग समय में रन तथा विकेट की संख्या का अनुमान लगाया जा सकता है।

रंगास्वामी कहते हैं कि आईआईटी मद्रास विभिन्न क्षेत्रों में एआई तकनीक के उपयोग पर काम कर रहा है जिसमें फिनटेक, विनिर्माण, स्मार्ट सिटी, बायोलॉजिकल सिस्टम इंजीनियरिंग और स्वास्थ्य क्षेत्र शामिल है। वह कहते हैं, 'इस परियोजना के जरिये हम स्पोट्र्स एनालिटिक्स के क्षेत्र में कदम बढ़ा रहे हैं।'
Keyword: AI, robot, cricketer,,
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