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हरियाणा में जातिगत खाई हुई चौड़ी

राधिका रामशेषन /  March 17, 2019

जींद विधानसभा उपचुनाव का 31 जनवरी को आया नतीजा हरियाणा की राजनीति के लिए दो मायनों में अहम था। पहला यह कि इससे राज्य के प्रभावशाली जाटों और गैर-जाटों के बीच सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक खाई और चौड़ी हो गई है। दूसरा यह कि इसने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों के बीच मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की स्थिति मजबूत कर दी। हरियाणा राज्य बनने के बाद भाजपा ने पहली बार जींद सीट पर जीत दर्ज की।  एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, 'ऐसा लगता है कि गैर-जाट मतदाता भाजपा के साथ एकजुट हो गए थे। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था।' विश्लेषक ने कहा कि खट्टर पंजाबी हैं और यही बात भाजपा के पक्ष में गई। राजनीतिक दलों के पास मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक राज्य में जाटों की आबादी 21 से 22 फीसदी है। 

 
भाजपा के एक सूत्र ने कहा, 'जाट लाभ की स्थिति में थे क्योंकि वे एकजुट होकर वोट देते थे। वे समूहों में रहते हैं। उदाहरण के लिए आसपास के 72 गांव मिलकर खाप पंचायत बनाते हैं। अगर किसी गांव में 1,000 मतदाता हैं तो उनमें 500 से अधिक जाट हैं।' जाटों में इस बात को लेकर रोष था कि हरियाणा की अगुआई कोई जाट नहीं बल्कि एक पंजाबी मुख्यमंत्री कर रहा है। इससे फरवरी 2016 में एक बार फिर जाट आरक्षण की आग सुलग उठी और इसने हिंसक जातीय संघर्ष का रूप ले लिया। सूत्र ने कहा, 'बनिया और पंजाबी समुदाय के बीच कारोबारी प्रतिद्वंद्विता थी। उन्होंने कभी एकदूसरे को वोट नहीं दिया। लेकिन जब जाटों ने इन दोनों समुदायों को निशाना बनाया और उनकी संपत्ति को नष्ट किया तो वे साथ हो लिए। दोनों ने पहले स्थानीय चुनावों और फिर जींद उपचुनाव में मिलकर मतदान किया।'
 
मुख्यमंत्री के रूप में खट्टर के शुरुआती दिन उथलपुथल वाले थे। दो स्वयंभू धर्मगुरुओं रामपाल और गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा की गिरफ्तारी के कारण उन्हें व्यापक विरोध का सामना करना पड़ा। इन दोनों धर्मगुरुओं को हत्या और बलात्कार का दोषी पाया गया था। पिछड़े वर्गों और दलितों के बीच पैठ रखने वाले संगठन डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम ज्यादा लोकप्रिय थे और राजनेता भी उनके दरवाजे पर खड़े रहते थे। पहले उनकी कांग्रेस के साथ हमदर्दी थी लेकिन 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने सार्वजनिक तौर पर उनकी सराहना की तो वह भाजपा के साथ हो लिए। राम रहीम ने वर्ष 2014 के हरियाणा विधानसभा चुनावों में मतदान से 48 घंटे पहले डेरा समर्थकों को भाजपा के पक्ष में वोट देने का ऐलान किया। हरियाणा में हर विधानसभा में 8,000 से 10,000 डेरा समर्थक हैं। हरियाणा भाजपा के प्रवक्ता रमन मलिक ने दावा किया, 'जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा (कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री) की सरकार थी तो इन दो धर्मगुरुओं ने कभी भी अदालत के समन का सम्मान नहीं किया। हमारे मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था को कम से कम नुकसान पहुंचाने के साथ इन दोनों को गिरफ्तार कराया।'
 
मलिक का कहना है कि राजनीति में खट्टर का उभार भाजपा के उभार की तरह था। उन्होंने कहा, 'वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता थे जो प्रचारक बन गए। फिर वह हरियाणा के संगठन सचिव बने। इसके बाद वह विधायक और मुख्यमंत्री बने। एक नेता के रूप में उनका विकास हुआ है।' भाजपा के एक अन्य विधायक ने कहा, 'शुरुआत में पुराने नेता उनके नेतृत्व में काम करने से खुश नहीं थे। यही वजह है कि उन्हें अस्थिर करने की कोशिश की गई। लेकिन मुख्यमंत्री ने हार नहीं मानी।' 
 
खट्टर के जुझारूपन की वजह मोदी के साथ उनका तालमेल है। वह हरियाणा में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद खत्म करके एक साफ सुथरी सरकार देना चाहते हैं। पंचकूला के सांसद रतन लाल कटारिया कहते हैं कि जब वह हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष थे तो खट्टर संगठन सचिव थे। उस समय मोदी महासचिव थे और हरियाणा के प्रभारी थे। वे सब एक टीम की तरह काम करते थे। महेंद्रगढ़ के सांसद और अब भाजपा की राष्ट्रीय सचिव सुधा यादव ने दावा किया, 'मुख्यमंत्री ने नियुक्ति, पोस्टिंग और तबादले में पारदर्शिता कायम की है। पिछली सरकारों के दौर में इनमें भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद का बोलबाला था। पहले 80 फीसदी नौकरियां जाटों को मिलती थी। अब हर किसी को मौका मिलता है।' हरियाणा के प्रभारी और भाजपा के महासचिव अनिल जैन ने कहा कि राज्य में पार्टी की सफलता में संगठन और केंद्र की दरियादिली की अहम भूमिका है। जैन ने कहा, 'शुुरुआत में हरियाणा में हमारा कोई जनाधार नहीं था। हमने कई रणनीतियों के दम पर विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की। पंचायत चुनावों में हमने कड़ी मेहनत की, कार्यकर्ताओं का इक_ा किया और उनकी समस्याओं को सुनकर उन्हें दूर किया। हमने अपने चुनाव चिह्न पर पंचायत चुनाव नहीं लड़े लेकिन अच्छा प्रदर्शन किया। पांच बड़े स्थानों पर हमने महापौर का चुनाव जीता। हम हमने जींद में जीत दर्ज की तब तक हमें यह विश्वास हो गया था कि हमने हरियाणा में अपनी मजबूत पैठ बना ली है।'
 
केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि पीएम-किसान योजना से किसान खुश हैं क्योंकि इसमें उन्हें सम्मान दिया गया है। उन्होंने कहा, 'पहली बार मेरे संसदीय क्षेत्र के किसान कह रहे हैं कि सरकार ने उन्हें एक पहचान दी है और उनके साथ लक्षित लाभार्थी की तरह व्यवहार नहीं किया है।' भाजपा के राज्य सभा सदस्य और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल डीपी वत्स ने कहा कि पुलवामा में आतंकवादी हमले और पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकियों के ठिकाने पर वायुसेना के हमले के बाद राष्ट्रवाद चरम पर है और यह जाट-गैर-जाट विभाजन को खत्म कर देगा। 
Keyword: haryana, manohar lal khattar, BJP,,
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