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उपभोक्ता वस्तुओं पर सरकार फिर बढ़ा सकती है आयात शुल्क

अर्णव दत्ता और शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली March 18, 2019

पिछले साल टेलीविजन (टीवी) के कुछ कंपोनेंट्स पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी के बाद अब सरकार एक बार फिर उपभोक्ता वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने पर विचार कर रही है। इस बार एयर कंडिशनर (एसी), रेफ्रिजरेटर्स, वाशिंग मशीन और माइक्रोवेव ओवन जैसे घरों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर शुल्क बढ़ सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि वाणिज्य मंत्रालय एसी और रेफ्रिजरेटरों के कंप्रेसर, कंडेंसर बनाने के काम आने वाले प्री कोटेड स्टील शीट और कॉपर ट्यूब आदि पर सीमा शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। पिछले साल कंप्रेसर पर शुल्क 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और पूरी तरह से तैयार एसी, रेफ्रिजरेटर्स और वाशिंग मशीन सहित कई अन्य सामानों पर शुल्क दोगुना कर 20 प्रतिशत कर दिया गया था। 
 
इस प्रस्तावित कदम के असर को लेकर विनिर्माता चिंतित हैं। उनका कहना है कि पिछली बार आयात शुल्क बढऩे पर इन सामानों के दाम में 3 से 5 प्रतिशत बढ़ोतरी करनी पड़ी थी, वहीं अगर फिर आयात शुल्क बढ़ता है तो इसका स्थानीय विनिर्माण गतिविधियों पर बुरा असर पड़ सकता है। दरअसर उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र के ज्यादातर कारोबारी टीवी और घरेलू उपकरणों के कंपोनेंट पर आयात शुल्क खत्म किए जाने की मांग कर रहे हैं।  कोरिया की कंपनी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के होम अप्लायंसेज और एसी के उपाध्यक्ष विजय बाबू के मुताबिक यह मसला केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जा चुका है। 
 
अन्य बड़े कारोबारियों जैसे लॉयड, पैनासोनिक, सैमसंग ने भी व्यक्तिगत रूप से या उद्योग संगठन कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड अप्लायंसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीईएएमए) के माध्यम से अधिकारियों से संपर्क साधा है। गोजरेज ऐंड बॉइस केकार्यकारी उपाध्यक्ष और बिजनेस हेड व सीईएएमए के अध्यक्ष कमल नंदी ने कहा, 'कंपोनेंट पर अब सीमा शुल्क में और बढ़ोतरी नहीं की जानी चाहिए क्योंकि इन कंपोनेंट के भारत में विनिर्माण का वातावरण नहीं है। हम तैयार माल पर शुल्क बढ़ाए जाने के कदम का समर्थन करते हैं, लेकिन हम चाहते हैं कि कंपोनेंट पर सीमा शुल्क कम हो।'
 
विनिर्माता पहले से ही लागत का बढ़ता बोझ वहन कर रहे हैं, उसके बावजूद 2017 के मध्य से कीमतों में कम से कम तीन बार बढ़ोतरी करनी पड़ी है। पहली बार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) बढऩे पर, दूसरी बार स्टील और प्लास्टिक जैसे कच्चे माल के दाम में तेज बढ़ोतरी की वजह से और तीसरी बार सितंबर 2018 में शुल्क बढ़ाए जाने से घरेलू उपकरणों के दाम बढ़े थे।  सूत्रों ने कहा कि देश का चालू खाते का घाटा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार इन उपकरणों पर कर बढ़ाने पर विचार कर रही है। जुलाई-सितंबर 2018 में भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी का 2.9 प्रतिशत हो गया, जो इसके पहले की तिमाही के 2.4 प्रतिशत से ज्यादा है। 
 
लॉयड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशि अरोड़ा सरकार के इस संभावित कदम से बेफिक्र हैं। बहरहाल वह चाहते हैं कि ओपन सेल और पैनल जैसे टीवी पाट्र्स पर आयात शुल्क खत्म होना चाहिए। ओपन सेल पर 5 प्रतिशत और फ्लैट पैनल पर 7.5 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने की वजह से सैमसंग को अपना विनिर्माण काम चेन्नई से वियतनाम ले जाना पड़ा था। एसी और रेफ्रिजरेटर में इस्तेमाल हो वाले 80 प्रतिशत कंप्रेसर का आयात होता है। वहीं रेफ्रिजरेटर जैसे उपकरणों के बाहरी कवर में इस्तेमाल होने वाले प्रीकोटेड स्टील शीट और कंडेंसर का भी बड़े पैमाने पर आयात होता है। माइक्रोवेव ओवन और एसी के इंडोर यूनिट का आयात यूरोप और चीन से होता है। इस तरह से अगर इन कंपोनेंट के आयात शुल्क में अगर कोई बढ़ोतरी होती है तो स्थानीय विनिर्माताओं पर बुरा असर पडऩे की संभावना है।  
Keyword: tv, fridge, ac, component, duty,,
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