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कैसे होम लोन की राशि बढ़ाएं और ईएमआई घटाएं

संजय कुमार सिंह /  March 17, 2019

हाल में ही एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस (एलआईसीएचएफ) ने लंबी मियाद के लिए कर्ज मुहैया कराने के मकसद से इंडिया मॉर्गेज गारंटी कॉरपोरेशन (आईएमजीसी) के साथ करार किया। इस करार के बाद अब एलआईसीएचएफ अब अधिक उम्र के ग्राहकों को भी कर्ज देगी, जो ग्राहक की उम्र 75 साल होने तक चलता रहेगा। चूंकि कर्ज की मियाद बढ़ जाएगी, इसलिए ग्राहक को दो तरह से फायदा होगा - या तो वह ज्यादा रकम उधार ले पाएगा या उसकी मासिक किस्त (ईएमआई) अपेक्षाकृत कम रहेगी। यह सब तभी मुमकिन होता है, जब कर्ज देने वाली संस्था किसी मॉर्गेज गारंटर के साथ हाथ मिलाती है।

 
क्या है मॉर्गेज गारंटी? 
 
मॉर्गेज गारंटी जोखिम को हस्तांतरित करने का तरीका है। आवास ऋण का जोखिम बैंक या हाउसिंग फाइनैंस कंपनी से मॉर्गेज गारंटी कंपनी के पास चला जाता है। इंडिया मॉर्गेज गारंटी कॉरपोरेशन के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी शोभन मंडल ने कहा, 'होम लोन में घर एक तरह से जमानत यानी सिक्योरिटी का काम करता है। अगर कर्ज देने वाली संस्था घर बेचकर बकाया राशि नहीं वसूल पाती है तो बची रकम की भरपाई आईएमजीसी करती है।' 
 
पात्रता बढ़ेगी, ज्यादा कर्ज मिलेगा
 
मॉर्गेज गारंटी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे ग्राहकों की पात्रता यानी कर्ज पाने की काबिलियत बढ़ जाती है। मान लीजिए कि खराब क्रेडिट प्रोफाइल वाला कोई व्यक्ति किसी बड़े बैंक के पास कर्ज लेने के लिए पहुंचता है। आम तौर पर बैंक ऐसे व्यक्ति के कर्ज को मंजूरी ही नहीं देगा। लेकिन अगर उसके साथ मॉर्गेज गारंटी होती है तो बैंक आराम से कर्ज दे सकता है।  मंडल बताते हैं, 'इस तरह कर्ज चाहने वाले इन लोगों को गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के पास नहीं जाना पड़ेगा, जिनसे उन्हें ऊंची ब्याज दर पर ही कर्ज मिल पाता।'
 
अगर मॉर्गेज गारंटी मिल जाए तो कर्ज देने वाली संस्था या बैंक कर्ज की राशि में 20 से 30 फीसदी तक का इजाफा करने के लिए तैयार हो जाते हैं। युवा खरीदार आम तौर पर मकान इसीलिए नहीं खरीद पाते क्योंकि उनके पास डाउन पेमेंट के लिए पैसा ही नहीं होता। लेकिन मॉर्गेज गारंटी का सहारा मिल जाए तो उनके लिए संपत्ति की कीमत और कर्ज का अनुपात बढ़ जाता है यानी उन्हें पहले के मुकाबले अधिक कर्ज मिल जाता है। इससे उन्हें पर्सनल लोन, गोल्ड लोन जैसे महंगे कर्ज का सहारा नहीं लेना पड़ता। जब लोग मकान खरीदते हैं तो कुछ साल तक उन्हें माली दिक्कत का सामना भी करना पड़ता है क्योंकि कर्ज की किस्त के नाम पर अच्छी खासी रकम चली जाती है। लेकिन अगर बैंक उन्हें अधिक समय के लिए यानी लंबी मियाद के लिए कर्ज देने को तैयार हो जाता है तो ईएमआई की रकम कम हो जाती है, जिससे कर्ज लेने वाले को कुछ राहत मिल जाती है।
 
मॉर्गेज गारंटी से अधिक उम्र वालों को भी कर्ज मिलने के आसार बढ़ जाते हैं। ज्यादातर बैंकों की कोशिश रहती है कि ग्राहक की उम्र 60 साल होने तक पूरा कर्ज वसूल लिया जाए। होम लोन यूं तो 30 साल तक के लिए मिल जाते हैं। लेकिन 30 साल की मियाद तभी रखी जाएगी, जब खरीदार की उम्र 30 साल या उससे कम हो। दिक्कत यह है कि ज्यादातर लोग 30 साल की उम्र गुजरने के बाद ही मकान खरीद पाते हैं, इसलिए उन्हें कम मियाद के लिए कर्ज मिलता है। मॉर्गेट गारंटी होने पर बैंक सेवानिवृत्ति की उम्र गुजर जाने के कुछ साल बाद तक के लिए कर्ज देने को तैयार हो जाते हैं। मसलन 45 साल के किसी व्यक्ति को आम तौर पर 15 साल के लिए ही कर्ज मिल पाता है यानी 60 साल की उम्र पूरी होने तक उससे कर्ज वसूल लिया जाता है। चूंकि मियाद कम होती है, इसलिए उसे मिलने वाले कर्ज की रकम भी कुछ कम हो जाती है। साथ ही उसकी ईएमआई भी जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है।
 
ऐसे मामलों में मॉर्गेज गारंटी कितनी काम आती है, इसे एलआईसीएचएफएल के उदाहरण से ही समझ लेते हैं। जिन लोगों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलनी होती है, उन्हें कंपनी 20 साल के लिए कर्ज दे देती थी और 70 साल की उम्र तक उनकी ईएमआई चलती रहती थी। मॉर्गेज गारंटी होने पर अब वह 30 साल तक के लिए कर्ज दे देगी और उसकी ईएमआई 75 साल की उम्र तक वसूली जाएंगी। मॉर्गेज गारंटी हो तो ऋणदाता एसएमई क्षेत्र या छोटे-मोटे नियोक्ताओं के पास काम करने वाले वेतनभोगियों को भी कर्ज देने के लिए तैयार हो जाते हैं। आम तौर पर वे उन्हीं लोगों को कर्ज देना पसंद करते हैं, जो किसी बड़ी और प्रतिष्ठिïत संस्था में काम कर रहे हैं। आईएमजीसी ने अभी तक भारतीय स्टेट बैंक, ऐक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, टाटा कैपिटल, एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस आदि के साथ करार कर लिया है।
 
नैतिकता का जोखिम 
 
कर्ज आसानी से मिले और अधिक रकम मिले तो अच्छा ही लगता है। लेकिन इससे नैतिकता पर खतरा खड़ा हो सकता है। 2008 में जो वित्तीय संकट आया था, उसकी वजह अंडरराइटिंग के मानकों में ढिलाई बरता जाना ही था। अगर कर्ज आसानी से मिले तो संपत्ति बाजार में बनावटी उछाल आ सकती है और इससे डिफॉल्ट के मामले बढ़ सकते हैं। ऐसा हुआ तो समूचे उद्योग की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। क्रेडिट सुधार के संस्थापक और निदेशक अरुण राममूर्ति ताकीद करते हैं, 'नियामक को इस तरह की योजना पर कड़ी नजर रखनी होगी और सुनिश्चित करना होगा कि इससे पूरी बैंकिंग प्रणाली में जोखिम पैदा न हो।'
 
लागत का ध्यान रखें 
 
ग्राहकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मॉर्गेज गारंटी की कीमत चुकानी पड़ती है। इस समय कर्ज देने वाली कई संस्थाएं और बैंक ग्राहक से इसके लिए एकबारगी फीस वसूल रहे हैं, जो कर्ज की कुल रकम की 1 से 1.5 फीसदी तक होती है। हो सकता है कि भविष्य में कुछ बैंक एकबारगी रकम लेने के बजाय ऊंची दर पर ब्याज वसूलना शुरू कर दें। मॉर्गेज के बदले कुछ फीस देना बुरा नहीं है, लेकिन आपको पता होना चाहिए कि वास्तव में आप कितनी रकम चुका रहे हैं। हालांकि अधिक उम्र वाले ग्राहकों के पास कम मियाद के लिए कर्ज वाली शर्त से बचने के दूसरे तरीके भी हैं। डिजिटल होम लोन ब्रोकर कंपनी स्विचमी के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी आदित्य मिश्रा समझाते हैं, 'अगर कर्ज मांगने वाले की उम्र 50 साल है और बैंक कता है कि उसे 60 साल की उम्र तक के लिए ही कर्ज दिया जाएगा तो वह अपने पुत्र या छोटे भाई को साथ में ले सकता है और बतौर को-बॉरोअर उसका नाम दे सकता है।' अगर यह तरीका आपके लिए काम नहीं कर रहा हो तभी आपको मॉर्गेज गारंटी का रास्ता अपनाना चाहिए और फीस भरनी चाहिए।
 
कर्ज लौटा पाएंगे या नहीं
 
भले ही आज बैंक और हाउसिंग फाइनैंस कंपनियां मॉर्गेज गारंटी देखकर आपको ज्यादा कर्ज देने या 60 साल की उम्र से भी अधिक समय के लिए कर्ज देने को तैयार हैं, लेकिन बतौर कर्जदार आपको खुद से पूछना चाहिए कि आप कर्ज चुका पाएंगे या नहीं। राममूर्ति कहते हैं, 'खुद से पूछिए कि क्या 60 साल की उम्र के बाद भी आप काम करते रहेंगे? क्या आपके पास इतनी रकम आती रहेगी कि आप ईएमआई आसानी से चुका सकें?' अपनी क्षमता से अधिक कर्ज लेने से हमेशा बचना चाहिए। राममूर्ति की सलाह है, 'आप जो भी ईएमआई चुका रहे हैं, उन्हें जोड़कर जो रकम आती है, वह आपके हाथ में आने वाली तनख्वाह के 50 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए।'
 
लंबे अरसे के लिए कर्ज लेने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन आपको पता होना चाहिए कि मियाद बढ़ाने पर ब्याज की कुल रकम भी बढ़ जाती है यानी आपको ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ता है। आखिर में मिश्रा सुझाव देते हैं कि यह सुविधा लेने वाले लोगों को प्रीपेमेंट यानी समय पूर्व भुगतान की कोशिश सबसे पहले करनी चाहिए।
Keyword: real estate, property, LIC,
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