बिजनेस स्टैंडर्ड - खतरनाक बढ़ोतरी
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खतरनाक बढ़ोतरी

संपादकीय /  March 20, 2019

जानकारी के मुताबिक सरकार इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के विनिर्माण में काम आने वाले अहम घटकों के शुल्क में और अधिक इजाफा करने पर विचार कर रही है। खासतौर पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के बारे में जानकारी है कि वह कंप्रेसर पर लगने वाले आयात शुल्क में इजाफा करने पर विचार कर रहा है। ये कंप्रेसर एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर जैसे प्रशीतक उपकरणों में प्रयोग किए जाते हैं। इसके अलावा इनका इस्तेमाल प्री-कोटेड स्टील शीट और कॉपर ट्यूब में भी किया जाता है। ये चीजें भी उपरोक्त वस्तुओं की निर्माण प्रक्रिया में काम आती हैं। गत वर्ष भी कंप्रेसर पर लगने वाले शुल्क को 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी किया गया था। हालांकि इसके पीछे मूल विचार घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है, लेकिन ज्यादा संभावना यही है कि महंगे आयात का खमियाजा घरेलू उपभोक्ताओं को उठाना पड़ेगा। केवल आयात शुल्क बढ़ाने से उपभोक्ताओं या उत्पादकों के लिए हालात में शायद ही कोई खास बदलाव आए। करों को लेकर अतीत में जो भी बदलाव हुए उनका असर उपभोक्ताओं पर ही पड़ा। पहले वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और उसके बाद तमाम वातानुकूलकों, वॉशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटरों पर शुल्क वृद्धि। पिछली बढ़ोतरी में शुल्क दर दोगुनी बढ़ाकर 20 फीसदी कर दी गई।

 
कहा जा रहा है कि वाणिज्य मंत्रालय चालू खाते के बढ़ते घाटे को लेकर चिंतित है। जुलाई-सितंबर 2018 तिमाही में यह घाटा जीडीपी के 3 फीसदी के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था। शुल्क में बढ़ोतरी से आयातित वस्तुओं का मूल्य बढ़ेगा और चालू खाते के घाटे में कमी आएगी। हालांकि यह तरीका दूरदर्शी नहीं प्रतीत होता। इसके दीर्घकालिक परिणाम बहुत जोखिम भरे हो सकते हैं। इससे बड़ी कंपनियां अपना विनिर्माण विदेशों में स्थानांतरित करने पर भी विचार कर सकती हैं। एलसीडीपी टेलीविजन के पैनल पर शुल्क बढ़ाने का नतीजा उसका विनिर्माण वियतनाम स्थानांतरित किए जाने के रूप में सामने आ चुका है।
 
चालू खाते के घाटे की मौजूदा समस्या से निपटने का एकमात्र तरीका यह है कि निर्यात में स्थायित्व के साथ इजाफा किया जाए। यह लक्ष्य कैसे हासिल होगा? इसके लिए अनिवार्य तौर पर देश में एक ऐसा प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षेत्र विकसित करना होगा जो वैश्विक स्तर पर एकीकृत हो। परंतु उसके लिए जरूरी यह है कि सरकार इस प्रकार एकबारगी शुल्क में इजाफा नहीं करे। विनिर्माताओं को भी उनकी लागत को लेकर सुरक्षा का बोध होना आवश्यक है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे अपना कामकाज विदेशों में स्थापित करेंगे जहां घटकों की उपलब्धता और लागत के बारे में कुछ सुनिश्चितता होगी। शुल्क में बढ़ोतरी से देश के विनिर्माण उपक्रम हतोत्साहित होते हैं क्योंकि इसका असर वैश्विक आपूर्ति शृंखला में उनकी स्थिति पर पड़ता है। यह आपूर्ति शृंखला विनिर्माण क्षेत्र के लिए अहम है। यह बात इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरण क्षेत्र पर खासतौर पर लागू होती है। अगर निर्यात में इजाफा करने और अर्थव्यवस्था में आयात की गहनता कम करने के समन्वित प्रयास किए जाएं तो हालात में काफी सुधार देखने को मिल सकता है। 
 
बहुत खेद की बात है कि उद्योग जगत भी इस मसले पर साफ-साफ ढंग से बात नहीं कर रहा है। वह अंतिम उत्पाद पर शुल्क वृद्धि के स्वागत को तत्पर दिखता है क्योंकि इसमें घरेलू बाजार और उत्पादकों के संरक्षण का भाव निहित होता है। परंतु संरक्षणवादी नीति को किसी क्षेत्र के लाभ के लिए नियंत्रित नहीं किया जा सकता। ऐसे में यह बहुत आवश्यक है कि शुल्क दरों का कम रहना सुनिश्चित किया जाए और कॉर्पोरेट जगत से भी ऐसी मांग लगातार उठ रही है। इस बीच सरकार को भी यह समझना चाहिए कि वह ऐसे रास्ते पर नहीं चल सकती जो दीर्घावधि में विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने वाला साबित हो।
Keyword: electronic, product, excise, duty,,
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