बिजनेस स्टैंडर्ड - कार नई हो या पुरानी, बीमा कवर दूर करेगा परेशानी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, July 20, 2019 05:12 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

कार नई हो या पुरानी, बीमा कवर दूर करेगा परेशानी

संजय कुमार सिंह /  March 17, 2019

बेंगलूरु में पिछले दिनों येलहांका वायु सेना अड्डïे पर पार्किंग में खड़ी करीब 300 कारें अचानक आग की लपटों में समाकर खाक हो गईं। कुछ अरसे बाद ही चेन्नई में भी यूटू कैब्स की करीब 200 कारें जलकर राख हो गईं। इन दोनों घटनाओं में नुकसान तो हुआ, लेकिन इन्होंने याद दिला दिया कि कार मालिकों के लिए अपनी कार का पूरा बीमा कराना कितना जरूरी है। जब लोगों की कार और बाइक पुरानी होने लगती हैं तो अक्सर वे हर साल उनका बीमा कराना बंद कर देते हैं या केवल थर्ड पार्टी (टीपी) बीमा खरीदते हैं, जो अनिवार्य होता है। पैसा बचाने के चक्कर में वे ओन डैमेज (ओडी) बीमा छोड़ देते हैं। हकीकत में ओन डैमेज कवर ही वह बीमा होता है, जो आग लगने पर मालिक को नुकसान से बचाता है। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में वाहन बीमा प्रमुख सज्जा प्रवीण चौधरी कहते हैं, 'व्यापक बीमा कवर खरीदना जरूरी है। असल में आपको जितना जोखिम दिखाई देता है, आपकी कार को उससे कहीं ज्यादा जोखिम हो सकता है।'

 
जब बीमा खरीदें तो सुनिश्चित कर लें कि बीमा में घोषित मूल्य यानी आईडीवी (कार का जितनी रकम का बीमा होता है) एकदम सही हो। शोरूम से निकलकर सड़क तक आने पर कार की कुल कीमत में जीएसटी, पंजीयन शुल्क, रोड टैक्स और बीमा प्रीमियम सभी शामिल होते हैं। इसमें से बीमा का खर्च निकाल दीजिए। बची हुई रकम में मूल्यह्रïास दर लागू होती है और उसके बाद साल का आईडीवी निकलता है। पहले पांच साल में आईडीवी एक तालिका के हिसाब से निर्धारित किया जाता है, जो भारतीय मोटर शुल्क, 2001 में दी गई है। पांच साल से अधिक पुराने वाहनों पर आईडीवी बीमा कंपनी और बीमा कराने वाले की रजामंदी से तय किया जाता है। बीमा करने वाले अपनी तालिका का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें वाहनों के बाजार मूल्य दिए होते हैं। हालांकि वे आईडीवी तय करने में कुछ लचीलापन दिखाते हैं। पैसा बचाने के फेर में अक्सर लोग कोशिश करते हैं कि आईडीवी कम रखा जाए। लेकिन ऐसा करने की सलाह किसी को नहीं देनी चाहिए। 
 
कभी-कभी बीमा कंपनियां भी आपकी बात मानकर आपको एक साल का आईडीवी दूसरे साल भी जस का तस रखने की इजाजत दे देती हैं। बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस में मोटर अंडरराइटिंग एवं मोटर क्लेम्स प्रमुख संजय सक्सेना कहते हैं, 'जिन मॉडलों की मांग बाजार में बहुत ज्यादा होती है, उनके बाजार मूल्य में साल-दर-साल तब्दीली नहीं आती। यही वजह है कि कभीकभार बीमा कंपनियां आपको आईडीवी जस का तस रखने देती हैं।' डिजिट इंश्योरेंस के एक्चुअरी आदर्श अग्रवाल की सलाह है कि आईडीवी को एकदम सही स्तर पर रखना चाहिए। वह कहते हैं, 'अगर आप आईडीवी को वाजिब कीमत से अधिक कर लेते हैं तो आपको ज्यादा प्रीमियम देना पड़ेगा। अगर आप आईडीवी कम रखते हैं तो वाहन नष्टï होने की सूरत में आपको बाजार मूल्य से कम मुआवजा हासिल होगा।'
 
गाड़ी पूरी तरह नष्टï होने पर रिटर्न टु इन्वॉयस नाम का ऐड-ऑन बीमा कवर आपके काम आ सकता है। अगर किसी ग्राहक ने ओन डैमेज बीमा कराया है और उसकी कार जलकर पूरी तरह खत्म हो जाती है तो उसे आईडीवी के बराबर मुआवजा हासिल होता है। जैसे-जैसे गाड़ी पुरानी होती जाती है, उसका आईडीवी भी कम होता जाता है। मसलन किसी कार का इन्वॉयस मूल्य 5 लाख रुपये था और उसका आईडीवी 3 लाख रुपये ही है। अगर वह कार पूरी तरह नष्टï हो जाती है तो ओन डैमेज बीमा के तहत उसे मुआवजे के तौर पर आईडीवी मिलेगा यानी 3 लाख रुपये ही उसके हाथ में आएंगे। लेकिन अगर उसने रिटर्न टु इन्वॉयस ऐड-ऑन कवर भी लिया है तो बाकी 2 लाख रुपये भी उसके हाथ आ जाएंगे।
 
अगर गाड़ी पूरी तरह खत्म नहीं होती बल्कि उसे आंशिक नुकसान ही होता है तो जीरो-डेप्रिसिएशन बीमा कारगर साबित होता है। मरम्मत के एवज में भुगतान करते समय बीमा कंपनियां पुर्जों की पूरी कीमत वाहन मालिक को नहीं चुकाती हैं। एसबीआई जनरनल इंश्योरेंस में नैशनल अंडरराइटिंग मैनेजन - रिटेल तुषार धीमार कहते हैं, 'बीमा कंपनियां कुछ पुर्जों के लिए मुआवजा देते वक्त थोड़ी रकम काट लेती हैं। मिसाल के तौर पर धातु से बने पुर्जों के लिए मुआवजा देते वक्त ऐसा हो सकता है कि वे उनकी 70 प्रतिशत कीमत ही दें और 30 प्रतिशत काट लें। ऐसे में 30 प्रतिशत रकम आपको अपनी जेब से भरनी पड़ेगी। लेकिन अगर आपने जीरो डेप्रिसिएशन बीमा कवर लिया है तो आपको पुर्जों की पूरी कीमत मिल सकती है।' इस कवर की कीमत आपकी कार के आईडीवी की 0.45 प्रतिशत से 1.25 प्रतिशत तक हो सकती है। अगर आपकी कार में आग लग जाए तो बीमा कंपनी को उसके कॉल सेंटर या ऐप्लिकेशन के जरिये फौरन सूचना दें। चौधरी का मशविरा है, 'यदि संभव हो तो आग लगने की घटना का वीडियो बना लें और आसपास खड़े लोगों में से कुछ को गवाही के लिए भी मना लें। लेकिन हादसे वाली जगह से अपनी कार तभी हटाएं, जब बीमा कंपनी का सर्वेयर आ जाए और आपकी कार की पूरी जांच कर ले।'
Keyword: car, insurance,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आरबीआई के संकेत के बाद कर्ज सस्ता करेंगे बैंक?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.