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नेफेड करेगा एमएसपी पर सरसों की खरीद

दिलीप कुमार झा / मुंबई March 20, 2019

किसानों को कुछ राहत देते हुए सरकार द्वारा संचालित भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बड़ी मात्रा में सरसों खरीद की योजना बना रहा है जो हाजिर बाजार में चल रहे मौजूदा दामों से काफी अधिक है। मौजूदा रबी फसल की कटाई सीजन में सभी थोक मंडियों में सरसों के दाम 3,500-3,700 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर चल रहे हैं जो 4,200 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से करीब 15-20 प्रतिशत कम हैं। सरसों की एमएसपी प्रक्रिया में नेफेड के प्रवेश से उन किसानों को काफी राहत मिलेगी जो रिकॉर्ड स्तर के अधिक उत्पादन के पूर्वानुमान के बीच निराशा में अपनी उपज बेच रहे हैं। पैसे की कमी में किसान अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए खुले बाजार में अपनी उपज बेचते हैं।
 
नेफेड के चेयरमैन वीआर बोडा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया 'हमें सरसों की एमएसपी प्रक्रिया शुरू करने के लिए सरकार के आदेश का इंतजार है। खुले बाजार में प्रचलित कीमत से इतर हम एमएसपी पर सरसों की खरीद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बिक्री के लिए उपलब्ध आखिरी दाना तक हम खरीदेंगे।' सामान्य तौर पर मार्च की शुरुआत तक सरसों की कटाई शुरू हो जाती है। लेकिन तिलहन की बड़ी पेराई मिलों, गोदाम सुविधा देने वाली कंपनियों और व्यापारिक कंपनियों समेत निजी भागीदार नेफेड तथा सरकारी सहकारी संस्थाओंं जैसी सरकारी एजेंसियों के प्रवेश से पहले ही अपना स्टॉक तैयार कर लेते हैं। दामों पर कोई सकारात्मक प्रभाव डाले बिना इन निजी भागीदारों द्वारा जोरदार खरीद चलती रहती है।
 
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता ने कहा कि प्रमुख उत्पादक राज्यों में होली के त्योहार के आस-पास सरसों की आवक में लगातार सुधार होता है। हमें उम्मीद है कि नेफेड किसी जोरदार खरीद योजना के साथ मुनासिब वक्त पर आएगा लेकिन वह अपनी खरीद की मात्रा लंबे समय तक नहीं रखेगा जैसा कि एजेंसी ने कुछ साल पहले किया था। हम चाहेंगे कि इस सीजन में पेराई के लिए सारी सरसों उपलब्ध हो जाए ताकि ज्यादा मात्रा में खाद्य तेल प्राप्त किया जा सके और इसी अनुपात में आयात पर निर्भरता को कम किया जा सके।
 
नेफेड ने कुछ साल पहले तकरीबन 40 लाख टन सरसों की खरीद की थी। उस समय इसके दाम एमएसपी से नीचे चले गए थे। लेकिन एजेंसी ने इस संपूर्ण मात्रा को रोके रखा और कमजोर सीजन में इसे बेच दिया। इस वजह से मिलों की पेराई क्षमता मुख्य सीजन में निष्क्रिय पड़ी रही और उन्होंने कमजोर सीजन में उच्च क्षमता के साथ परिचालन किया। इस बीच एसईए ने अपने हालिया सर्वेक्षण में यह अनुमान जताया है कि मौजूदा सीजन में भारत का सरसों उत्पादन 85 लाख टन रहेगा जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है जबकि कृषि मंत्रालय के चौथे अग्रिम अनुमान के अनुसार पिछले वर्ष का उत्पादन 83.2 लाख टन रहा है। एक अन्य व्यापारिक संस्था सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री ऐंड ट्रेड ने 2018-19 सीजन के दौरान सरसों उत्पादन का अनुमान इससे भी अधिक 87 लाख टन जताया है।
 
यूरोपीय संघ द्वारा जैव ईंधन मानदंडों में बदलाव के कारण वर्तमान में वैश्विक खाद्य तेल उद्योग भारी दबाव से गुजर रहा है। उसने कच्चे पाम तेल (सीपीओ) की अपनी खपत कम कर दी है। कच्चे पाम तेल के उत्पादक - ​​मलेशिया और इंडोनेशिया भारत सहित अन्य वैकल्पिक बाजारों में अपनी उपज की डंपिंग कर रहे हैं। इससे सभी खाद्य तेलों और तिलहन की कीमतों में गिरावट आई है।
Keyword: agri, farmer, mustard, nefed, MSP,,
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