बिजनेस स्टैंडर्ड - भाजपा के लिए बंगाल में सेमी-फाइनल
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भाजपा के लिए बंगाल में सेमी-फाइनल

अभिषेक रक्षित /  03 19, 2019

लोकसभा चुनाव

बिजनेस स्टैंडर्ड भाजपा के लिए बंगाल में सेमी-फाइनलभारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए आगामी लोक सभा चुनाव पश्चिम बंगाल में 'सेमी-फाइनल' के समान होंगे क्योंकि उसके बाद वह राज्य में 2021 के विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस से सीधा मुकाबला करेगी।  1980 के दशक में कमजोर शुरुआत करने वाली भाजपा की 2014 तक पश्चिम बंगाल की राजनीति में मामूली पैठ थी। यह हर बार लोक सभा चुनावों में एक या दो सीट जीतती थी और इसकी वोट हिस्सेदारी मामूली थी। यह हिस्सेदारी भी हिंदुत्व के खिलाफ उठती आवाजों के कारण घट रही थी। लेकिन वाम सरकार के गिरने और उसका वोट बैंक बिखरने से अचानक भाजपा के लिए स्थितियां बेहतर हो गई हैं। पार्टी न केवल वाम मोर्चे के छिटकते वोट बैंक को हासिल करने में सफल रही है बल्कि इसने हिंदी भाषी और आदिवासी क्षेत्रों में गहरी पैठ बनाना शुरू कर दिया है। भाजपा राज्य में अपनी सदस्यता बढ़ाने पर ध्यान दे रही है, जो इस समय 43 लाख से अधिक है। 

भाजपा के एक नेता ने कहा, 'हम पूर्व वाम मोर्चे के वोट बैंक को हासिल करने में सफल रहे हैं। वाम मोर्चे की तरह भाजपा भी कैडर आधारित पार्टी है, लेकिन उसकी विचारधारा बहुत अलग है।' उन्होंने कहा कि जब बंगाल में वाम मोर्चे का शासन था, तब भाजपा को विकल्प या मजबूत ताकत नहीं माना जाता था। इसकी वजह यह थी कि पार्टी की विचारधारा को 'छद्म धर्मनिरपेक्ष बंगालियों' का मामूली समर्थन मिलता था। अब भाजपा राज्य में खुद को मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में पेश करने की स्थिति में आ गई है।उनकी राज्य में लोक सभा सीटें 2 हैं। हालांकि हाल में तृणमूल कांग्रेस के दो सांसद भाजपा में शामिल हो गए हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इसके बावजूद इन सीटों के आधार पर भाजपा को मुख्य विपक्षी पार्टी नहीं माना जा सकता है। राजनीति विशेषज्ञ विश्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा, 'वाम मोर्चा और कांग्रेस निश्चित रूप से वोट हिस्सेदारी गंवाएंगे क्योंकि उनके बीच सीटों के बंटवारे को लेकर कोई समझौता नहीं हो पाया है और इसका ज्यादातर फायदा तृणमूल कांग्रेस और भाजपा को मिलेगा। मेरा मानना है कि इस बार भाजपा अपनी मत हिस्सेदारी बढ़ाकर 33 से 35 फीसदी करने में कामयाब रहेगी।' 

भाजपा की वोट हिस्सेदारी वर्ष 2014 के आम चुनावों में 18 फीसदी थी, जो 2009 के आम चुनावों की तुलना में 11.86 फीसदी अधिक थी। रोचक बात यह है कि माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने 2014 के लोक सभा चुनावों में 10.1 फीसदी वोट हिस्सेदारी गंवाई और उसे केवल दो सीटों पर जीत मिली, जबकि 2009 के चुनावों में पार्टी ने राज्य में 15 सीटें जीती थीं। हालांकि वर्ष 2018 तक भाजपा राज्य में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई।

भाजपा राज्य में पंचायत चुनावों में दूसरे स्थान पर रही, जिसमें उसे 5,779 सीटें मिली। सबसे अहम बात यह है कि राज्य के प्रत्येक जिले में पार्टी के उम्मीदवार ग्राम पंचायत स्तर पर चुने गए। भाजपा को कुल सीटों में से 11.9  फीसदी सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस को 2.2 फीसदी और माकपा को 3 फीसदी सीटें मिलीं। इसके अलावा राज्य की 294 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी 3 विधायक भेजने में सफल रही। यह 1952 के बाद उसके विधायकों की सबसे अधिक संख्या है। भाजपा के पूववर्ती भारतीय जन संघ ने 1952 के विधानसभा चुनावों में 9 सीटें जीती थीं। 

भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के उपाध्यक्ष चंद्र कुमार बोस का मानना है कि पार्टी की जनता को लुभाने में सफलता तीन स्तंभों पर टिकी हुई है। ये तीन स्तंभों में से पहला यह धारणा है कि भाजपा की नीति उद्योगों के अनुकूल है, जिससे बंगाल में औद्योगीकरण होगा और इसलिए ज्यादा नौकरियों का सृजन होगा। दूसरा अगर राज्य में केंद्र में सत्तारूढ़ दल के ज्यादा सांसद और विधायक होंगे तो राज्य को फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा, 'अब यह साफ हो गया है कि राजग फिर से सत्ता में आ रहा है और पश्चिम बंगाल के लोगों ने यह समझना शुरू कर दिया है कि उनका सांसद केंद्र में सत्तारूढ़ दल का होगा तो यह उनके लिए फायदेमंद होगा।'

बोस के मुताबिक तीसरा कारक यह है कि भाजपा की बंगाली हिंदुओं में पैठ बढ़ रही है, जिनकी इस राज्य के कुल मतदाताओं में 48 फीसदी हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा, 'ममता की अल्पसंख्यकों को खुश करने की नीति से राज्य में हिंदू आबादी खुश नहीं है और इसलिए वे भाजपा को विकल्प मानने लगे हैं।' हालांकि आधिकारिक रूप से पार्टी ने राज्य की कुल 42 सीटों में से 20 से अधिक जीतने का अनुमान जताया है, लेकिन पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि भाजपा कम से कम 10 से 12 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस को कड़ी टक्कर देगी। ये सीटें मुख्य रूप से उत्तरी बंगाल, सीमावर्ती क्षेत्रों और आदिवासी अल्पसंख्यकों के दबदबे वाली हैं। 

भाजपा राज्य में अपनी सदस्यता और प्रशंसकों की संख्या बढ़ा रही है। पार्टी राज्य के सीमावर्ती जिलों जैसे अलीपुर, डुआर्स, कूच बिहार और मालदा में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। इन जिलों में बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों की समस्या है। यह मालदा जैसे आदिवासी क्षेत्रों को भी अपने प्रभाव में लाने की कोशिश कर रही है।  बोस ने कहा, 'वर्ष 2021 के विधान सभा चुनावों के अंतिम मुकाबले से पहले भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल के लोक सभा चुनाव सेमी-फाइनल हैं। तृणमूल कांग्रेस का जनाधार घट रहा है, उसके नेता अन्य दलों में जा रहे हैं और लोग एक विकल्प चाहते हैं, जो भाजपा मुहैया करा सकती है।'
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