बिजनेस स्टैंडर्ड - मुख्यमंत्री मोदी की चाल ने बता दिया था प्रधानमंत्री मोदी का हाल
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, September 17, 2019 08:36 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

मुख्यमंत्री मोदी की चाल ने बता दिया था प्रधानमंत्री मोदी का हाल

नीति नियम
मिहिर शर्मा /  March 20, 2019

सामान्य तौर पर देखें तो जब एक केंद्र सरकार अगले जनादेश के लिए चुनाव मैदान में उतर रही हो तो उसे आंकड़ों पर जांचना मुफीद रहेगा। मसलन उसे मिले अवसरों के अनुपात में वृद्घि के मोर्चे पर उसका प्रदर्शन कैसा रहा? इस मोर्चे पर विभिन्न पूर्ववर्ती सरकारों के समक्ष उसका प्रदर्शन कैसा है? घाटे के मोर्चे पर सरकार का प्रदर्शन कैसा रहा और व्यय का कितना हिस्सा उत्पादक साबित हुआ? दुर्भाग्यवश 2019 में यह विकल्प आसानी से उपलब्ध नहीं है। वजह यह कि इसके लिए जो आंकड़े इस्तेमाल किए जाने थे उन पर अब लोगों को यकीन ही नहीं है। जरा विचार कीजिए कि अगर पिछली सीरीज के आंकड़ों से मिलाकर देखें तो नोटबंदी के बाद के कुछ वर्षों के दौरान जीडीपी के आंकड़े पिछले वर्षों के प्रदर्शन के समान या बेहतर रहे हैं। आमतौर पर इस पर यकीन नहीं किया जाता क्योंकि अधिकांश संकेतक इस बात की गवाही नहीं देते कि हम वृद्घि के मोर्चे पर पिछली सरकारों से बेहतर हैं। कोई भी व्यक्ति जो सन 2000 की तेजी के दौर का गवाह रहा है वह इसे गलत बताएगा। गत सप्ताह देश के विभिन्न संस्थानों तथा विदेशों के 100 से अधिक अर्थशास्त्रियों ने एक शिकायती पत्र पर हस्ताक्षर किए जिसमें देश की सांख्यिकी में राजनीतिक हस्तक्षेप की बात कही गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी आंकड़ा जो सरकार की उपलब्धियों पर संदेह पैदा करता हो, उसे संशोधित किया जाता है या दबा दिया जाता है। 

 
कुछ मामलों में मौजूदा सरकार के लिए यही मुफीद है कि उसके आंकड़ों का पिछली सरकारों से मिलान न किया जा सके। भारतीय इतिहास में कुछ ही सरकारों को ऐसे स्पष्टï लक्ष्य मिले हैं जैसे मौजूदा सरकार को। साफ है कि सरकार ने इन मौकों को गंवा दिया है। प्रधानमंत्री मोदी का प्रदर्शन उम्मीद से कमतर रहा है। इस बात पर एक तरह की सहमति है। मोदी एक बड़े सुधारक साबित होंगे और अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकेगे, यह उम्मीद इसलिए गलत साबित हुई क्योंकि बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री उनके कदमों और प्रदर्शनों की गलत व्याख्या की गई। 
 
सन 2013 में मैंने गुजरात मॉडल के प्रदर्शन पर नजर डाली थी और निष्कर्ष दिया था कि उसे बढ़ाचढ़ाकर पेश किया गया। उदाहरण के लिए 2004 से 2012 के बीच प्रति व्यक्ति खपत में बढ़ोतरी राष्टï्रीय औसत से कम थी। मोदी के कार्यकाल में गुजरात में वृद्घि दर महाराष्टï्र या तमिलनाडु से कमजोर रही। बल्कि अधिकांश मानव विकास सूचकांकों पर प्रदेश अन्य राज्यों से पिछड़ गया था। बतौर मुख्यमंत्री मोदी के प्रदर्शन को बढ़ाचढ़ाकर पेश किया गया और परिणामस्वरूप वह प्रधानमंत्री बन गए। अगर उसी तर्ज पर उन्हें दोबारा चुन लिया जाए तो चकित होने की आवश्यकता नहीं है। 
 
नोटबंदी को छोड़ दें तो बतौर प्रधानमंत्री मोदी के कदमों में भी कुछ चौंकाने वाला नहीं है। सच तो यह है कि 2014 में जहां अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने उनको बाजार समर्थक सुधारक माना था, वहीं वह काफी हद तक यथास्थितिवादी नजर आए। वास्तव में उनसे यही अपेक्षा थी। मोदी ने भले ही 'न्यूनतम सरकार' का जुमला इस्तेमाल किया हो लेकिन वह प्रतीकात्मकता और जुमलेबाजी का एक शुरुआती उदाहरण भर है जिसके जरिये उन्होंने विभिन्न मतदाता वर्ग को प्रभावित किया। मैंने उस वक्त मुख्यमंत्री रहे मोदी के भाषणों पर गौर किया और पाया उनके  भीतर सुधारकों वाली बात नहीं है। आइए एक बार फिर याद करते हैं उन परिस्थितियों को। हममें से अधिकांश लोगों को याद होगा कि मुख्यमंत्री मोदी वर्षों तक वस्तु एवं सेवा कर की राह की सबसे बड़ी बाधा बने रहे जबकि प्रधानमंत्री बनने के बाद वह इसका श्रेय लूटते हैं। 
 
मुख्यमंत्री मोदी ने कहा था कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियम शिथिल करने से केवल 'इटली के कारोबारियों' को फायदा होगा। उन्होंने कहा था कि श्रम कानूनों में बदलाव राज्यों को करना चाहिए केंद्र को नहीं। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा पेट्रोल कीमतों को तार्किक बनाने का विरोध करते हुए कहा था कि यह खतरनाक है और इससे देश को नुकसान पहुंचेगा। प्रति परिवार गैस सिलिंडर की संख्या सीमित करने को उन्होंने जनता के साथ धोखा बताया था। स्वयं उनकी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक जिस दिन संप्रग सरकार ने इन पिछड़े कदमों (डीजल को नियंत्रण मुक्त और एलपीजी सब्सिडी सीमित करने जैसे विवेकसम्मत निर्णय)की घोषणा की उसी दिन मोदी ने किसानों का 100 फीसदी कर्ज माफ किया और बिजली बिल में 50 फीसदी राहत दी। मोदी एक विकसित राज्य के सक्षम प्रशासक भर थे। वह प्रदेश की कुशल नौकरशाही और बड़े कारोबारियों से निजी रिश्तों पर निर्भर थे। कुछ लोगों ने कहा भी था कि यह कौशल प्रधानमंत्री कार्यालय में काम नहीं आता। वहां व्यक्तिगत परियोजनाओं के प्रबंधन के बजाय प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार और क्षमता निर्माण जैसे अहम कार्य करने होते हैं। 
 
निर्वाचन के पहले प्रधामनंत्री के वक्तव्य और उनका प्रदर्शन दोनों इस बात का सटीक ब्योरा देते हैं कि सरकार ने आगे चलकर कैसा प्रदर्शन किया। 2014 के पहले मुख्यमंत्री रहे मोदी ने कहा था कि बुनियादी ढांचा विकसित करना असली सुधार है। इस दिशा में वाकई काफी काम हुआ है। नीतिगत नवाचार और क्रियान्वयन के लिए सरकार काफी हद तक नौकरशाही पर निर्भर रही है। उसने निजीकरण से दूरी बनाए रखी और स्टार्ट अप को सहयोग के नाम पर सरकारी क्षेत्र की सहभागिता में इजाफा किया। सरकार ने निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीकरण किया है। सरकार ने 25 वर्ष के उदारीकरण को पलटते हुए दोबारा शुल्क और औद्योगिक नीति रूपी क्षेत्रवार प्राथमिकता का दौर शुरू किया। गुजरात के तर्ज पर खपत में वृद्घि कमजोर बनी रही। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्र की खपत। देश एक बार फिर आम चुनाव का सामना करने जा रहा है। ऐसे में कम से कम लोगों को यह पता होना चाहिए मोदी के संभावित दूसरे कार्यकाल से लोगों को किस तरह की उम्मीद रखनी चाहिए। आर्थिक सुधार एजेंडे पर नहीं है। यह कभी एजेंडे पर था ही नहीं।
Keyword: parliament, election, ECI, BJP, narendra modi,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 सऊदी अरब में उत्पादन बाधित होने से घरेलू बाजार में बढ़ेंगे तेल के दाम?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.