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माइंडट्री के लिए हमारी पेशकश दोनों के लिए बेहतर : एलऐंडटी

देव चटर्जी और रोमिता मजूमदार /  March 19, 2019

निर्माण क्षेत्र की दिग्गज एलऐंडटी ने आईटी फर्म माइंडट्री के अधिग्रहण की पेशकश की है, जिसे बेंगलूरु की फर्म ने जबरिया बोली करार दिया है। देव चटर्जी और रोमिता मजूमदार से बातचीत में एलऐंडटी के सीईओ व प्रबंध निदेशक एस एन सुब्रमण्यन और एलऐंडटी के सीएफओ और निदेशक मंडल के सदस्य आर शंकर रामन ने कहा कि कंपनी का प्रबंधन अपना सेवा कारोबार वहां बढ़ाना चाहता है, जहां रिटर्न ज्यादा है। एलऐंडटी ने कहा कि यह पेशकश दोनों के लिए बेहतर है और माइंडट्री इस पेशकश को जबरिया बोली के तौर पर न देखे। पेश हैं मुख्य अंश:

 
माइंडट्री के प्रवर्तकों में से एक सुब्रत बागची ने कहा है कि वह निश्चित तौर पर उन लोगों से पेड़ को बचाएंगे जो बुलडोजर लेकर आ गए हैं। इस पर आपकी राय? 
 
शंकर रामन : मेरे हिसाब से बागची जैसे कद वाले लोग को सड़क पर होने वाली लड़ाई के स्तर तक नीचे नहीं गिरना चाहिए। हम काफी सम्मानित हैं और हम इस तरह के वाकयुद्ध में शामिल होने से इनकार करते हैं। हमारे हिसाब से हमारा इरादा अच्छा है। हम इस अधिग्रहण को अपने पोर्टफोलियो व सेवा कारोबार में बढ़ोतरी के मौके के तौर पर देख रहे हैं। माइंडट्री के मौजूदा शेयरधारक वी जी सिद्धार्थ ने हमसे संपर्क किया था और ऐसा नहींं है कि हम इसकी खरीद के लिए निकल गए थे। सिद्धार्थ ने हमसे कहा था कि अपना शेयर रखने के लिए उन्हें सुरक्षित ठिकाना चाहिए क्योंकि वह करीब 20 साल से शेयरधारक हैं। सिद्धार्थ अपने शेयर नीलामी में बेच चुके होते। लेकिन उन्होंने नीलामी नहीं की क्योंकि वह माइंडट्री को बढ़ते देखना चाहते थे और वह हमारे पास इसलिए पहुंचे ताकि इस संस्कृति को आगे ले जाया जा सके। हमारे सामने मौका आया और हम इसे खोजने के लिए बाहर नहीं निकले थे। मुझे नहीं लगता कि वे एलऐंडटी की पृष्ठभूमि जानते हैं और इस तरह की टिप्पणी की।
 
कर्मचारियों से लेकर प्रबंधन ने एलऐंडटी की पेशकश का विरोध किया है। आपको क्यों लगता है कि माइंडट्री के कर्मचारियों को आपका समर्थन करना चाहिए?
 
एस एन सुब्रमण्यन : लोगों को यह समझने की दरकार है कि एलऐंडटी क्या है। यह 80 साल पुरानी कंपनी है और इसका मालिकाना हक कर्मचारियों व संस्थागत निवेशकों के पास है। एलऐंडटी की 90 फीसदी हिस्सेदारी कर्मचारियों के पास है और मौजूदा बाजार पूंजीकरण के हिसाब से इसकी कीमत 40,000 करोड़ रुपये बैठती है। हमने 1952 में कंपनी को सूचीबद्ध कराया और तब से हर साल लाभांश दे रहे हैं। हमारी कंपनी ने कई अहम परियोजनाएं पूरी की है। हम राष्ट्रीय कंपनी हैं। हमारे 1.14 लाख कर्मचारी हैं और 3.55 लाख अनुबंध पर हैं। निजी क्षेत्र में हम देश में सबसे बड़े नियोक्ता हैं। हमारा सर्विस पोर्टफोलियो कम जोखिम वाला है और लाभ आईटी कंपनियों के राजस्व का 15-16 फीसदी है। इसलिए सेवा कारोबार को तेजी से आगे बढऩे के लिए इसके अधिग्रहण का मतलब बनता है।
 
सिद्धार्थ से बातचीत कैसे शुरू हुई और आपकी क्या प्रतिक्रिया थी?
 
एस एन सुब्रमण्यन : जब सिद्धार्थ ने हमसे संपर्क किया तो हम तटस्थ थे और मुझे नहींं पता नहीं था कि कैसे प्रतिक्रिया दी जाए। वास्तव में पांच-छह साल पहले माइंडट्री के प्रबंधन ने पहले हमसे संपर्क कर पूछा था कि क्या वे हिस्सेदारी खरीदना चाहेंगे। हम उस समय इच्छुक नहींं थे क्योंकि सिद्धार्थ उस समय हिस्सा नहीं बेचना चाहते थे और आईटी क्षेत्र में हमारी कंपनी काफी छोटी थी। आज हमारे पास 2 अरब डॉलर का आईटी कारोबार है, जो 20-22 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। कुछ महीने पहले सिद्धार्थ दोबारा आए तब हमने चेयरमैन व बोर्ड के सामने प्रस्ताव रखा और हमसे इस प्रस्ताव पर आगे बढऩे को कहा गया।
 
लेकिन माइंडट्री के प्रवर्तक एलऐंडटी की पेशकश को जबरिया बता रहे हैं?
 
एस एन सुब्रमण्यन : हमने जबरिया बोली नहीं लगाई है। एलऐंडटी के सिद्धांत के हिसाब से हम किसी कंपनी में अल्पांश हिस्सेदारी नहीं लेते हैं। हम कम से कम 26 फीसदी चाहते हैं और अगर संभव हो तो हम बहुलांश हिस्सेदारी चाहते हैं। मैं प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं करता। हम माइंडट्री के मामले में दोस्ताना कदम उठाना चाहते थे। दुर्भाग्य से सिद्धार्थ और माइंडट्री के प्रवर्तकों की अपनी-अपनी राय है कि बिक्री पर कैसे आगे बढऩा चाहिए। सिद्धार्थ अभी बेचकर बाहर निकलना चाहते हैं और हमारे पास रकम है और हम अपना सर्विस पोर्टफोलियो बढ़ाना चाहते हैं। हम माइंडट्री को स्वतंत्र कंपनी बनाए रखना चाहते हैं और प्रबंधन फैसला करेगा कि भविष्य में वह किस दिशा में आगे जाना चाहता है।
 
सिद्धार्थ का हिस्सा खरीदने से पहले क्या आपने माइंडट्री के प्रवर्तकों से बात की थी?
 
एस एन सुब्रमण्यन : उनके साथ हमारी कई बैठक हुई और दोस्ताना व सहयोगपूर्ण माहौल में। हमने उनसे वास्तविकता पर नजर डालने को कहा : अगर हमने सिद्धार्थ का हिस्सा नहीं खरीदा होता तो कोई और ले लेता। मुझे नहीं पता कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है। उन्हें हमारे इतिहास पर नजर डालनी चाहिए। एलऐंडटी के पहले चेयरमैन को पद्म भूषण सम्मान मिला था और मौजूदा चेयरमैन को भी सम्मान मिला। 
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